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Basti News: सतर्क हो जाएं.... कहीं आपका बच्चा मोबाइल पर तो नहीं दे रहा समय
Fri, 05 Apr 2024 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 05 Apr 2024 12:49 AM IST
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एक से पांच साल के बच्चे हो रहे वर्चुअल ऑटिज्म के शिकार
बच्चों की खुशियों का रखें ख्याल, पर मोबाइल फोन से बचाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आपका बच्चा दिनभर मोबाइल फोन देखते रहता है। किसी से बात नहीं करता और मोबाइल फोन में देखी हुई चीजें याद रखता है तो यह वर्चुअल ऑटिज्म का लक्षण हो सकता है। एक से दो साल के बच्चों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। यदि सही समय पर देखभाल और इलाज नहीं हुआ तो आगे वे डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं।
ऑटिज्म को मानसिक बीमारी से भी जाना जाता है। इसमें दिमाग का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता। ऑटिज्म की चपेट में आने वाला बच्चा या कोई बड़ा इंसान अपनी दुनिया में खोया रहता है। इसकी वजह से उसे ज्यादातर लोग मंदबुद्धि समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। वे एक बीमारी से ग्रसित होते हैं। ऐसे लोग समाज में काफी कम घुलते-मिलते हैं।
मनोवैज्ञानिक डॉ. एके दुबे ने बताया कि ऑटिज्म दो प्रकार की होती है। एक वर्चुअल और दूसरा क्लासिकल। क्लासिकल ऑटिज्म के शिकार वह बच्चे होते हैं जिनके मां-बाप के रिश्ते ठीक न हों या फिर उनका गर्भ में सही से विकास न हुआ हो। जबकि वर्चुअल ऑटिज्म के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक साल के बच्चों में दिखना शुरू हो जा रहा है। कोविड के बाद वर्चुअल ऑटिज्म के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
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डॉ. एके दुबे के मुताबिक ऑटिज्म के मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण है एकल परिवार। आजकल अभिभावक अपना समय बचाने के चक्कर में बच्चों को मोबाइल फोन दे देते हैं और अपना काम करते रहते हैं। इससे बच्चा कहीं जाता नहीं और वह अपना काम करते रहते हैं। पहले संयुक्त परिवार होता था तब बच्चों के साथ खेलने के लिए ज्यादा लोग हुआ करते थे। अब ऐसा नहीं है। हमेशा मोबाइल फोन देने की वजह से बच्चों को इसकी लत लग जाती है। सही समय पर इलाज न हो तो बच्चे को बोलने में दिक्कत हो सकती है। वह डिप्रेशन का भी शिकार हो सकता है।
...
ऑटिज्म के लक्षण
मनोचिकित्सक डॉ. एके दुबे के अनुसार इस बीमारी के लक्षण
बच्चा बात न करे और दूसरों से नजरें न मिलाए या ऐसा करते समय उसे घबराहट हो।
किसी को हमेशा तिरछी नजर से देखना।
हमेशा अकेला रहना।
पंजे पर चलना।
किसी तरह का संकेत नहीं देना।
एक ही तरह का गेम खेलना।
किसी की बात को अनसुना करना
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बच्चों की खुशियों का रखें ख्याल, पर मोबाइल फोन से बचाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आपका बच्चा दिनभर मोबाइल फोन देखते रहता है। किसी से बात नहीं करता और मोबाइल फोन में देखी हुई चीजें याद रखता है तो यह वर्चुअल ऑटिज्म का लक्षण हो सकता है। एक से दो साल के बच्चों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। यदि सही समय पर देखभाल और इलाज नहीं हुआ तो आगे वे डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं।
ऑटिज्म को मानसिक बीमारी से भी जाना जाता है। इसमें दिमाग का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता। ऑटिज्म की चपेट में आने वाला बच्चा या कोई बड़ा इंसान अपनी दुनिया में खोया रहता है। इसकी वजह से उसे ज्यादातर लोग मंदबुद्धि समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। वे एक बीमारी से ग्रसित होते हैं। ऐसे लोग समाज में काफी कम घुलते-मिलते हैं।
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मनोवैज्ञानिक डॉ. एके दुबे ने बताया कि ऑटिज्म दो प्रकार की होती है। एक वर्चुअल और दूसरा क्लासिकल। क्लासिकल ऑटिज्म के शिकार वह बच्चे होते हैं जिनके मां-बाप के रिश्ते ठीक न हों या फिर उनका गर्भ में सही से विकास न हुआ हो। जबकि वर्चुअल ऑटिज्म के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक साल के बच्चों में दिखना शुरू हो जा रहा है। कोविड के बाद वर्चुअल ऑटिज्म के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
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डॉ. एके दुबे के मुताबिक ऑटिज्म के मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण है एकल परिवार। आजकल अभिभावक अपना समय बचाने के चक्कर में बच्चों को मोबाइल फोन दे देते हैं और अपना काम करते रहते हैं। इससे बच्चा कहीं जाता नहीं और वह अपना काम करते रहते हैं। पहले संयुक्त परिवार होता था तब बच्चों के साथ खेलने के लिए ज्यादा लोग हुआ करते थे। अब ऐसा नहीं है। हमेशा मोबाइल फोन देने की वजह से बच्चों को इसकी लत लग जाती है। सही समय पर इलाज न हो तो बच्चे को बोलने में दिक्कत हो सकती है। वह डिप्रेशन का भी शिकार हो सकता है।
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ऑटिज्म के लक्षण
मनोचिकित्सक डॉ. एके दुबे के अनुसार इस बीमारी के लक्षण
बच्चा बात न करे और दूसरों से नजरें न मिलाए या ऐसा करते समय उसे घबराहट हो।
किसी को हमेशा तिरछी नजर से देखना।
हमेशा अकेला रहना।
पंजे पर चलना।
किसी तरह का संकेत नहीं देना।
एक ही तरह का गेम खेलना।
किसी की बात को अनसुना करना