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अस्पताल भवन जर्जर, कर्मियों में खौफ
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अस्पताल भवन जर्जर, कर्मियों में खौफ
1986 में कराया गया था निर्माण
पिछले दिनों धराशायी हो गया था कंट्रोल रूम का छज्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
बनकटी। पीएचसी भवन जर्जर हो चुका है। यह कभी भी गिर सकता है। पिछले दिनों भवन का छज्जा गिर भी चुका है हालांकि इससे कोई हताहत नहीं हुआ था। भवन जर्जर होने के कारण कर्मचारियों में इसे लेकर खौफ बना हुआ है।
पीएचसी का निर्माण 1986 में कराया गया था। अस्पताल परिसर में ओपीडी, ईटीसी वार्ड, प्रसव केंद्र, चिकित्सक व कर्मचारी आवास आदि का निर्माण कराया गया था। अब यह जर्जर हो चुका है और हल्की सी बारिश में छत टपकने लगता है। जिससे दवाएं और अभिलेख सुरक्षित रखने में कर्मियों को दिक्कतें आ रही हैं। आवास में रह रहे एंबुलेंसकर्मी शमीम व फार्मासिस्ट पीसी पांडेय ने बताया कि बारिश में छत टपक रहा है। आवास में रहने से डर लगता है। डॉ. राजेश कुमार व एएनएम गायत्री पांडेय ने बताया कि जब से कंट्रोल रूम का छज्जा गिरा है, आवास में रहने से डर लगने लगा रहा है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि भवनों के जर्जर होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को है। पीएचसी को सीएचसी बनाने का प्रस्ताव विधायक के माध्यम से शासन को भेजा गया है।
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1986 में कराया गया था निर्माण
पिछले दिनों धराशायी हो गया था कंट्रोल रूम का छज्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
बनकटी। पीएचसी भवन जर्जर हो चुका है। यह कभी भी गिर सकता है। पिछले दिनों भवन का छज्जा गिर भी चुका है हालांकि इससे कोई हताहत नहीं हुआ था। भवन जर्जर होने के कारण कर्मचारियों में इसे लेकर खौफ बना हुआ है।
पीएचसी का निर्माण 1986 में कराया गया था। अस्पताल परिसर में ओपीडी, ईटीसी वार्ड, प्रसव केंद्र, चिकित्सक व कर्मचारी आवास आदि का निर्माण कराया गया था। अब यह जर्जर हो चुका है और हल्की सी बारिश में छत टपकने लगता है। जिससे दवाएं और अभिलेख सुरक्षित रखने में कर्मियों को दिक्कतें आ रही हैं। आवास में रह रहे एंबुलेंसकर्मी शमीम व फार्मासिस्ट पीसी पांडेय ने बताया कि बारिश में छत टपक रहा है। आवास में रहने से डर लगता है। डॉ. राजेश कुमार व एएनएम गायत्री पांडेय ने बताया कि जब से कंट्रोल रूम का छज्जा गिरा है, आवास में रहने से डर लगने लगा रहा है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि भवनों के जर्जर होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को है। पीएचसी को सीएचसी बनाने का प्रस्ताव विधायक के माध्यम से शासन को भेजा गया है।
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