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लाइलाज है फाइलेरिया, जरूर खाएं दवा : मंडलायुक्त
Sat, 05 Aug 2023 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 05 Aug 2023 01:36 AM IST
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कमिश्नर अखिलेश सिंह
बस्ती। फाइलेरिया बीमारी जानलेवा नहीं है मगर यह संपूर्ण जीवन को प्रभावित करता है, इसलिए आगामी 10 अगस्त से घर-घर निशुल्क दवा खिलाने के अभियान के अंतर्गत सभी नागरिक इसकी दवा अवश्य खा लें।
यह अपील मंडलायुक्त अखिलेश सिंह ने की है। कहा कि कोई भी लाभार्थी दवा से छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। इसके अलावा जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर भी दवा उपलब्ध रहेगी, जहां व्यक्ति जाकर दवा खा सकता है।
बताया कि फाइलेरिया रोग (हाथीपांव) एक लाइलाज बीमारी है। इस बीमारी से बचाव के लिए फाइलेरिया रोधी औषधि का सेवन ही एकमात्र उपाय है।फाइलेरिया एक परजीवी जन्य संक्रामक बीमारी है, जो धागे जैसे कृमियों से होती है। फालेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। संक्रमित मच्छर के काटने के 10-15 वर्षो के पश्चात यह हाथ, पैर, स्तन या अंडकोश के सूजन (हाइड्रोसील) पेशाब में सफेद रंग के द्रव का स्त्राव (काइल्यूरिया) लम्बे समय से सूखी खांसी आना (ट्रोपिकल स्नोफीलिया) आदि के रूप में दिखाई देता है।
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1 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गंभीर रूप से बीमार तथा गर्भवती माता को यह दवा नहीं खिलाया जाना है। बताया कि अभियान 28 अगस्त तक चलेगा परंतु टीम केवल 10 दिन ही घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी। प्रत्येक टीम को एक दिन में 25 घर जाना होगा। कहा कि खाली पेट दवा नहीं खाना है, इसलिए दवा खाने के लिए 11.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक टीम घर-घर जाएगी। दवा खाने पर यदि किसी प्रकार का रिएक्शन होता है, तो नजदीकी डॉक्टर की टीम उन्हें अटेंड करेगी। आशा के घर को डिपो बनाकर दवा वहां रखी जाएगी ताकि छूटे हुए लोगों को वह दोबारा उनके घर जाकर दवा खिला सके।
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यह अपील मंडलायुक्त अखिलेश सिंह ने की है। कहा कि कोई भी लाभार्थी दवा से छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। इसके अलावा जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर भी दवा उपलब्ध रहेगी, जहां व्यक्ति जाकर दवा खा सकता है।
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बताया कि फाइलेरिया रोग (हाथीपांव) एक लाइलाज बीमारी है। इस बीमारी से बचाव के लिए फाइलेरिया रोधी औषधि का सेवन ही एकमात्र उपाय है।फाइलेरिया एक परजीवी जन्य संक्रामक बीमारी है, जो धागे जैसे कृमियों से होती है। फालेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। संक्रमित मच्छर के काटने के 10-15 वर्षो के पश्चात यह हाथ, पैर, स्तन या अंडकोश के सूजन (हाइड्रोसील) पेशाब में सफेद रंग के द्रव का स्त्राव (काइल्यूरिया) लम्बे समय से सूखी खांसी आना (ट्रोपिकल स्नोफीलिया) आदि के रूप में दिखाई देता है।
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1 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गंभीर रूप से बीमार तथा गर्भवती माता को यह दवा नहीं खिलाया जाना है। बताया कि अभियान 28 अगस्त तक चलेगा परंतु टीम केवल 10 दिन ही घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी। प्रत्येक टीम को एक दिन में 25 घर जाना होगा। कहा कि खाली पेट दवा नहीं खाना है, इसलिए दवा खाने के लिए 11.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक टीम घर-घर जाएगी। दवा खाने पर यदि किसी प्रकार का रिएक्शन होता है, तो नजदीकी डॉक्टर की टीम उन्हें अटेंड करेगी। आशा के घर को डिपो बनाकर दवा वहां रखी जाएगी ताकि छूटे हुए लोगों को वह दोबारा उनके घर जाकर दवा खिला सके।