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हर्रैया के 571 गांवों को मिलाकर तहसील बनेगा मखौड़ा धाम
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हर्रैया के 571 गांवों को मिलाकर मखौड़ा धाम बनेगा तहसील
विक्रमजोत। जिले की सबसे बड़ी तहसील हर्रैया के बंटवारे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने इसके लिए तहसील का नक्शा प्रस्तावित किया है। क्षेत्रफल का आंकलन किया जा रहा है। नई तहसील का नाम मखौड़ा धाम व उसका मुख्यालय परशुरामपुर को बनाने का प्रस्ताव है। भगवान राम के नाम से जुड़ा मखौड़ा धाम जिले की पांचवीं तहसील होगी। हालांकि पहले हर्रैया तहसील को बांट कर विक्रमजोत बनाया जाना था। लेकिन अब प्रशासन परशुरामपुर के लिए प्रस्ताव की तैयारी में जुटा है। हर्रैया तहसील में 1535 गांव हैं।
यह आ रही थी मुश्किल
383 लेखपाल सर्किल वाले तहसील के काम करने के लिए एक एसडीएम व एक तहसीलदार के लिए मुश्किल हो रही थी। इसलिए प्रशासन ने 571 गांवों को अलग कर मखौड़ा धाम तहसील का प्रस्ताव किया है। इसके बाद हर्रैया तहसील में 964 गांव रह जाएंगे। भूलेख अनुभाग की तरफ से नई तहसील का नक्शा, क्षेत्रफल, तहसील बनाने पर आने वाले व्यय का आंकलन किया जा रहा है। जल्द ही नई तहसील का प्रस्ताव राजस्व परिषद को भेजा जाएगा।
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तहसील बनाने के विरोध में एकजुट
विक्रमजोत क्षेत्र के 20 से अधिक जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मखौड़ा को तहसील बनाए जाने का विरोध किया है। हिंदू युवा वाहिनी के जिला उपाध्यक्ष सर्वजीत सिंह का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले विक्रमजोत में तहसील बनाने का प्रस्ताव शासन ने स्वीकार किया था। तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने घोषणा भी कर दी थी। लेकिन लोकसभा चुनाव बीतते ही जनप्रतिनिधियों ने विक्रमजोत से तहसील मुख्यालय हटाकर मखौड़ा परशुरामपुर को बनाने की प्रक्रिया शुरू कराकर क्षेत्रवासियों का अपमान किया है। प्रधान कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि विक्रमजोत को तहसील बनाने के लिए सत्ता से संघर्ष करेंगे। जल्द ही इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष द्वारिका नाथ पांडेय का कहना है कि सांसद और विधायक ने विक्रमजोत के साथ छल किया है। विक्रमजोत तहसील मुख्यालय बनने की सभी आधारभूत मानकों पर खरा उतरता है। यह तहसील मुख्यालय बनाया जाता है तो दुबौलिया, परशुरामपुर विक्रमजोत सहित लाखों की आबादी को सर्वाधिक लाभ पहुंचेगा।
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विक्रमजोत। जिले की सबसे बड़ी तहसील हर्रैया के बंटवारे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने इसके लिए तहसील का नक्शा प्रस्तावित किया है। क्षेत्रफल का आंकलन किया जा रहा है। नई तहसील का नाम मखौड़ा धाम व उसका मुख्यालय परशुरामपुर को बनाने का प्रस्ताव है। भगवान राम के नाम से जुड़ा मखौड़ा धाम जिले की पांचवीं तहसील होगी। हालांकि पहले हर्रैया तहसील को बांट कर विक्रमजोत बनाया जाना था। लेकिन अब प्रशासन परशुरामपुर के लिए प्रस्ताव की तैयारी में जुटा है। हर्रैया तहसील में 1535 गांव हैं।
यह आ रही थी मुश्किल
383 लेखपाल सर्किल वाले तहसील के काम करने के लिए एक एसडीएम व एक तहसीलदार के लिए मुश्किल हो रही थी। इसलिए प्रशासन ने 571 गांवों को अलग कर मखौड़ा धाम तहसील का प्रस्ताव किया है। इसके बाद हर्रैया तहसील में 964 गांव रह जाएंगे। भूलेख अनुभाग की तरफ से नई तहसील का नक्शा, क्षेत्रफल, तहसील बनाने पर आने वाले व्यय का आंकलन किया जा रहा है। जल्द ही नई तहसील का प्रस्ताव राजस्व परिषद को भेजा जाएगा।
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तहसील बनाने के विरोध में एकजुट
विक्रमजोत क्षेत्र के 20 से अधिक जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मखौड़ा को तहसील बनाए जाने का विरोध किया है। हिंदू युवा वाहिनी के जिला उपाध्यक्ष सर्वजीत सिंह का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले विक्रमजोत में तहसील बनाने का प्रस्ताव शासन ने स्वीकार किया था। तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने घोषणा भी कर दी थी। लेकिन लोकसभा चुनाव बीतते ही जनप्रतिनिधियों ने विक्रमजोत से तहसील मुख्यालय हटाकर मखौड़ा परशुरामपुर को बनाने की प्रक्रिया शुरू कराकर क्षेत्रवासियों का अपमान किया है। प्रधान कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि विक्रमजोत को तहसील बनाने के लिए सत्ता से संघर्ष करेंगे। जल्द ही इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष द्वारिका नाथ पांडेय का कहना है कि सांसद और विधायक ने विक्रमजोत के साथ छल किया है। विक्रमजोत तहसील मुख्यालय बनने की सभी आधारभूत मानकों पर खरा उतरता है। यह तहसील मुख्यालय बनाया जाता है तो दुबौलिया, परशुरामपुर विक्रमजोत सहित लाखों की आबादी को सर्वाधिक लाभ पहुंचेगा।
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