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Basti News: डॉक्टर न दवाएं...अस्पताल में सता रहा ‘सौदेबाजी’ का मर्ज

Thu, 19 Feb 2026 12:55 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Feb 2026 12:55 AM IST
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Neither doctors nor medicines... the disease of 'bargaining' is troubling the hospital.
जिला अस्पताल के दूसरे गेट पर बांउड्रीवॉल के पास खुली दुकानें। संवाद
बस्ती। सरकारी चिकित्सालय के इलाज में बहुत झोल है। यहां पहुंच रहे मरीजों को समय पर इलाज और दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ओपीडी से इमरजेंसी तक इलाज के लिए मरीज और उनके तीमारदारों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इसका फायदा उठाकर मरीज माफिया सौदेबाजी कर रहे हैं।
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वह दुश्वारियों को गिनाकर मरीज को पहले निराश करते हैं, फिर बाहर के प्राइवेट अस्पतालों तक पहुंचाने में जुट जा रहे हैं। बाहर से जांच और दवा के नाम पर मरीजों को ठगा जा रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना आठ सौ से एक हजार मरीजों की आवक है। इसके अलावा 24 घंटे के भीतर इमरजेंसी में 25 से 30 मरीज पहुंच रहे हैं।
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तीमारदारों का कहना है कि यदि अस्पताल में समय से डॉक्टर और दवाएं उपलब्ध हों तो मरीज को बाहर ले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, मगर यहां तो मरीज माफिया ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और वार्ड तक हावी है। शायद उन्हीं की सेटिंग के चलते ही मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज कराने में दुश्वारियां खड़ी की जा रही हैं। रुधौली से आए सुभाष ने बताया कि वह अपने पिता का इलाज कराने जिला अस्पताल आए हैं। उन्हें सांस फूलने की बीमारी है। पहले पर्चा कटवाने के लिए लंबी लाइन में एक घंटे से अधिक समय तक खड़ा किया गया। इसके बाद पर्चा कटा तो ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर उसे जमा कर लिया गया। दोपहर करीब 12 बजे नंबर आया। चिकित्सक ने दवा लिखने की जगह जांच लिख दी। पैथोलॉजी पर पहुंचे तो रिपोर्ट के लिए अगले दिन बुलाया गया। अब बताइए, यह आने से क्या फायदा जब सिर्फ दौड़ाया ही जा रहा है।
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इस बीच एक अनजान शख्स भी तीन बार मिला। वह यही कहता फिर रहा था कि बाहर से जांच कराओ और दवा खरीदो तो चलो हम दिखवा दें, वरना ऐसे दौड़ते रहोगे। उसकी बात नहीं माने तो झेल रहे हैं। मेरी ही तरह एक और मरीज के परिजन उसकी बात मानकर उसके साथ कहीं चले गए। वहीं शहर के बैरियहवां के रहने वाले रमेश कुमार ने बताया कि यहां ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और वार्ड तक दलाल घूमते हैं।

निजी अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर और दवा दुकानों के एजेंट इस अस्पताल में चिकित्सक के इर्द-गिर्द हमेशा घूमते रहते हैं। जैसे ही उनका इशारा बाहर से जांच और दवा लिखने का होता है, साथ चल रहे लोग एक अलग से पर्ची पर इसे लिखकर थमा देते हैं। इसके बाद यह एजेंट मरीजों के साथ सक्रिय हो जाते हैं। इसी खेल की वजह से जिला अस्पताल आने वाले मरीज रोजाना ठगे जा रहे हैं।
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