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Basti News: आशा व संगिनी को चुनाव में ड्यूटी भत्ता दिए जाने की पहल
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बस्ती। प्रदेश में आयोजित होने वाले चुनाव में अगर आशा कार्यकर्ता व आशा संगिनी की ड्यूटी लगाई जाती है तो उसे नियमानुसार अनुमन्य चुनाव ड्यूटी भत्ते का भुगतान करना होगा। मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए कहा है।
मिशन निदेशक के पत्र पर अगर कार्रवाई होती है तो इसका लाभ जिले की लगभग 2300 आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगा। अब इस बात की उम्मीद जगी है कि चुनाव ड्यूटी करने पर आशा को भी अन्य कर्मचारियों की तरह ड्यूटी भत्ता मिलेगा। कोरोना काल से प्रदेश में होने वाले लोकसभा, विधानसभा व स्थानीय निकाय के चुनाव में आशा व संगिनी की ड्यूटी लगाई जाती है। कोरोना काल में उनसे पोलिंग बूथ पर पहुंचने वाले वोटर्स के बुखार आदि की जांच कराई जाती रही है।
स्थानीय होने के कारण उनकी मदद अब चुनाव में बराबर ली जा रही है। आशा व संगिनी को चुनाव ड्यूटी के बदले कोई भत्ता नहीं दिया जाता है। स्थानीय अधिकारी काम तो ले लेते हैं, लेकिन भत्ता देने से यह कहकर हाथ खड़ा कर देते हैं कि उनके लिए कोई बजट नहीं है। इधर आशा संगठनों की ओर से चुनाव ड्यूटी भत्ता दिए जाने को लेकर बराबर मांग की जा रही थी। पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार की आबादी व शहरी क्षेत्र में 200-500 घर पर आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहयोग के लिए आशा वर्कर की तैनाती का प्रावधान भारत सरकार की ओर से किया गया है।
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आशाओं के काम के सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के लिए प्रत्येक 20 आशा पर संगिनी की तैनाती की जाती है। आशा व संगिनी को उनके कार्यों के सापेक्ष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। पत्र में आगे लिखा गया है कि प्रदेश में चुनाव के दौरान आशा व संगिनी की ड्यूटी तो लगाई जाती है, लेकिन उन्हें किसी प्रकार का कोई भत्ता प्रदान नहीं किया जाता है। उनकी ड्यूटी लगाए जाने की दशा में अनुमन्य ड्यूटी भत्ता प्रदान करने के लिए संबंधित को निर्देशित करें। जिलाध्यक्ष प्रीति उपाध्याय ने कहा है कि चुनाव में आशा वर्कर हमेशा कर्मचारियों की भांति काम करती हैं, मगर उन्हें कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जाता है।
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मिशन निदेशक के पत्र पर अगर कार्रवाई होती है तो इसका लाभ जिले की लगभग 2300 आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगा। अब इस बात की उम्मीद जगी है कि चुनाव ड्यूटी करने पर आशा को भी अन्य कर्मचारियों की तरह ड्यूटी भत्ता मिलेगा। कोरोना काल से प्रदेश में होने वाले लोकसभा, विधानसभा व स्थानीय निकाय के चुनाव में आशा व संगिनी की ड्यूटी लगाई जाती है। कोरोना काल में उनसे पोलिंग बूथ पर पहुंचने वाले वोटर्स के बुखार आदि की जांच कराई जाती रही है।
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स्थानीय होने के कारण उनकी मदद अब चुनाव में बराबर ली जा रही है। आशा व संगिनी को चुनाव ड्यूटी के बदले कोई भत्ता नहीं दिया जाता है। स्थानीय अधिकारी काम तो ले लेते हैं, लेकिन भत्ता देने से यह कहकर हाथ खड़ा कर देते हैं कि उनके लिए कोई बजट नहीं है। इधर आशा संगठनों की ओर से चुनाव ड्यूटी भत्ता दिए जाने को लेकर बराबर मांग की जा रही थी। पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार की आबादी व शहरी क्षेत्र में 200-500 घर पर आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहयोग के लिए आशा वर्कर की तैनाती का प्रावधान भारत सरकार की ओर से किया गया है।
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आशाओं के काम के सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के लिए प्रत्येक 20 आशा पर संगिनी की तैनाती की जाती है। आशा व संगिनी को उनके कार्यों के सापेक्ष प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। पत्र में आगे लिखा गया है कि प्रदेश में चुनाव के दौरान आशा व संगिनी की ड्यूटी तो लगाई जाती है, लेकिन उन्हें किसी प्रकार का कोई भत्ता प्रदान नहीं किया जाता है। उनकी ड्यूटी लगाए जाने की दशा में अनुमन्य ड्यूटी भत्ता प्रदान करने के लिए संबंधित को निर्देशित करें। जिलाध्यक्ष प्रीति उपाध्याय ने कहा है कि चुनाव में आशा वर्कर हमेशा कर्मचारियों की भांति काम करती हैं, मगर उन्हें कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जाता है।