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12 माह में ही टूट गई सवा करोड़ की सड़क
अमर उजाला/बस्ती
Updated Sun, 28 Feb 2016 11:40 PM IST
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बस्ती। पीडब्ल्यूडी खंड एक द्वारा 1.25 करोड़ रुपये में बनवाया गया
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मुंडेरवा से लालगंज मार्ग एक साल में ही गड्ढामय हो गया। इस कारण मार्ग पर
राहगीर गिरकर हादसे का शिकार हो रहे हैं।
लोगों की शिकायत के बाद कमिश्नर पीके सिंह ने टीएसी(टेकिभनकल ऑडिट कमेटी) से जांच कराने का आदेश दिया है। वहीं एक्सईएन उपेंद्र प्रधान और अधीक्षण अभियंता केएस दुबे ने जांचकर ठेकेदारों पर कार्रवाई करने और रिकवरी कराने की बात कही है।
दरअसल,पीडब्लूडी खंड एक कार्यालय से 16 अप्रैल 2014 को मुंडेरवा से लालगंज तक 15 किलोमीटर मार्ग निर्माण के लिए टेंडर निकला। इसके लिए नौ ठेकेदारों ने निर्धारित दर से 21 से 33 फीसदी तक कम दर डालकर ठेका हासिल किया। दरअसल, सड़क निर्माण के समय ही गांव वालों ने खराब गुणवत्ता को आवाज उठानी शुरू कर दी थी।
क्षेत्र के प्रदीप पांडेय, अनिल पांडेय, विमल चौधरी, वीनस जायसवाल, मणिकांत चौधरी, सच्चिदानंद त्रिपाठी, राम कृपाल चौधरी और गिरजेश कसौधन सहित अन्य ने बताया कि गांव वालों खराब गुणवत्ता को लेकर कई बार विभाग और प्रशासन से शिकायत की गई, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई, अलबत्ता शिकायतकर्ताओं को जरूर ठेकेदारों द्वारा डराया धमकाया गया।
गांव वालों का आरोप है कि अगर सड़क निर्माण की गुणवत्ता देखने कोई अवर अभियंता, सहायक अभियंता, एक्सईएन और एसई आते तो शायद सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं होता।
गांव वालों ने कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई होनी चाहिए जिससे सड़क के टूट कर जर्जर हाल में होनेे का कारण स्पष्ट हो सके।
लोगों की शिकायत के बाद कमिश्नर पीके सिंह ने टीएसी(टेकिभनकल ऑडिट कमेटी) से जांच कराने का आदेश दिया है। वहीं एक्सईएन उपेंद्र प्रधान और अधीक्षण अभियंता केएस दुबे ने जांचकर ठेकेदारों पर कार्रवाई करने और रिकवरी कराने की बात कही है।
दरअसल,पीडब्लूडी खंड एक कार्यालय से 16 अप्रैल 2014 को मुंडेरवा से लालगंज तक 15 किलोमीटर मार्ग निर्माण के लिए टेंडर निकला। इसके लिए नौ ठेकेदारों ने निर्धारित दर से 21 से 33 फीसदी तक कम दर डालकर ठेका हासिल किया। दरअसल, सड़क निर्माण के समय ही गांव वालों ने खराब गुणवत्ता को आवाज उठानी शुरू कर दी थी।
क्षेत्र के प्रदीप पांडेय, अनिल पांडेय, विमल चौधरी, वीनस जायसवाल, मणिकांत चौधरी, सच्चिदानंद त्रिपाठी, राम कृपाल चौधरी और गिरजेश कसौधन सहित अन्य ने बताया कि गांव वालों खराब गुणवत्ता को लेकर कई बार विभाग और प्रशासन से शिकायत की गई, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई, अलबत्ता शिकायतकर्ताओं को जरूर ठेकेदारों द्वारा डराया धमकाया गया।
गांव वालों का आरोप है कि अगर सड़क निर्माण की गुणवत्ता देखने कोई अवर अभियंता, सहायक अभियंता, एक्सईएन और एसई आते तो शायद सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं होता।
गांव वालों ने कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई होनी चाहिए जिससे सड़क के टूट कर जर्जर हाल में होनेे का कारण स्पष्ट हो सके।