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Basti News: न्यायिक अधिकारियों को जमानत आदेश में आरोपी के आपराधिक इतिहास का विवरण देना होगा

Wed, 08 Apr 2026 12:48 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2026 12:48 AM IST
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Judicial officers will have to give details of the criminal history of the accused in the bail order.
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों (सत्र न्यायाधीश, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और विशेष न्यायाधीश) को जमानत आदेश में आरोपी के आपराधिक इतिहास का विवरण एक तालिका में देना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकल पीठ ने नफीस उर्फ मोहम्मद नफीस की ओर से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान आपराधिक इतिहास छिपाने की बात सामने आने पर दिया।
कोर्ट ने दौरान पाया कि आरोपी नफीस ने जमानत अर्जी में हलफनामा दिया था कि उसके विरुद्ध कोई केस लंबित नहीं है, जबकि पांच आपराधिक मामले दर्ज थे। इस गंभीर विसंगति को देखते हुए कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (संशोधन) नियम-2025 का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। नए नियमों के अनुसार प्रत्येक आरोपी को जमानत के लिए आवेदन करते समय अपने विरुद्ध लंबित सभी मामलों और पिछले अदालती फैसलों का विवरण देना अनिवार्य है।
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कोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील, संबंधित जांच अधिकारी का कर्तव्य होगा कि वे जमानत की सुनवाई के समय आरोपी का सटीक और पूरा आपराधिक इतिहास अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। यदि अभियोजन पक्ष सही तथ्य रिकॉर्ड पर लाने में विफल रहता है तो हाईकोर्ट ने उसके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई के लिए मामले को संबंधित उच्च अधिकारियों को संदर्भित करने की चेतावनी दी है।
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आरोपी नफीस पर बस्ती के परसरामपुर थाने में एक महिला के साथ मारपीट करने का आरोप था, जिसके परिणामस्वरूप गर्भपात हो गया था। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई थी। बचाव पक्ष का तर्क था कि आरोपी को महिला की गर्भावस्था की जानकारी नहीं थी। इसलिए उसका इरादा उक्त अपराध करने का नहीं था। इस पर कोर्ट ने मेरिट और आरोपी की जेल अवधि को देखते हुए उसे व्यक्तिगत बॉन्ड और शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

साथ ही रजिस्ट्रार को निर्देशित किया गया है कि इस आदेश की प्रति प्रदेश के सभी न्यायिक अधिकारियों को प्रेषित करें, ताकि पूरे राज्य में इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जा सके।
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