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Basti News: उमस भरी गर्मी से बिगड़ रही सेहत, वायरल और डायरिया के बढ़े रोगी

Sun, 14 Jun 2026 12:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 12:21 AM IST
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Health deteriorating due to sultry heat; rise in viral infection and diarrhea cases.
जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सीय परामर्श के लिए पहुंचे मरीज संवाद
बस्ती। मौसम में उतार चढ़ाव के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में लंबी कतार दिखी, बच्चा वार्ड में 38 बच्चे भर्ती रहे, जिनमें ज्यादातर डायरिया से पीड़ित थे। वहीं मेडिसिन विभाग में सिरदर्द के रोगी अधिक रहे। ओपीडी में आए अधिकांश मरीजों की जांच हुई तो वायरल संक्रमण पाया गया। बुखार के साथ, बदन दर्द, नाक बहना और खांसी के मरीज अधिक थे, तो बच्चों में दस्त की शिकायत रही।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को 940 मरीजों ने उपचार कराया, सबसे अधिक भीड़ मडिसिन विभाग में रहीं। फिजिशियन डॉ. संतोष के मुताबिक, तेज धूप व बढ़ते तापमान से बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं। दोपहर तक डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त, बुखार, चक्कर आने, सिरदर्द, कमजोरी की शिकायत लेकर मरीज पहुंचते रहे। पानी की कमी से डिहाइड्रेशन की समस्या भी बढ़ गई है। दोपहर 12 से शाम चार बजे तक धूप से बचाव जरूरी है। इस दौरान बाहर निकलने वाले लोगों के लू की चपेट में आने की आशंका रहती है। इसी वजह से कुछ दिनों से ओपीडी में चक्कर, बेहोशी और तेज बुखार के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
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दूसरी ओर, बच्चा वार्ड में शनिवार दोपहर तक 38 बच्चे भर्ती होने से वार्ड फुल रहा। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल के मुताबिक ज्यादातर बच्चे सीवियर डायरिया पीड़ित रहे। राउंड लेकर नियमित निगरानी भी की जा रही है। कई गंभीर बच्चों को पीआईसीयू में रखा गया है। बच्चों में यह परेशानी बदलते मौसम के चलते हुई है। इससे बचाव जरूरी है।
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बचाव के उपाय
- पानी पीकर और साथ लेकर घर से निकलें, खाली पेट न रहें।
- धूप में सिर ढककर रखें, बच्चों, बुजुर्गों को धूप में बाहर न भेजें।
- चक्कर आए या कमजोरी लगे तो छायादार स्थान पर ठहरें।
- एसी कक्ष या कार से निकलने से पूर्व तापमान सामान्य कर लें।
- बाजार में खुले में रखे, तले भुने, बासी भोजन का सेवन न करें।
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जांच से लेकर रिपोर्ट तक लेने में हुई परेशानी
गनेशपुर से आई सीमा को बुखार था, चिकित्सक ने टाइफाइड जांच कराने की सलाह दी। लाइन लगाकर ब्लड जांच के बाद रिपोर्ट के लिए तीन घंटे इंतजार करना पड़ा, तब तक डॉक्टर ओपीडी से घर चले गए। अल्ट्रासाउंड के लिए आए नीरज ने बताया कि खाली पेट आने के बाद भी जल्द जांच नहीं हुई। एक्स-रे कराने आए सुमित्रा ने बताया कि पहले डॉक्टर को दिखाना पड़ा। फिर पर्चा जमा हुआ, नंबर दो घंटे बाद आया। वहीं, आरती को सीटी स्कैन करना था, दो दिन तक चक्कर काटी तब जाकर शनिवार को स्कैन हुआ।

कोट
उपचार के लिए आ रहे रोगियों की समय से जांच और दवा देना प्राथमिकता में है। चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं कि समय से ओपीडी में बैठें। ब्लड जांच की संख्या बढ़ी है, रोजाना ढाई सौ से अधिक जांच कराई जा रही है।
-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
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