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Basti News: शकरकंद, आलू मिलाकर तैयार हो रहा खोआ... संभलकर खाइएगा मिठाई
Tue, 29 Oct 2024 01:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 29 Oct 2024 01:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। त्योहार में दूध और खोआ की आपूर्ति और खपत की गणित समझने में दिमाग लगाएंगे तो उलझ जाएंगे। बेशक जिले और आसपास के क्षेत्रों में दुधारू पशुओं की संख्या न बढ़ी हो, लेकिन त्योहार पर बंपर मांग के बावजूद यहां दूध और खोआ की कमी नहीं होती। इसकी पूर्ति खोआ में आलू और शकरकंद की मिलावट कर की जा रही है।
जांच में न पकड़े जाने के लिए कुछ लोग एक्सपायरी हो चुका दूध पाउडर भी इस्तेमाल कर रहे हैं। रिफाइंड मिलाकर फैट की कमी को दूर कर दिया जाता है। जांच में पकड़ में नहीं आता, लेकिन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है।
दीपावली के मौके मिठाइयों का क्रेज सभी आयु वर्ग में है। इसलिए पांच दिन के त्योहार में कई टन खोआ की खपत हो जाती है। आंकड़ों पर गौर करें तो सामान्य दिनों में जिले में करीब सवा लाख लीटर दूध की खपत होती है। इनमें से 70 से 80 हजार लीटर दूध की मांग दुग्ध समितियों व डेयरी के जरिये पूरी हो जाती है। बाकी 35-40 हजार लीटर दूध कहां से आता है, यह एक रहस्य है। त्योहार की बात करें तो यह मांग चार से पांच गुना बढ़ जाती है।
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खोआ को सड़ने से बचाने के लिए फार्मालीन मिलाया जाता है। खोआ को बिना भूने दो-तीन दिन से ज्यादा नहीं खा जा सकता, इसलिए फार्मालीन मिलाया जाता है। इस रसायन का इस्तेमाल शवों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इससे पेट रोग, कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।
ऐसे करें खोआ की जांच : आयोडीन की एक गोली डालकर बर्तन में पानी गर्म करें। इसमें 10 से 20 ग्राम खोआ डालें। अगर यह भूरा हो जाए तो समझ लें कि स्टार्च मिला है।
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बस्ती। त्योहार में दूध और खोआ की आपूर्ति और खपत की गणित समझने में दिमाग लगाएंगे तो उलझ जाएंगे। बेशक जिले और आसपास के क्षेत्रों में दुधारू पशुओं की संख्या न बढ़ी हो, लेकिन त्योहार पर बंपर मांग के बावजूद यहां दूध और खोआ की कमी नहीं होती। इसकी पूर्ति खोआ में आलू और शकरकंद की मिलावट कर की जा रही है।
जांच में न पकड़े जाने के लिए कुछ लोग एक्सपायरी हो चुका दूध पाउडर भी इस्तेमाल कर रहे हैं। रिफाइंड मिलाकर फैट की कमी को दूर कर दिया जाता है। जांच में पकड़ में नहीं आता, लेकिन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है।
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दीपावली के मौके मिठाइयों का क्रेज सभी आयु वर्ग में है। इसलिए पांच दिन के त्योहार में कई टन खोआ की खपत हो जाती है। आंकड़ों पर गौर करें तो सामान्य दिनों में जिले में करीब सवा लाख लीटर दूध की खपत होती है। इनमें से 70 से 80 हजार लीटर दूध की मांग दुग्ध समितियों व डेयरी के जरिये पूरी हो जाती है। बाकी 35-40 हजार लीटर दूध कहां से आता है, यह एक रहस्य है। त्योहार की बात करें तो यह मांग चार से पांच गुना बढ़ जाती है।
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खोआ को सड़ने से बचाने के लिए फार्मालीन मिलाया जाता है। खोआ को बिना भूने दो-तीन दिन से ज्यादा नहीं खा जा सकता, इसलिए फार्मालीन मिलाया जाता है। इस रसायन का इस्तेमाल शवों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इससे पेट रोग, कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।
ऐसे करें खोआ की जांच : आयोडीन की एक गोली डालकर बर्तन में पानी गर्म करें। इसमें 10 से 20 ग्राम खोआ डालें। अगर यह भूरा हो जाए तो समझ लें कि स्टार्च मिला है।