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संकट में गौरिया नयन गांव
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Thu, 14 Jul 2016 11:26 PM IST
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हरैया तहसील के गौरियानैयन गांव स्थित बंधा सरयू के तेज धारा से हो रहा कटान।
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ऊफनाई सरयू नदी कभी भी गौरिया नयन गांव को अपने में विलीन कर सकती हैं। गांव के पास बने बंधे के दो स्पर बह गए हैं जबकि बांध का कटान भी तेज गति से हो रहा है। बुधवार रात कल्याणपुर से चंपलिया गांव बारात में गए लोगों को उस समय भागना पड़ा जब घरवालों ने बंधे के कटान और स्पर के ढह जाने की सूचना दी। सरयू नदी पर लोलपुर से विक्रमजोत तक 10 किलोमीटर बांध निर्माण की मंजूरी थी। उस समय नदी गांव से करीब चार किलोमीटर दूरी पर थी। बगल के गांव कल्याणपुर को बांध के अंदर रखने को लेकर राजनीति शुरू हो गई। गांववालों ने तहसील में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। राजस्थान से बांध बनाने आए लोगों को भगा दिया। जिसके कारण महज डेढ़ किलोमीटर ही बांध का निर्माण हो सका।
विभागीय लापरवाही के कारण इस बंधे की देख रेख नहीं हुई। बुधवार रात नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। कुछ ही घंटों बाद स्पर नंबर आठ और नौ के बीच बंधे का कटान शुरू हो गया। दोनों स्पर भी क्षतिग्रस्त हो गए। पास स्थित कब्रिस्तान भी कटान के मुहाने पर है। शाम से ही गांव में बंधे की कटान और बढ़ते जलस्तर को देख लोग बाढ़ खंड जेई से फोन पर संपर्क करते रहे। देर रात जेई के पहुंचने और आश्वासन पर सुबह बंधे के बचाव का कार्य शुरू हुआ, लेकिन गांव वालों में नाराजगी और दहशत है। बाढ़ खंड की ओर से दो ट्रॉली ईँट के टुकड़े और एक ट्रॉली बोल्डर पहुंचाया गया। जो पानी में डालते ही बह जा रहा है। बंधे और गांव के बीच महज 10 मीटर की दूरी बची है। जबकि बांध और राष्ट्रीय राजमार्ग 28 के बीच महज 400 मीटर की दूरी है। बांध कटते ही पानी सीधे हाइवे पर पहुंचेगा। जिससे आसपास के अन्य गांवों को भी खतरा बढ़ जाएगा।
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विभागीय लापरवाही के कारण इस बंधे की देख रेख नहीं हुई। बुधवार रात नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। कुछ ही घंटों बाद स्पर नंबर आठ और नौ के बीच बंधे का कटान शुरू हो गया। दोनों स्पर भी क्षतिग्रस्त हो गए। पास स्थित कब्रिस्तान भी कटान के मुहाने पर है। शाम से ही गांव में बंधे की कटान और बढ़ते जलस्तर को देख लोग बाढ़ खंड जेई से फोन पर संपर्क करते रहे। देर रात जेई के पहुंचने और आश्वासन पर सुबह बंधे के बचाव का कार्य शुरू हुआ, लेकिन गांव वालों में नाराजगी और दहशत है। बाढ़ खंड की ओर से दो ट्रॉली ईँट के टुकड़े और एक ट्रॉली बोल्डर पहुंचाया गया। जो पानी में डालते ही बह जा रहा है। बंधे और गांव के बीच महज 10 मीटर की दूरी बची है। जबकि बांध और राष्ट्रीय राजमार्ग 28 के बीच महज 400 मीटर की दूरी है। बांध कटते ही पानी सीधे हाइवे पर पहुंचेगा। जिससे आसपास के अन्य गांवों को भी खतरा बढ़ जाएगा।
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