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Basti News: संदेह का लाभ पाकर हत्या में पति-पत्नी व पुत्री दोषमुक्त
Sat, 09 Nov 2024 12:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 09 Nov 2024 12:36 AM IST
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मुंडेरवा क्षेत्र विहरा गांव में 18 मार्च 2017 को हुई थी घटना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश विजय कुमार कटियार की अदालत ने हत्या के सात वर्ष पुराने मामले में पति-पत्नी व पुत्री को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
अभियोजन के अनुसार, मुंडेरवा थाना के ग्राम विहरा निवासी रामछैल ने थाने में प्रार्थनापत्र देकर कहा कि उसका भाई राजकुमार अपनी आटा चक्की की दुकान पर सो रहा था। गांव के राम प्रसाद चौधरी उर्फ शिवप्रसाद, शिवप्रसाद की पत्नी विद्यावती देवी व पुत्री सीमा ने 18 मार्च 2017 की रात करीब 11 बजे मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। झुलसे अवस्था में राजकुमार को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। दो दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई।
तहरीर के आधार पर केस दर्ज हुआ। पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। राजकुमार के चरित्र दोष के चलते हत्या करने का कथन केस डायरी में दर्ज था। दोनों पक्षों को अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। दोनों पक्षों के तर्क भी सुने गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय उपाध्याय द्वारा कहा गया कि मुकदमा देर से दर्ज कराया गया है।
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घटना 18 मार्च की थी और मुकदमा 20 मार्च को दर्ज कराया गया। प्रथम सूचना रिपोर्ट में किसी गवाह का नाम नहीं है। दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने माना कि घटना के दो दिन बाद तक मृतक राजकुमार जीवित था। विवेचक ने उसका बयान दर्ज किया। डॉक्टर ने बयान अंकित करने के लिए सलाह दी थी। मगर, विवेचक की लापरवाही से मृत्यु कालीन बयान दर्ज नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि विषम परिस्थितियों में विवेचक को दिया गया बयान मृत्यु कालिक बयान माना जा सकता है। मगर, इस मामले में विवेचक के पास मृत्यु कालिक बयान दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर था। अभियोजन अपना केस संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश विजय कुमार कटियार की अदालत ने हत्या के सात वर्ष पुराने मामले में पति-पत्नी व पुत्री को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
अभियोजन के अनुसार, मुंडेरवा थाना के ग्राम विहरा निवासी रामछैल ने थाने में प्रार्थनापत्र देकर कहा कि उसका भाई राजकुमार अपनी आटा चक्की की दुकान पर सो रहा था। गांव के राम प्रसाद चौधरी उर्फ शिवप्रसाद, शिवप्रसाद की पत्नी विद्यावती देवी व पुत्री सीमा ने 18 मार्च 2017 की रात करीब 11 बजे मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। झुलसे अवस्था में राजकुमार को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। दो दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई।
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तहरीर के आधार पर केस दर्ज हुआ। पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। राजकुमार के चरित्र दोष के चलते हत्या करने का कथन केस डायरी में दर्ज था। दोनों पक्षों को अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। दोनों पक्षों के तर्क भी सुने गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय उपाध्याय द्वारा कहा गया कि मुकदमा देर से दर्ज कराया गया है।
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घटना 18 मार्च की थी और मुकदमा 20 मार्च को दर्ज कराया गया। प्रथम सूचना रिपोर्ट में किसी गवाह का नाम नहीं है। दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश ने माना कि घटना के दो दिन बाद तक मृतक राजकुमार जीवित था। विवेचक ने उसका बयान दर्ज किया। डॉक्टर ने बयान अंकित करने के लिए सलाह दी थी। मगर, विवेचक की लापरवाही से मृत्यु कालीन बयान दर्ज नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि विषम परिस्थितियों में विवेचक को दिया गया बयान मृत्यु कालिक बयान माना जा सकता है। मगर, इस मामले में विवेचक के पास मृत्यु कालिक बयान दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर था। अभियोजन अपना केस संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।