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Basti News: आवागमन शुरू होते ही लग रहा जाम, बढ़ रही भीड़
Sun, 07 Apr 2024 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 07 Apr 2024 11:57 PM IST
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यातायात के लिहाज से अब संकरा महसूस होने लगा अस्पताल चौराहा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के अस्पताल चौराहा से आसानी से निकला मुश्किल हो गया है। आवागमन शुरू होते ही सड़क से लेकर कोने-किनारे तक लोग जाम में फंसे रहते हैं। यहां यातायात बहाल रखने के लिए एक तरफ से कतारबद्ध कर वाहनों को निकलवाना ही एक मात्र विकल्प है। आजकल मौसम भी तल्ख है। चिलचिलाती धूप में बहुत देर तक खड़ा होना भी मुहाल कर देने जैसा है। बावजूद इसके इस चौराहे पर बिना जाम से जूझते हुए आगे बढ़ पाना कठिन है।
बस्ती-कांटे मार्ग स्थित शहर का अस्पताल चौराहा अब काफी व्यस्त हो गया है। आसपास आबादी और आवागमन दोनों बेहिसाब बढ़ा है। इस चौराहे से निकलने वाली चारों सड़कों पर एक किमी की दूरी में तमाम निजी नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर, मेडिकल स्टोर, पैथोलॉजी सेंटर के अलावा अन्य छोटे- बड़े प्रतिष्ठानों की भरमार है। जिला अस्पतालों को छोड़कर इन प्रतिष्ठानाें के सामने ग्राहकों के वाहन पार्किंग के लिए इनके पास खुद की जगह नहीं है। यहां आने वाले लोग सड़क और फुटपाथ पर गाड़ी खड़ी कर अपना काम निपटाते हैं। नतीजा सड़क पर जाम लगना शुरू होता है और अस्पताल चौराहा ठसाठस भीड़ और जाम की जद में आ जाता है।
इसके अलावा आबादी और आवागमन के लिहाज से यह चौराहा अब काफी संकरा महसूस किया जा रहा है। बस्ती-कांटे मार्ग के सड़क की चौड़ाई 22 मीटर है, लेकिन चलने के लिए सात मीटर तारकोल की सड़क ही मिल पा रही है। बाकी यहां सड़क के दोनों तरफ साढ़े सात-सात मीटर चौड़ा फुटपाथ स्थाई एवं अस्थाई रूप से कब्जे में है। कुछ जगहों पर कब्जा नहीं है तो उस जगह को पार्किंग के काम लाया जा रहा है। इस सड़क को चौराहे पर क्रॉस कर रही दक्षिण दरवाजा से ओपेक चिकित्सालय कैली मार्ग की सड़क के अगल-बगल फुटपाथ ही नहीं है। सड़क से बिल्कुल सटकर दुकानें बनी हुई है।
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ऐसे में यहां काम से आने वाले लोग अपना वाहन सड़क पर ही खड़ा कर रहे हैं। जैसी ही शहरी आवागमन बढ़ता है इन दुश्वारियाें की वजह से इस चौराहे पर जाम लग जा रहा है। बस्ती-कांटे मार्ग पर गन्ना दफ्तर के सामने से लेकर मनहनडीह गांव तक और दूसरी सड़क पर दक्षिण दरवाजा से लेकर जामडीह तक वाहनों के पहिए थम जा रहे हैं। दिन में कई बार यह विकट स्थिति सामने आ रही है। पुलिस आवागमन बहाल रखने के लिए चौराहे पर पसीना बहाती है। घंटों मशक्कत के बाद कतारबद्ध करके वाहनों को निकाला जाता है। तब जाकर जाम खुल पाता है।
इस चौराहे पर सड़क से सटकर विद्युत खंभे लगे हैं। यह भी कुछ हद तक जाम का कारण बन रहे हैं। राहगीरों पर सुरक्षा का खतरा अलग से मंडराता है। दरअसल, बढ़ते आवागमन को देखते हुए एक दशक के भीतर यहां की सड़कें चौड़ी हुईं, मगर विद्युत खंभे शिफ्ट करने के बजाय पुराने जगह पर ही रह गए हैं। अब यह सड़क से बिल्कुल सट गए है। इससे इनसे बचते हुए वाहनों को निकलना पड़ता है।
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रोडवेज बसों के आवागमन का भी भार
