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Basti News: जांच न निगरानी, ओवरलोड वाहनों से यात्रियों के साथ सड़क भी खतरे में
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सड़क पर दौड़ रहे ओवरलोड वाहन।
बस्ती। लखनऊ- गोरखपुर फोरलेन और लुंबिनी-दुद्धी टू-लेन हाईवे ओवरलोड वाहनों से अक्सर हिल रहा है। टोल बचाने के चक्कर में इन वाहनों के आवागमन का दबाव बढ़ा हुआ है। इसके चलते हादसे भी अक्सर हो रहे हैं। इधर सड़क सुरक्षा माह भी मनाया जा रहा है।
मगर परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई कागज से निकलकर धरातल पर नहीं दिख रही है। यहां तक कि जिले स्तर पर एआरटीओ प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने से भी अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया है। प्रवर्तन का पूरा दारोमदार महज एक यात्री कर अधिकारी (पीटीओ) पर ही निर्भर होकर रह गया है।
जिले में गुड्स कैरियर में पंजीकृत भारी वाहनों की संख्या 2050 है। इसके अतिरिक्त मैक्सी कैब में 246 छोटे कैरियर वाहन अलग-अलग क्षमता के पंजीकृत हैं। इन वाहनों से क्षमता से डेढ़ से दोगुना अधिक भार लादकर सामग्रियों की ढुलाई की जा रही है। जानकार बता रहे हैं कि 30 से 35 टन पासिंग 14 चक्का ट्रक में 50 से 60 टन मॉल लोड करके गाड़ियां चल रही हैं। इसी तरह 18 से 22 चक्का वाले 45 से 50 टन क्षमता वाले टेलर में भी ढाले से ऊपर 60 टन तक गिट्टी, मोरंग, सीमेंट, खाद्य पदार्थ आदि सामग्रियों की ढुलाई की जा रही है।
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हाईवे पर रात के समय इस तरह के ओवरलोड वाहनों का कारवां चलता है। टोल प्लाजा कर्मियों के अनुसार चौबीस घंटे में 15 हजार से अधिक ट्रक गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन से गुजर रहे हैं। जबकि पांच से सात हजार की संख्या में गुड्स कैरियर कैटेगरी के वाहन लुंबिनी-दुद्धी मार्ग से गुजर रहे हैं। इनकी निगरानी के लिए जिले स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है। एआरटीओ प्रवर्तन का पद महीनों से खाली चल रहा है।
तीन महीने पहले यह जिम्मेदारी यहां स्थानांतरित होकर एआरटीओ प्रशासन माला बाजपेयी को दी गई थी। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस पद का दायित्व संभालने से इनकार कर दिया है। इसके बाद कोई भी एआरटीओ प्रवर्तन पद पर न कोई अधिकारी तैनात हुआ और न मौजूद किसी अधिकारी ने इस पद का अतिरिक्त भार संभाला है। जानकार बताते हैं कि परिवहन माफियाओं की विभाग से अच्छी सेटिंग होने के नाते इन वाहनों पर प्रवर्तन कार्रवाई न के बराबर होती है।
सेटिंग वाले वाहनों का नंबर सहित विवरण पीडीएफ फाइल में जिम्मेदारों के साथ चलने वाले करीबी कर्मचारियों के पास होता है। यदि चेकिंग के दौरान ओवरलोड वाहन पकड़े भी जाते हैं तो पीडीएफ फाइल से उसका मिलान होने पर छोड़ दिया जाता है। सीजनभर सड़कों पर दौड़ते रहे ओवरलोड गन्ना लदे वाहन :
जिले में हाईवे से लेकर संपर्क मार्गों तक पेराई सत्र के दौरान विभिन्न चीनी मिलों के तौल केंद्रों से ओवरहाईट और ओवरलोड गन्ना लेकर ट्राला, ट्रेलर और ट्रक दिन रात दौड़ते रहे। विभागीय कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कभी-कभी की गई। इसलिए इन ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लगते हुए नहीं देखा गया। इस बीच तमाम गन्ना लदे ट्रक पलटने से कई हादसे भी हुए।
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मगर परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई कागज से निकलकर धरातल पर नहीं दिख रही है। यहां तक कि जिले स्तर पर एआरटीओ प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभालने से भी अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया है। प्रवर्तन का पूरा दारोमदार महज एक यात्री कर अधिकारी (पीटीओ) पर ही निर्भर होकर रह गया है।
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जिले में गुड्स कैरियर में पंजीकृत भारी वाहनों की संख्या 2050 है। इसके अतिरिक्त मैक्सी कैब में 246 छोटे कैरियर वाहन अलग-अलग क्षमता के पंजीकृत हैं। इन वाहनों से क्षमता से डेढ़ से दोगुना अधिक भार लादकर सामग्रियों की ढुलाई की जा रही है। जानकार बता रहे हैं कि 30 से 35 टन पासिंग 14 चक्का ट्रक में 50 से 60 टन मॉल लोड करके गाड़ियां चल रही हैं। इसी तरह 18 से 22 चक्का वाले 45 से 50 टन क्षमता वाले टेलर में भी ढाले से ऊपर 60 टन तक गिट्टी, मोरंग, सीमेंट, खाद्य पदार्थ आदि सामग्रियों की ढुलाई की जा रही है।
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हाईवे पर रात के समय इस तरह के ओवरलोड वाहनों का कारवां चलता है। टोल प्लाजा कर्मियों के अनुसार चौबीस घंटे में 15 हजार से अधिक ट्रक गोरखपुर-लखनऊ फोरलेन से गुजर रहे हैं। जबकि पांच से सात हजार की संख्या में गुड्स कैरियर कैटेगरी के वाहन लुंबिनी-दुद्धी मार्ग से गुजर रहे हैं। इनकी निगरानी के लिए जिले स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है। एआरटीओ प्रवर्तन का पद महीनों से खाली चल रहा है।
तीन महीने पहले यह जिम्मेदारी यहां स्थानांतरित होकर एआरटीओ प्रशासन माला बाजपेयी को दी गई थी। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस पद का दायित्व संभालने से इनकार कर दिया है। इसके बाद कोई भी एआरटीओ प्रवर्तन पद पर न कोई अधिकारी तैनात हुआ और न मौजूद किसी अधिकारी ने इस पद का अतिरिक्त भार संभाला है। जानकार बताते हैं कि परिवहन माफियाओं की विभाग से अच्छी सेटिंग होने के नाते इन वाहनों पर प्रवर्तन कार्रवाई न के बराबर होती है।
सेटिंग वाले वाहनों का नंबर सहित विवरण पीडीएफ फाइल में जिम्मेदारों के साथ चलने वाले करीबी कर्मचारियों के पास होता है। यदि चेकिंग के दौरान ओवरलोड वाहन पकड़े भी जाते हैं तो पीडीएफ फाइल से उसका मिलान होने पर छोड़ दिया जाता है। सीजनभर सड़कों पर दौड़ते रहे ओवरलोड गन्ना लदे वाहन :
जिले में हाईवे से लेकर संपर्क मार्गों तक पेराई सत्र के दौरान विभिन्न चीनी मिलों के तौल केंद्रों से ओवरहाईट और ओवरलोड गन्ना लेकर ट्राला, ट्रेलर और ट्रक दिन रात दौड़ते रहे। विभागीय कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कभी-कभी की गई। इसलिए इन ओवरलोड वाहनों पर अंकुश लगते हुए नहीं देखा गया। इस बीच तमाम गन्ना लदे ट्रक पलटने से कई हादसे भी हुए।