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Basti News: कम मतदान ने उड़ाई रणनीतिकारों के चेहरे की रंगत
Fri, 12 May 2023 01:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 12 May 2023 01:54 AM IST
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नगर पंचायत नगर प्राथमिक विद्यालय नगर मे वोट डालने के लिए लगी लाइन।
बस्ती। बागियों की महत्वाकांक्षा ने निकाय चुनाव के रणनीतिकारों की नींद पहले से उड़ा रखी थी, उम्मीद से कम मतदान ने चेहरे की रंगत भी गायब कर दी है। शहरी क्षेत्र के ज्यादातर मतदाता पिछले चुनाव की तरह इस बार भी घर से कम ही निकले, जो निकले वह भी खामोश रहे। जो मुखर नजर आए वह वोटरलिस्ट में नाम न होने के चलते बूथ से निराश होकर लौटते समय सिस्टम को कोस रहे थे। मतदाताओं के इस व्यवहार ने प्रत्याशियों की चिंता और बढ़ा दी।
2017 में 48.85 प्रतिशत मतदाता बूथों तक पहुंचे थे। वर्ष 2023 के अंतिम आंकड़ों में शहर का मतदान 45.14 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस हिसाब से इस बार भी औसत मतदान ही हो सका। यदि वोटरलिस्ट में नामों को लेकर गड़बड़ी नहीं हुई होती तो यह आंकड़ा निश्चित तौर पर कुछ और हो सकता था। राजनीति शास्त्र के सेवानिवृत्त प्रवक्ता अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि मतदान कम होने के पीछे कोई एक कारण नहीं हो सकता है। बताते हैं कि मौसम अनुकूल न होने के कारण मतदाता घरों से नहीं निकले। बूथों पर छांव के लिए टेंट आदि की व्यवस्था न होना, मतदाता सूची में नाम न होना या गड़बड़ी होना भी मत प्रतिशत को कम करने में सहायक साबित हुआ। ज्यादातर दलों ने ऐसे प्रत्याशी मैदान में उतारे जो सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं हैं। मतदाता जिन्हें व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानते उन्हें वोट कैसे दें। मतदाताओं को मन माफिक प्रत्याशी न मिलना भी वोट प्रतिशत कम होने का कारण हो सकता है। कम मत प्रतिशत के कारणों को जानने के लिए राजनीतिक दलों व प्रशासन को मंथन करना होगा। यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
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2017 में 48.85 प्रतिशत मतदाता बूथों तक पहुंचे थे। वर्ष 2023 के अंतिम आंकड़ों में शहर का मतदान 45.14 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस हिसाब से इस बार भी औसत मतदान ही हो सका। यदि वोटरलिस्ट में नामों को लेकर गड़बड़ी नहीं हुई होती तो यह आंकड़ा निश्चित तौर पर कुछ और हो सकता था। राजनीति शास्त्र के सेवानिवृत्त प्रवक्ता अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि मतदान कम होने के पीछे कोई एक कारण नहीं हो सकता है। बताते हैं कि मौसम अनुकूल न होने के कारण मतदाता घरों से नहीं निकले। बूथों पर छांव के लिए टेंट आदि की व्यवस्था न होना, मतदाता सूची में नाम न होना या गड़बड़ी होना भी मत प्रतिशत को कम करने में सहायक साबित हुआ। ज्यादातर दलों ने ऐसे प्रत्याशी मैदान में उतारे जो सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं हैं। मतदाता जिन्हें व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानते उन्हें वोट कैसे दें। मतदाताओं को मन माफिक प्रत्याशी न मिलना भी वोट प्रतिशत कम होने का कारण हो सकता है। कम मत प्रतिशत के कारणों को जानने के लिए राजनीतिक दलों व प्रशासन को मंथन करना होगा। यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
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