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सीएचसी सल्टौवा पर नहीं है महिला चिकित्सक की तैनाती
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28 माह पहले हुआ उद्घाटन, आज भी है संसाधनों का टोटा
सल्टौआ (बस्ती)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (अमरौली शुमाली) सल्टौआ में ढाई साल बाद भी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं हो पाई है। करीब तीस बेड का यह अस्पताल दो डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। जटिल प्रसव और गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को उपचार के लिए जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है या फिर निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
करीब एक लाख की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए ब्लॉक मुख्यालय से करीब नौ किमी की दूरी पर अमरौली शुमाली में 4.922 करोड़ की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया गया है। इस अस्पताल का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 नवंबर 2019 को किया था। इसके बाद भी अभी तक संसाधनों की पूर्ति नहीं हो सकी है। मंगलवार को समय 10 बजे यहां पर तैनात डॉ. संतोष कुमार मरीज देखते मिले। फार्मासिस्ट गिरजेश चौधरी व अजय सिंह काउंटर पर दवा वितरण और पर्ची काट रहे थे। यहां पर तैनात डॉ. आफाक अहमद अपने कक्ष में नहीं थे। अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि उनकी सोमवार को रात में ड्यूटी थी, इसलिए अभी नहीं आए हैं। अस्पताल में छह डॉक्टर, दो लैब टेक्नीशियन, एक एक्स-रे टेक्नीशियन, एक वार्ड ब्वॉय, एक स्वीपर का पद स्वीकृत है। स्त्रीरोग विशेषज्ञ का पद होने के बाद भी यहां अभी तक किसी महिला डॉक्टर की तैनाती न होने से महिलाओं को अपना उपचार कराने में काफी दिक्कत होती है।
संविदा एएनएम सुधा गौड़ के भरोसे प्रसूताओं की देख भाल होती है और सामान्य प्रसव कराया जाता है। गंभीर समस्या होने पर जिला अस्पताल रेफर किया जाता है जिससे मरीजों व तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, एक्स-रे टेक्नीशियन और डार्क रूम सहायक की तैनाती के बावजूद यहां अभी तक एक्स-रे मशीन नहीं लगी है।
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सीएचसी पर डॉक्टर कभी-कभार ही मिलते हैं। जांच आदि की सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल या फिर निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है।
राजमंगल सिंह, निवासी भिरिया
यहां महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। प्रसव या स्त्रीरोग से संबंधित इलाज के लिए निजी अस्पताल ही सहारा होते हैं। जिला मुख्यालय लाने में धन और समय दोनों अधिक लगता है।
श्रीराम, निवासी अमरौली शुमाली
अस्पताल का भवन तो बन गया, लेकिन जब तक डाक्टर और स्टॉफ के न होने से न तो पूरा इलात मिल पाता है और न ही जांच आदि ही हो पाती है। छोटी जांच के लिए भी बाहर जाना पड़ता है।
जयप्रकाश, निवासी सूरजपुर
कभी-कभार ही डॉक्टर मिलते हैं। सुविधा के नाम कुछ नहीं है। अस्पताल बनाया गया तो लग रहा था स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी, लेकिन यह सपना सा लग रहा है।
गोमती, निवासी अमरौली शुमाली
सीएचसी समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया। जो डॉक्टर तैनात हैं उनके द्वारा मरीजों का उपचार किया जाता है। स्त्रीरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए भी जिला मुख्यालय को अवगत कराया गया है।
-डॉ.आनंद मिश्र, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी अमरौली शुमाली
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सल्टौआ (बस्ती)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (अमरौली शुमाली) सल्टौआ में ढाई साल बाद भी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं हो पाई है। करीब तीस बेड का यह अस्पताल दो डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। जटिल प्रसव और गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को उपचार के लिए जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है या फिर निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
करीब एक लाख की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए ब्लॉक मुख्यालय से करीब नौ किमी की दूरी पर अमरौली शुमाली में 4.922 करोड़ की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया गया है। इस अस्पताल का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 नवंबर 2019 को किया था। इसके बाद भी अभी तक संसाधनों की पूर्ति नहीं हो सकी है। मंगलवार को समय 10 बजे यहां पर तैनात डॉ. संतोष कुमार मरीज देखते मिले। फार्मासिस्ट गिरजेश चौधरी व अजय सिंह काउंटर पर दवा वितरण और पर्ची काट रहे थे। यहां पर तैनात डॉ. आफाक अहमद अपने कक्ष में नहीं थे। अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि उनकी सोमवार को रात में ड्यूटी थी, इसलिए अभी नहीं आए हैं। अस्पताल में छह डॉक्टर, दो लैब टेक्नीशियन, एक एक्स-रे टेक्नीशियन, एक वार्ड ब्वॉय, एक स्वीपर का पद स्वीकृत है। स्त्रीरोग विशेषज्ञ का पद होने के बाद भी यहां अभी तक किसी महिला डॉक्टर की तैनाती न होने से महिलाओं को अपना उपचार कराने में काफी दिक्कत होती है।
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संविदा एएनएम सुधा गौड़ के भरोसे प्रसूताओं की देख भाल होती है और सामान्य प्रसव कराया जाता है। गंभीर समस्या होने पर जिला अस्पताल रेफर किया जाता है जिससे मरीजों व तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, एक्स-रे टेक्नीशियन और डार्क रूम सहायक की तैनाती के बावजूद यहां अभी तक एक्स-रे मशीन नहीं लगी है।
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सीएचसी पर डॉक्टर कभी-कभार ही मिलते हैं। जांच आदि की सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल या फिर निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है।
राजमंगल सिंह, निवासी भिरिया
यहां महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। प्रसव या स्त्रीरोग से संबंधित इलाज के लिए निजी अस्पताल ही सहारा होते हैं। जिला मुख्यालय लाने में धन और समय दोनों अधिक लगता है।
श्रीराम, निवासी अमरौली शुमाली
अस्पताल का भवन तो बन गया, लेकिन जब तक डाक्टर और स्टॉफ के न होने से न तो पूरा इलात मिल पाता है और न ही जांच आदि ही हो पाती है। छोटी जांच के लिए भी बाहर जाना पड़ता है।
जयप्रकाश, निवासी सूरजपुर
कभी-कभार ही डॉक्टर मिलते हैं। सुविधा के नाम कुछ नहीं है। अस्पताल बनाया गया तो लग रहा था स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी, लेकिन यह सपना सा लग रहा है।
गोमती, निवासी अमरौली शुमाली
सीएचसी समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया। जो डॉक्टर तैनात हैं उनके द्वारा मरीजों का उपचार किया जाता है। स्त्रीरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए भी जिला मुख्यालय को अवगत कराया गया है।
-डॉ.आनंद मिश्र, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी अमरौली शुमाली