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Basti News: राजस्व मुकदमों की सुनवाई का ढिंढोरा... फिर भी फरियादी न्याय से वंचित
Sun, 19 Nov 2023 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 19 Nov 2023 01:01 AM IST
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तहसीलों में संशोधन तक की कार्रवाई में हो रही देरी, डाटा फीडिंग का कार्य भी बाधित
वरासत और खारिज दाखिल संबंधी मुकदमों के निस्तारण के लिए भटक रहे फरियादी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आजकल राजस्व मुकदमों में सुनवाई का ढिढोरा जबरदस्त है। वाद के निस्तारण का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। मगर, छोटे-छोटे मामलों में भी फरियादी न्याय से वंचित हैं। तहसीलों में नाम संशोधन या खारिज दाखिल भी समय से नहीं हो पा रही है। आपत्तियों का झमेला दूर होने में न जाने कितने महीने गुजर जा रहे हैं। वरासत संबंधी वाद में निचले स्तर के राजस्व अधिकारी तहकीकात तक नहीं कर पा रहे हैं।
एक मामला सदर तहसील के नरहरिया का है। पेशे से मजदूर राघव शरण के पिता की मौत हो चुकी है। 14 साल से वह पिता की अचल संपत्ति की वरासत कराने के लिए दर-दर ठोकरे खा रहे हैं। उनका कहना है कि वरासत से संबंधित उनका प्रकरण बहुत दिनों तक नायब तहसीलदार सांऊघाट के यहां चला। निर्णय नहीं हुआ। वर्तमान यह मामला तहसीलदार न्यायिक के पास स्थानांतरित हो गया है। यहां भी प्रकरण में सुनवाई कर फैसला नहीं दिया जा रहा है। वह अपनी पैतृक संपत्ति से बेदखल बने हुए हैं।
सदर तहसील क्षेत्र के विशुनपुरवा की चंदा देवी के पति राजेंद्र की मौत हुए पांच साल बीत गए। उन्होंने आधार, पासबुक, परिवार रजिस्टर की नकल आदि जरूरी प्रपत्रों के साथ वरासत के लिए धारा 34 के तहत नायब तहसीलदार सदर के यहां वाद दाखिल कर रखा। जिम्मेदार इस प्रकरण में अब तक कोई निर्णय नहीं ले सके हैं। चंदा का कहना है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उन्हें न्याय पर ही भरोसा है, लेकिन अधिकारी उनके प्रकरण में ढिलाई बरत रहे हैं।
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सदर तहसील के सराय घाट मिश्रौलिया के रामकुमार के पिता की मौत पांच साल पहले हो गई थी। भागदौड़ कर उन्होंने पिता की संपत्ति का वरासत कराया। मगर, खतौनी में रामकुमार की जगह राजकुमार अंकित हो गया। इसे सही कराने के लिए उन्होंने जनवरी 2022 में धारा 38 के तहत तहसील में प्रार्थनापत्र दिया। हल्का लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट भी उनके पक्ष में लग गई है। मगर, यह तहसील की नजारत में जमा नहीं हो पा रही है। पत्रावली नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर के लिए वापस भेज दी जा रही है। प्रकरण डेढ़ साल लंबित है। जबकि इसमें कोई विपक्षी भी नहीं है।
कलवारी क्षेत्र की सरोज पत्नी रोहित व रीता देवी पत्नी जोखन ने अपने घर के सामने आबादी की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की है। वह लगातार अधिकारियों से लिखित रूप से उक्त जमीन की पैमाइश की गुहार लगा रही हैं। मगर, संबंधित जिम्मेदार रुचि नहीं ले रहे हैं। फरियादियों का कहना है कि अधिकारियों को प्रार्थनापत्र देने पर सिर्फ आश्वासन देकर वापस भेज दिया जा रहा हैं।
...
नवंबर में 20 हजार मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य
आंकड़ों पर गौर करें तो अक्तूबर माह में राजस्व, फौजदारी, स्टांप के कुल 18 हजार मुकदमे निस्तारित किए गए हैं। नवंबर में कुल 20 हजार मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित है। राजस्व न्यायालयों में प्रत्येक कार्य दिवस में सुनवाई भी चल रही है। आंकड़ेबाजी के इस खेल से सत्यता बिल्कुल परे है। जिन मामलों में दोनों पक्षों की सुनवाई की जा रही है, उसे निस्तारित मानकर रिपोर्ट भेज दी जा रही हैं। यही वजह है निस्तारित मामलों के आंकड़ों में आचर्श्यजनक बढ़ोत्तरी देखी जा रही हैं। धरातल पर अधिकांश वादी- प्रतिवादी की समस्या जस की तस है।
...
