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Basti News: एसआईआर में उलझे कानूनगो-लेखपाल...भटक रहे फरियादी
Tue, 02 Dec 2025 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 02 Dec 2025 12:59 AM IST
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सदर तहसील का भवन। संवाद
- फोटो : बॉयलर पूजन के लिए हवन करते जीएम राजेंद्र प्रसाद व अन्य लोग।
बस्ती। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) भरवाने को समय से पूरा करने की पाबंदी ने कानूनगो और लेखपालों को उलझा कर रख दिया है। वे अपने मूल काम से भटक गए हैं। ऐसे में भूमि की पैमाइश, आय-जाति और निवासी प्रमाणपत्र आदि मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है, जबकि भूमि की पैमाइश के लिए यह उपयुक्त समय है। क्योंकि फसल कटने के बाद खेत खाली हो जाते हैं।
बता दें कि कानूनगो ओर लेखपाल से जुड़े महत्वपूर्ण काम इन दिनों ठप होने से तहसील में फरियादियों की संख्या बढ़ गई है। कानूनगो और लेखपाल को खोजते-खोजते फरियादी तहसील पहुंच रहे हैं। यहां आने पर उन्हें पता चलता कि लेखपाल एसआईआर फॉर्म भरवाने गए हैं। मरता क्या न करता की कहावत की तर्ज पर फरियादियों को मनमसोस कर घर लौट जाना पड़ता है। यह हाल करीब एक महीने से चल रहा है। अब तो तहसीलों में सन्नाटा भी दिखने लगा है। उधर, ऐसे आवेदनों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है।
जिले के चारों तहसीलों भानपुर, हर्रैया, बस्ती सदर और रुधौली में दो से तीन हजार आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं। सोमवार को सदर तहसील आए पचौरा गांव के राजकुमार ने कहा कि उनके खेत की पैमाइश और पत्थर नसब की कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जबकि धारा 24 के तहत आदेश भी हो चुका है। यह समय भी राजकुमार की नहीं है, बल्कि ऐसे कई लोग हैं, जो तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। सल्टौआ संवाद के अनुसार, क्षेत्र के सुनील कुमार कहना है कि आय-निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुका हूं। 15 दिन बीत जाने के बाद भी लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग पाई है। श्यामसुंदर, राजकुमार का कहना है कि जमीन की पैमाइश करवाना है। तहसील पर जाने के बाद लेखपाल कहते हैं कि पहले एसआईआर का काम होगा फिर अन्य काम निपटाएंगे।
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भानपुर संवाद के अनुसार, सोमवार को तहसील पहुंचे भाकियू टिकैत गुट के किसानों ने बताया कि लेखपालों की एसआईआर भरवाने में ड्यूटी लगने से धारा 24 के तहत होने वाला भूमि सीमांकन कार्य पूरी तरह ठप है। खसरे आदि की नलक भी नहीं मिल पा रही है।
आय-जाति-निवास के आवेदन में रिपोर्ट भी समय से नहीं लग पा रही है। उधर, लेखपाल संगठन से जुडे़ पदाधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एसआईआर के तहत ड्यूटी लगने से धारा 24 से जुड़ी पैमाइश व सामान्य शिकायतें, चकरोड, चकनाली आदि के प्रार्थना की जांच समय से नहीं हो पा रही है।
लेखपाल संघ के सदर ब्लॉक के मंत्री देवेंद्र सिंह का कहना है कि एसआईआर फॉर्म भरवाने के साथ ही दोहरा काम करना पड़ रहा है। आईजीआरएस, वरासत की एक समयसीमा है।
इसके अलावा इन दिनों फॉर्मर रजिस्ट्री भी चल रही है। जिले में पांच लाख 20 हजार किसान सम्मान निधि पाते हैं। इनमें 75 प्रतिशत किसानों को कागजात पूरा होने पर सम्मान निधि मिल रही है। 25 प्रतिशत किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री भी कराई जा रही है।
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बता दें कि कानूनगो ओर लेखपाल से जुड़े महत्वपूर्ण काम इन दिनों ठप होने से तहसील में फरियादियों की संख्या बढ़ गई है। कानूनगो और लेखपाल को खोजते-खोजते फरियादी तहसील पहुंच रहे हैं। यहां आने पर उन्हें पता चलता कि लेखपाल एसआईआर फॉर्म भरवाने गए हैं। मरता क्या न करता की कहावत की तर्ज पर फरियादियों को मनमसोस कर घर लौट जाना पड़ता है। यह हाल करीब एक महीने से चल रहा है। अब तो तहसीलों में सन्नाटा भी दिखने लगा है। उधर, ऐसे आवेदनों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है।
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जिले के चारों तहसीलों भानपुर, हर्रैया, बस्ती सदर और रुधौली में दो से तीन हजार आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं। सोमवार को सदर तहसील आए पचौरा गांव के राजकुमार ने कहा कि उनके खेत की पैमाइश और पत्थर नसब की कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जबकि धारा 24 के तहत आदेश भी हो चुका है। यह समय भी राजकुमार की नहीं है, बल्कि ऐसे कई लोग हैं, जो तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। सल्टौआ संवाद के अनुसार, क्षेत्र के सुनील कुमार कहना है कि आय-निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुका हूं। 15 दिन बीत जाने के बाद भी लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लग पाई है। श्यामसुंदर, राजकुमार का कहना है कि जमीन की पैमाइश करवाना है। तहसील पर जाने के बाद लेखपाल कहते हैं कि पहले एसआईआर का काम होगा फिर अन्य काम निपटाएंगे।
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भानपुर संवाद के अनुसार, सोमवार को तहसील पहुंचे भाकियू टिकैत गुट के किसानों ने बताया कि लेखपालों की एसआईआर भरवाने में ड्यूटी लगने से धारा 24 के तहत होने वाला भूमि सीमांकन कार्य पूरी तरह ठप है। खसरे आदि की नलक भी नहीं मिल पा रही है।
आय-जाति-निवास के आवेदन में रिपोर्ट भी समय से नहीं लग पा रही है। उधर, लेखपाल संगठन से जुडे़ पदाधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एसआईआर के तहत ड्यूटी लगने से धारा 24 से जुड़ी पैमाइश व सामान्य शिकायतें, चकरोड, चकनाली आदि के प्रार्थना की जांच समय से नहीं हो पा रही है।
लेखपाल संघ के सदर ब्लॉक के मंत्री देवेंद्र सिंह का कहना है कि एसआईआर फॉर्म भरवाने के साथ ही दोहरा काम करना पड़ रहा है। आईजीआरएस, वरासत की एक समयसीमा है।
इसके अलावा इन दिनों फॉर्मर रजिस्ट्री भी चल रही है। जिले में पांच लाख 20 हजार किसान सम्मान निधि पाते हैं। इनमें 75 प्रतिशत किसानों को कागजात पूरा होने पर सम्मान निधि मिल रही है। 25 प्रतिशत किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री भी कराई जा रही है।