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नाग पंचमी विशेष...... जहर से कम नहीं है सांपों के लिए दूध
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सांपों के लिए 'जहर' से कम नहीं है दूध
बस्ती। नागपंचमी के दिन सांप को दूध पिलाने से पुण्य मिलता है अथवा नहीं लेकिन इससे सांपों की जान जरूर खतरे में पड़ जाती है। दूध सांप के लिए जहर की तरह काम करता है। जंतु वैज्ञानिकों की मानें तो दूध सांप के फेफड़ों पर असर डालता है। इससे उसके शरीर में इंफेक्शन फैलने लगता है, जिससे कुछ समय के बाद फेफड़े फट जाते हैं और अंतत: सांप की मृत्यु हो जाती है।
नागपंचमी और त्यौहारों के अवसर पर सर्पों के उनके प्राकृतिक भोजन से वंचित करके जबरदस्ती गाय का दूध पिलाने से उन्हें दर्द और बीमारी महसूस होती है। जानकारों का दावा है कि नागपंचमी के दिन जो सांप दूध पीते हुए दिखाए जाते हैं, उन्हें संपेरे 15-20 दिनों से भूखा प्यासा रखते हैं। ऐसे में जब भूखे सांप के सामने दूध आता है, तो भूख-प्यास मिटाने की मजबूरी में दूध गटक लेता है। लेकिन उसे हजम नहीं कर पाता। अंतत: उसकी मौत हो जाती है।
इंदिरा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हेड जेपी शुक्ल कहते हैं कि सांप सरीसृप वर्ग का जंतु है। इसमें दूध पचाने के एंजाइम नहीं पाए जाते हैं। इन्हें नाग पंचमी के दिन दूध पिलाने की परंपरा आध्यात्मिक हो सकती है लेकिन यह सांप से स्वभाव के विपरीत है।
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मामूली इन्फेक्शन से भी मौत
- सरीसृपों के शरीर पर बाल अथवा पंख आदि नहीं होते हैं। इनके स्थान पर उनके शरीर पर शल्क पाए जाते हैं, जो उनके शरीर की नमी को बाहर जाने से रोकते हैं। ये प्राणी अपने शरीर के तापमान को स्थिर नहीं रख पाते हैं और वातावरण के अनुसार उनका आंतरिक तापमान बदलता रहता है। इसीलिए ज्यादा ठंड और ज्यादा गर्मी पड़ने पर यह मर जाते हैं। संपेरे जहरीले सांप के दांत तोड़ देते हैं,जिससे उनके मुंह में घाव हो जाता है। दूध पीने से इन्हें इन्फेक्शन हो जाता है। मामूली इन्फेक्शन भी इनकी मौत का कारण बन जाता है।
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सांप पूरी तरह से मांसाहारी होता और चूहे, मेढक, कीड़े-मकोड़े, मछलियां आदि खाता है। दूध का पाचन स्तनधारी ही अच्छे से कर सकते हैं दूध साप के लिए जहर समान है।
__डॉ आरपी यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर
प्राणी विज्ञान विभाग डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय सह सर्प विज्ञान विशेषज्ञ
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वन्यजीव अधिनियम में संरक्षित हैं सांप
- डीएफओ नवीन कुमार शाक्य का कहना है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत कोबरा तथा अन्य सर्प संरक्षित है एवं उन्हें पकड़ना या चोट पहुंचा एक दंडनीय अपराध है। जहां तक दूध पिलाने का सवाल है तो सांप मांसाहारी जंतु है। जो चूहा, मेंढक, छिपकली आदि को शिकार बनाता है। इनको दूध पिलाना उचित नहीं है।
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बस्ती। नागपंचमी के दिन सांप को दूध पिलाने से पुण्य मिलता है अथवा नहीं लेकिन इससे सांपों की जान जरूर खतरे में पड़ जाती है। दूध सांप के लिए जहर की तरह काम करता है। जंतु वैज्ञानिकों की मानें तो दूध सांप के फेफड़ों पर असर डालता है। इससे उसके शरीर में इंफेक्शन फैलने लगता है, जिससे कुछ समय के बाद फेफड़े फट जाते हैं और अंतत: सांप की मृत्यु हो जाती है।
नागपंचमी और त्यौहारों के अवसर पर सर्पों के उनके प्राकृतिक भोजन से वंचित करके जबरदस्ती गाय का दूध पिलाने से उन्हें दर्द और बीमारी महसूस होती है। जानकारों का दावा है कि नागपंचमी के दिन जो सांप दूध पीते हुए दिखाए जाते हैं, उन्हें संपेरे 15-20 दिनों से भूखा प्यासा रखते हैं। ऐसे में जब भूखे सांप के सामने दूध आता है, तो भूख-प्यास मिटाने की मजबूरी में दूध गटक लेता है। लेकिन उसे हजम नहीं कर पाता। अंतत: उसकी मौत हो जाती है।
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इंदिरा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हेड जेपी शुक्ल कहते हैं कि सांप सरीसृप वर्ग का जंतु है। इसमें दूध पचाने के एंजाइम नहीं पाए जाते हैं। इन्हें नाग पंचमी के दिन दूध पिलाने की परंपरा आध्यात्मिक हो सकती है लेकिन यह सांप से स्वभाव के विपरीत है।
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मामूली इन्फेक्शन से भी मौत
- सरीसृपों के शरीर पर बाल अथवा पंख आदि नहीं होते हैं। इनके स्थान पर उनके शरीर पर शल्क पाए जाते हैं, जो उनके शरीर की नमी को बाहर जाने से रोकते हैं। ये प्राणी अपने शरीर के तापमान को स्थिर नहीं रख पाते हैं और वातावरण के अनुसार उनका आंतरिक तापमान बदलता रहता है। इसीलिए ज्यादा ठंड और ज्यादा गर्मी पड़ने पर यह मर जाते हैं। संपेरे जहरीले सांप के दांत तोड़ देते हैं,जिससे उनके मुंह में घाव हो जाता है। दूध पीने से इन्हें इन्फेक्शन हो जाता है। मामूली इन्फेक्शन भी इनकी मौत का कारण बन जाता है।
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सांप पूरी तरह से मांसाहारी होता और चूहे, मेढक, कीड़े-मकोड़े, मछलियां आदि खाता है। दूध का पाचन स्तनधारी ही अच्छे से कर सकते हैं दूध साप के लिए जहर समान है।
__डॉ आरपी यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर
प्राणी विज्ञान विभाग डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय सह सर्प विज्ञान विशेषज्ञ
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वन्यजीव अधिनियम में संरक्षित हैं सांप
- डीएफओ नवीन कुमार शाक्य का कहना है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत कोबरा तथा अन्य सर्प संरक्षित है एवं उन्हें पकड़ना या चोट पहुंचा एक दंडनीय अपराध है। जहां तक दूध पिलाने का सवाल है तो सांप मांसाहारी जंतु है। जो चूहा, मेंढक, छिपकली आदि को शिकार बनाता है। इनको दूध पिलाना उचित नहीं है।
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