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Basti News: किराये की डिग्री पर अस्पताल, अप्रशिक्षित हाथों से इलाज, खतरे में जान

Sat, 13 Jun 2026 12:57 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2026 12:57 AM IST
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Hospitals with hired degrees, treatment by untrained hands, lives at risk
बस्ती। मरीजों को सुविधा देने के लिए भले ही सरकार सख्त हो मगर, जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी मरीजों के जान पर आफत लेकर आ रही है। मिलीभगत से मानक के विपरीत संचालित निजी अस्पतालों में मरीजों की जान चली जा रही और जिम्मेदार मौन बने हुए हैं।
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यहीं वजह है कि जिले में अवैध अस्पतालों का धंधा फल-फूल रहा है। चिकित्सा संगठनों का कहना है कि जनपद में बमुश्किल 80 एमबीबीएस डॉक्टर होंगे, बाकी डॉक्टर बाहर के हैं, जो 325 निजी अस्पतालों में डिग्री लगाए हुए हैं।
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जानकारों का कहना है कि कुछ का पंजीकरण क्लीनिक के नाम पर है तो कुछ बगैर पंजीकरण के ही चल रहे हैं और सभी जगह ओपीडी के साथ प्रसव भी कराए जाते हैं। इन अस्पताल के बोर्डों पर एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम तो अंकित हैं, लेकिन मरीजों का इलाज झोलाछाप ही करते हैं।
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अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर अंकुश लगाने के लिए कई बार प्रयास हुए मगर, निरीक्षण कौन कहे, घटना के बाद भी संबंधित अस्पताल पर बड़ी कार्रवाई तक नहीं हो पा रही है। कई मामले तो ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो एक माह के भीतर मुंडेरवा, जिगिना, मालवीय रोड, पचपेड़िया रोड, रोडवेज गड़गोडिया में उपचार के दौरान मरीज की मौत हो चुकी है। इसमें कई पर जांच चल रही, मगर अभी तक रिपोर्ट नहीं आई।
फार्मासिस्ट, एएनएम, संविदा कर्मी भी चला रहे कई अस्पताल : बताया गया कि मुंडेरवा में एक एएनएम, कुदरहा में एक एएनएम, ब्लॉक रोड स्थित एक फार्मासिस्ट व संविदा कर्मी अस्पताल खोलकर मरीजों का उपचार किए जा रहे हैं, मगर विभाग यहां तक नहीं पहुंच पा रहा है। बताते हैं कि ओपीडी के साथ ऑपरेशन भी कराए जाते हैं।
पंजीकरण क्लीनिक का, कराते हैं प्रसव : सूत्रों के अनुसार, बहुत से अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने अपना पंजीकरण क्लीनिक का करवा रखा है। वहां पर ओपीडी के साथ प्रसव भी होता है। हालांकि कई बार असुरक्षित प्रसव होने के कारण जच्चा-बच्चा की मौत के भी कई मामले हो चुके हैं। मगर, जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं।

आशाओं की भी रहती है संलिप्तता : आशाओं को भले ही गर्भवती महिलाओं की देखरेख करने के लिए रखा गया हो, लेकिन मोटे कमीशन के लालच में आशाएं गांव की गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज का झांसा देकर फर्जी अस्पतालों में ले जाती है, जिसमें उन्हें मोटा कमीशन मिलता है।
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