अस्पताल चौराहे पर बस्ती-गोरखपुर रूट की रोडवेज बसों के अलावा बस्ती-नंदौर रूट पर चलने वाली प्राइवेट बसों के नियमित आवागमन का भार है। इस चौराहे से स्कूली बसों का भी दिन में दो बार आना-जाना हो रहा है। ऐसे में शहरी आवागमन शुरू होते ही यातायात का दबाव यहां बढ़ना स्वाभाविक है। वाहनों की क्रॉसिंग के दौरान यह चौराहा यातायात के दबाव को नहीं झेल पा रहा है। इससे चारों तरफ जाम लग रहा है।
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चौराहे पर ही बना लिए टैक्सी स्टैंड
इस चौराहे पर अलग-अलग रूट के ऑटो चालक टैक्सी स्टैंड भी बना लिए है। बस्ती-कांटे मार्ग पर चौराहे से महज दस कदम दूर हटकर मुंडेरवा, खलीलाबाद तक के लिए ऑटो लाइन से खड़े हो रहे हैं। ओपेक चिकित्सालय कैली मार्ग पर जामडीह तक सोनूपार, महसो, बनकटी, महुली तक सवारी ढोने के लिए ऑटो खड़े किए जा रहे हैं।
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शहर के अस्पताल चौराहे पर अक्सर यातायात व्यवस्था ठप हो जा रही है। इसका स्थाई निदान तभी होगा जब यहां अन्य शहरों की तरह फ्लाईओवर बने या चौराहे का विस्तार दूर तक किया जाए।
सुधीर पांडेय, मुरलीजोत
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घर से निकलने के बाद या काम से घर लौटते समय इस चौराहे पर जाम की समस्या से अक्सर जूझना पड़ रहा है। पहले तो हम लोग चौराहे पर रूककर चर्चा करते थे, अब जाम की वजह से यहां से आगे बढ़ लेना ही उचित समझते हैं।
मिथिलेश श्रीवास्तव, जखनी
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कोट
अतिक्रमण और जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए अभियान चलाने की तैयारी चल रही है। हम लोग खुद लोगों से सड़क और फुटपाथ खाली करने का आह्वान कर रहे हैं। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र सिंह, ईओ, नगर पालिका
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के अस्पताल चौराहा से आसानी से निकला मुश्किल हो गया है। आवागमन शुरू होते ही सड़क से लेकर कोने-किनारे तक लोग जाम में फंसे रहते हैं। यहां यातायात बहाल रखने के लिए एक तरफ से कतारबद्ध कर वाहनों को निकलवाना ही एक मात्र विकल्प है। आजकल मौसम भी तल्ख है। चिलचिलाती धूप में बहुत देर तक खड़ा होना भी मुहाल कर देने जैसा है। बावजूद इसके इस चौराहे पर बिना जाम से जूझते हुए आगे बढ़ पाना कठिन है।
बस्ती-कांटे मार्ग स्थित शहर का अस्पताल चौराहा अब काफी व्यस्त हो गया है। आसपास आबादी और आवागमन दोनों बेहिसाब बढ़ा है। इस चौराहे से निकलने वाली चारों सड़कों पर एक किमी की दूरी में तमाम निजी नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर, मेडिकल स्टोर, पैथोलॉजी सेंटर के अलावा अन्य छोटे- बड़े प्रतिष्ठानों की भरमार है। जिला अस्पतालों को छोड़कर इन प्रतिष्ठानाें के सामने ग्राहकों के वाहन पार्किंग के लिए इनके पास खुद की जगह नहीं है। यहां आने वाले लोग सड़क और फुटपाथ पर गाड़ी खड़ी कर अपना काम निपटाते हैं। नतीजा सड़क पर जाम लगना शुरू होता है और अस्पताल चौराहा ठसाठस भीड़ और जाम की जद में आ जाता है।
