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Basti News: सोना खरा है या खोटा... हो जाएं सजग, धंधेबाजों ने बुन रखा है जालं
Thu, 14 Nov 2024 02:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 14 Nov 2024 02:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सोने के आभूषणों की खरीदारी बढ़ते ही धंधेबाजों ने खेल शुरू कर दिया है। सराफा की छोटी दुकान हो या बड़ी, सोना खरीदने पर पक्की एवं पारदर्शी बिल कहीं नहीं दी जा रही है। कंप्यूटराइज्ड बिल में भी यह स्पष्ट नहीं कि किस आभूषण में कितना शुद्ध सोना है और कितनी मात्रा में अन्य धातु इस्तेमाल है। जबकि कच्चे बिल में वजन के हिसाब से सोने का ताजा रेट दर्शाकर मूल्य निर्धारित किया जा रहा है। ग्राहक को संतुष्ट करने के लिए इसमें कुछ छूट भी दी जा रही है।
जानकारों के अनुसार 24 कैरेट का सोना असली होता है। मगर, ज्वेलरी 18 कैरेट सोना में ही तैयार होती है। इसे टिकाऊ बनाने के लिए अन्य धातु का इस्तेमाल किया जाता है। मूल्य निर्धारित करते समय सोना का ताजा रेट और आभूषण में इस्तेमाल सोना की मात्रा स्पष्ट होनी चाहिए। मगर, बिल में इसका उल्लेख नहीं रहता है। सिर्फ आभूषण का वजन और मूल्य लिखकर पर्ची थमा दी जा रही है।
ग्राहक के कहने-सुनने पर कुछ छूट दे दी जाती है। कच्चे बिल पर भी धंधेबाज जीएसटी बिल लगा कर दे रहे हैं। शहर से लेकर आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों की कई सराफा दुकानों में बड़े पैमाने पर अवैध सोना (दो नंबर) खपाया जा रहा है। शादी-लगन के सीजन में धंधेबाज अवैध सोने को कच्चे पर्ची पर खपा रहे हैं।
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इसके अलावा अपने फर्म से जीएसटी की चोरी भी कर रहे हैं। ऐसे में धंधेबाजों ने दोहरा मुनाफा बना लिया है। जीएसटी के अधिकारी सालाना 40 लाख रुपये टर्नओवर के जाल में उलझे रह जाते हैं। ये धंधेबाज पक्की पर्ची पर प्रतिमाह साढ़े तीन लाख रुपये और सालाना लगभग 40 लाख रुपये के सोने-चांदी की खरीद बिक्री दिखाकर जीएसटी को चपत लगा रहे हैं। वहीं अवैध सोनों को कच्चे पर्ची पर खपा रहे हैं। लगन में इस खपत की तुलना और बढ़ गई है।
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बस्ती। सोने के आभूषणों की खरीदारी बढ़ते ही धंधेबाजों ने खेल शुरू कर दिया है। सराफा की छोटी दुकान हो या बड़ी, सोना खरीदने पर पक्की एवं पारदर्शी बिल कहीं नहीं दी जा रही है। कंप्यूटराइज्ड बिल में भी यह स्पष्ट नहीं कि किस आभूषण में कितना शुद्ध सोना है और कितनी मात्रा में अन्य धातु इस्तेमाल है। जबकि कच्चे बिल में वजन के हिसाब से सोने का ताजा रेट दर्शाकर मूल्य निर्धारित किया जा रहा है। ग्राहक को संतुष्ट करने के लिए इसमें कुछ छूट भी दी जा रही है।
जानकारों के अनुसार 24 कैरेट का सोना असली होता है। मगर, ज्वेलरी 18 कैरेट सोना में ही तैयार होती है। इसे टिकाऊ बनाने के लिए अन्य धातु का इस्तेमाल किया जाता है। मूल्य निर्धारित करते समय सोना का ताजा रेट और आभूषण में इस्तेमाल सोना की मात्रा स्पष्ट होनी चाहिए। मगर, बिल में इसका उल्लेख नहीं रहता है। सिर्फ आभूषण का वजन और मूल्य लिखकर पर्ची थमा दी जा रही है।
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ग्राहक के कहने-सुनने पर कुछ छूट दे दी जाती है। कच्चे बिल पर भी धंधेबाज जीएसटी बिल लगा कर दे रहे हैं। शहर से लेकर आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों की कई सराफा दुकानों में बड़े पैमाने पर अवैध सोना (दो नंबर) खपाया जा रहा है। शादी-लगन के सीजन में धंधेबाज अवैध सोने को कच्चे पर्ची पर खपा रहे हैं।
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इसके अलावा अपने फर्म से जीएसटी की चोरी भी कर रहे हैं। ऐसे में धंधेबाजों ने दोहरा मुनाफा बना लिया है। जीएसटी के अधिकारी सालाना 40 लाख रुपये टर्नओवर के जाल में उलझे रह जाते हैं। ये धंधेबाज पक्की पर्ची पर प्रतिमाह साढ़े तीन लाख रुपये और सालाना लगभग 40 लाख रुपये के सोने-चांदी की खरीद बिक्री दिखाकर जीएसटी को चपत लगा रहे हैं। वहीं अवैध सोनों को कच्चे पर्ची पर खपा रहे हैं। लगन में इस खपत की तुलना और बढ़ गई है।
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