कोट
प्रकरणों की सुनवाई काफी तेजी आई है। सभी अधिकारी प्रतिदिन न्यायिक मामलों में सुनवाई कर रहे हैं। जहां तक डाटा फीडिंग का सवाल हैं तो सर्वर की समस्या से राजस्व परिषद को अवगत कराया जाएगा। नायब तहसीलदारों के विवाद में विभागीय कार्रवाई चल रही है।
-गुलाब चंद्र, एसडीएम सदर
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वरासत और खारिज दाखिल संबंधी मुकदमों के निस्तारण के लिए भटक रहे फरियादी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आजकल राजस्व मुकदमों में सुनवाई का ढिढोरा जबरदस्त है। वाद के निस्तारण का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। मगर, छोटे-छोटे मामलों में भी फरियादी न्याय से वंचित हैं। तहसीलों में नाम संशोधन या खारिज दाखिल भी समय से नहीं हो पा रही है। आपत्तियों का झमेला दूर होने में न जाने कितने महीने गुजर जा रहे हैं। वरासत संबंधी वाद में निचले स्तर के राजस्व अधिकारी तहकीकात तक नहीं कर पा रहे हैं।
एक मामला सदर तहसील के नरहरिया का है। पेशे से मजदूर राघव शरण के पिता की मौत हो चुकी है। 14 साल से वह पिता की अचल संपत्ति की वरासत कराने के लिए दर-दर ठोकरे खा रहे हैं। उनका कहना है कि वरासत से संबंधित उनका प्रकरण बहुत दिनों तक नायब तहसीलदार सांऊघाट के यहां चला। निर्णय नहीं हुआ। वर्तमान यह मामला तहसीलदार न्यायिक के पास स्थानांतरित हो गया है। यहां भी प्रकरण में सुनवाई कर फैसला नहीं दिया जा रहा है। वह अपनी पैतृक संपत्ति से बेदखल बने हुए हैं।
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सदर तहसील क्षेत्र के विशुनपुरवा की चंदा देवी के पति राजेंद्र की मौत हुए पांच साल बीत गए। उन्होंने आधार, पासबुक, परिवार रजिस्टर की नकल आदि जरूरी प्रपत्रों के साथ वरासत के लिए धारा 34 के तहत नायब तहसीलदार सदर के यहां वाद दाखिल कर रखा। जिम्मेदार इस प्रकरण में अब तक कोई निर्णय नहीं ले सके हैं। चंदा का कहना है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उन्हें न्याय पर ही भरोसा है, लेकिन अधिकारी उनके प्रकरण में ढिलाई बरत रहे हैं।
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सदर तहसील के सराय घाट मिश्रौलिया के रामकुमार के पिता की मौत पांच साल पहले हो गई थी। भागदौड़ कर उन्होंने पिता की संपत्ति का वरासत कराया। मगर, खतौनी में रामकुमार की जगह राजकुमार अंकित हो गया। इसे सही कराने के लिए उन्होंने जनवरी 2022 में धारा 38 के तहत तहसील में प्रार्थनापत्र दिया। हल्का लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट भी उनके पक्ष में लग गई है। मगर, यह तहसील की नजारत में जमा नहीं हो पा रही है। पत्रावली नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर के लिए वापस भेज दी जा रही है। प्रकरण डेढ़ साल लंबित है। जबकि इसमें कोई विपक्षी भी नहीं है।
कलवारी क्षेत्र की सरोज पत्नी रोहित व रीता देवी पत्नी जोखन ने अपने घर के सामने आबादी की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की है। वह लगातार अधिकारियों से लिखित रूप से उक्त जमीन की पैमाइश की गुहार लगा रही हैं। मगर, संबंधित जिम्मेदार रुचि नहीं ले रहे हैं। फरियादियों का कहना है कि अधिकारियों को प्रार्थनापत्र देने पर सिर्फ आश्वासन देकर वापस भेज दिया जा रहा हैं।
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नवंबर में 20 हजार मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य
आंकड़ों पर गौर करें तो अक्तूबर माह में राजस्व, फौजदारी, स्टांप के कुल 18 हजार मुकदमे निस्तारित किए गए हैं। नवंबर में कुल 20 हजार मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित है। राजस्व न्यायालयों में प्रत्येक कार्य दिवस में सुनवाई भी चल रही है। आंकड़ेबाजी के इस खेल से सत्यता बिल्कुल परे है। जिन मामलों में दोनों पक्षों की सुनवाई की जा रही है, उसे निस्तारित मानकर रिपोर्ट भेज दी जा रही हैं। यही वजह है निस्तारित मामलों के आंकड़ों में आचर्श्यजनक बढ़ोत्तरी देखी जा रही हैं। धरातल पर अधिकांश वादी- प्रतिवादी की समस्या जस की तस है।
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कोट
प्रकरणों की सुनवाई काफी तेजी आई है। सभी अधिकारी प्रतिदिन न्यायिक मामलों में सुनवाई कर रहे हैं। जहां तक डाटा फीडिंग का सवाल हैं तो सर्वर की समस्या से राजस्व परिषद को अवगत कराया जाएगा। नायब तहसीलदारों के विवाद में विभागीय कार्रवाई चल रही है।
-गुलाब चंद्र, एसडीएम सदर