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इसके अलावा आबादी और आवागमन के लिहाज से यह चौराहा अब काफी संकरा महसूस किया जा रहा है। बस्ती-कांटे मार्ग के सड़क की चौड़ाई 22 मीटर है, लेकिन चलने के लिए सात मीटर तारकोल की सड़क ही मिल पा रही है। बाकी यहां सड़क के दोनों तरफ साढ़े सात-सात मीटर चौड़ा फुटपाथ स्थाई एवं अस्थाई रूप से कब्जे में है। कुछ जगहों पर कब्जा नहीं है तो उस जगह को पार्किंग के काम लाया जा रहा है। इस सड़क को चौराहे पर क्रॉस कर रही दक्षिण दरवाजा से ओपेक चिकित्सालय कैली मार्ग की सड़क के अगल-बगल फुटपाथ ही नहीं है। सड़क से बिल्कुल सटकर दुकानें बनी हुई है।
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ऐसे में यहां काम से आने वाले लोग अपना वाहन सड़क पर ही खड़ा कर रहे हैं। जैसी ही शहरी आवागमन बढ़ता है इन दुश्वारियाें की वजह से इस चौराहे पर जाम लग जा रहा है। बस्ती-कांटे मार्ग पर गन्ना दफ्तर के सामने से लेकर मनहनडीह गांव तक और दूसरी सड़क पर दक्षिण दरवाजा से लेकर जामडीह तक वाहनों के पहिए थम जा रहे हैं। दिन में कई बार यह विकट स्थिति सामने आ रही है। पुलिस आवागमन बहाल रखने के लिए चौराहे पर पसीना बहाती है। घंटों मशक्कत के बाद कतारबद्ध करके वाहनों को निकाला जाता है। तब जाकर जाम खुल पाता है।
इस चौराहे पर सड़क से सटकर विद्युत खंभे लगे हैं। यह भी कुछ हद तक जाम का कारण बन रहे हैं। राहगीरों पर सुरक्षा का खतरा अलग से मंडराता है। दरअसल, बढ़ते आवागमन को देखते हुए एक दशक के भीतर यहां की सड़कें चौड़ी हुईं, मगर विद्युत खंभे शिफ्ट करने के बजाय पुराने जगह पर ही रह गए हैं। अब यह सड़क से बिल्कुल सट गए है। इससे इनसे बचते हुए वाहनों को निकलना पड़ता है।
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रोडवेज बसों के आवागमन का भी भार
अस्पताल चौराहे पर बस्ती-गोरखपुर रूट की रोडवेज बसों के अलावा बस्ती-नंदौर रूट पर चलने वाली प्राइवेट बसों के नियमित आवागमन का भार है। इस चौराहे से स्कूली बसों का भी दिन में दो बार आना-जाना हो रहा है। ऐसे में शहरी आवागमन शुरू होते ही यातायात का दबाव यहां बढ़ना स्वाभाविक है। वाहनों की क्रॉसिंग के दौरान यह चौराहा यातायात के दबाव को नहीं झेल पा रहा है। इससे चारों तरफ जाम लग रहा है।
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चौराहे पर ही बना लिए टैक्सी स्टैंड
इस चौराहे पर अलग-अलग रूट के ऑटो चालक टैक्सी स्टैंड भी बना लिए है। बस्ती-कांटे मार्ग पर चौराहे से महज दस कदम दूर हटकर मुंडेरवा, खलीलाबाद तक के लिए ऑटो लाइन से खड़े हो रहे हैं। ओपेक चिकित्सालय कैली मार्ग पर जामडीह तक सोनूपार, महसो, बनकटी, महुली तक सवारी ढोने के लिए ऑटो खड़े किए जा रहे हैं।
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शहर के अस्पताल चौराहे पर अक्सर यातायात व्यवस्था ठप हो जा रही है। इसका स्थाई निदान तभी होगा जब यहां अन्य शहरों की तरह फ्लाईओवर बने या चौराहे का विस्तार दूर तक किया जाए।
सुधीर पांडेय, मुरलीजोत
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घर से निकलने के बाद या काम से घर लौटते समय इस चौराहे पर जाम की समस्या से अक्सर जूझना पड़ रहा है। पहले तो हम लोग चौराहे पर रूककर चर्चा करते थे, अब जाम की वजह से यहां से आगे बढ़ लेना ही उचित समझते हैं।
मिथिलेश श्रीवास्तव, जखनी
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कोट
अतिक्रमण और जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए अभियान चलाने की तैयारी चल रही है। हम लोग खुद लोगों से सड़क और फुटपाथ खाली करने का आह्वान कर रहे हैं। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र सिंह, ईओ, नगर पालिका