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पुलिस के संरक्षण से विकास का बढ़ा मनोबल
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पुलिस के संरक्षण से विकास का बढ़ा मनोबल
बस्ती। कानपुर कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के ‘काकस’ की खुल रही कलई ने पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोग कहते हैं कि चिंदी चोरों को मुठभेड़ में मार गिराने का दंभ भरने वाली पुलिस का असल गैंगेस्टर से जब मुकाबला हुआ तो खुद उसी की वीभत्स तस्वीर सामने आ गई। इस दुर्दांत अपराधी को फांसी पर कब का लटका दिया जाना चाहिए था, मगर अफसोस अफसरों को लाज बचाने के लाले पड़े हैं। गैंगेस्टर का मकान ढहाए जाने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया झेल रही यूपी पुलिस की बृहस्पतिवार को अच्छी-खासी फजीहत तब हुई जब गैंगेस्टर विकास दुबे उज्जैन के महाकाल मंदिर में नाटकीय ढंग से खुद को मध्य प्रदेश पुलिस के हाथों गिरफ्तार करा लिया। घटनाक्रम पर ‘अमर उजाला’ की टीम ने जब समाज के विभिन्न तबकों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आएं।
अधिवक्ता नरेंद्र पांडेय का कहना है कि विकास दुबे प्रकरण में अब तक की जांच-तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके हिसाब से विकास से ज्यादा पुलिस को पुलिस वालों को नुकसान पहुंचाया है। रही बात उसका मकान ढहाने की तो पुलिस सक्षम मजिस्ट्रेट की अदालत की अनुमति से गैंगेस्टर की संपत्ति जब्त अथवा ध्वस्त कर सकती है, बशर्ते वह संपत्ति अपराध के जरिए कमाई गई हो।
वरिष्ठ समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय कहते हैं कि जब पुलिस आए दिन अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाती है तो विकास को कैसे कानून के शिकंजे में कसा नहीं गया। गांव-क्षेत्र के लोगों की जमीनें हड़पने वाला समाज में स्वीकार्य बना रहा, यह भी बड़ा सवाल है। इसकी गहन समीक्षा की जानी चाहिए।
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आईजी आशुतोष कुमार का कहना है कि कानपुर प्रकरण में कई स्तर की जांच प्रचलित है। प्रथम दृष्ट्या कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत उजागर हुई है, जिन्हें उचित कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। मकान गिराने के सवाल पर आईजी का कहना है कि परिस्थितियां प्रत्येक समय बराबर नहीं रहतीं।
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बस्ती। कानपुर कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के ‘काकस’ की खुल रही कलई ने पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोग कहते हैं कि चिंदी चोरों को मुठभेड़ में मार गिराने का दंभ भरने वाली पुलिस का असल गैंगेस्टर से जब मुकाबला हुआ तो खुद उसी की वीभत्स तस्वीर सामने आ गई। इस दुर्दांत अपराधी को फांसी पर कब का लटका दिया जाना चाहिए था, मगर अफसोस अफसरों को लाज बचाने के लाले पड़े हैं। गैंगेस्टर का मकान ढहाए जाने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया झेल रही यूपी पुलिस की बृहस्पतिवार को अच्छी-खासी फजीहत तब हुई जब गैंगेस्टर विकास दुबे उज्जैन के महाकाल मंदिर में नाटकीय ढंग से खुद को मध्य प्रदेश पुलिस के हाथों गिरफ्तार करा लिया। घटनाक्रम पर ‘अमर उजाला’ की टीम ने जब समाज के विभिन्न तबकों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आएं।
अधिवक्ता नरेंद्र पांडेय का कहना है कि विकास दुबे प्रकरण में अब तक की जांच-तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके हिसाब से विकास से ज्यादा पुलिस को पुलिस वालों को नुकसान पहुंचाया है। रही बात उसका मकान ढहाने की तो पुलिस सक्षम मजिस्ट्रेट की अदालत की अनुमति से गैंगेस्टर की संपत्ति जब्त अथवा ध्वस्त कर सकती है, बशर्ते वह संपत्ति अपराध के जरिए कमाई गई हो।
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वरिष्ठ समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय कहते हैं कि जब पुलिस आए दिन अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाती है तो विकास को कैसे कानून के शिकंजे में कसा नहीं गया। गांव-क्षेत्र के लोगों की जमीनें हड़पने वाला समाज में स्वीकार्य बना रहा, यह भी बड़ा सवाल है। इसकी गहन समीक्षा की जानी चाहिए।
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आईजी आशुतोष कुमार का कहना है कि कानपुर प्रकरण में कई स्तर की जांच प्रचलित है। प्रथम दृष्ट्या कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत उजागर हुई है, जिन्हें उचित कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। मकान गिराने के सवाल पर आईजी का कहना है कि परिस्थितियां प्रत्येक समय बराबर नहीं रहतीं।