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ट्रांजिट रिमांड पर बंगलूरू से लाया गया हामिद
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ट्रांजिट रिमांड पर बंगलूरू से लाया गया हामिद
बस्ती। पांच दिन पहले बंगलूरू एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया नकली सॉफ्टवेयर का धंधा करने वाले गिरोह का सरगना हामिद अशरफ मंगलवार को ट्रांजिट रिमांड पर जिले में लाया गया। पुलिस के मुताबिक उसने कबूल किया कि नकली साफ्टवेयर बेचकर 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है।
उसकी गिरफ्तारी के लिए आईजी की तरफ से 50 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया था। हामिद के पास से नकद भारतीय मुद्रा एक लाख 55 हजार, विदेशी मुद्रा दरहम 8920 (भारतीय मुद्रा एक लाख 76 हजार रुपये) के अलावा सवा लाख रुपये का मोबाइल हैंडसेट, 30 हजार की घड़ी और पासपोर्ट तथा दुबई का रेजीडेंस वीजा बरामद हुआ। एसपी हेमराज मीणा ने पुलिस प्रेक्षागृह में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि जनपदीय पुलिस तथा रेलवे सुरक्षा बल के बस्ती और गोंडा की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की।
एसपी ने बताया कि पुलिस का दबाव बढ़ने पर हामिद अशरफ निवासी रमवापुर थाना कप्तानगंज, हाल मुकाम घनसौली नवीं मुंबई रेलवे स्टेशन, घनसौली ठाणे, महाराष्ट्र से पहले नेपाल और बाद में दुबई भाग गया था। वहीं बैठकर कई वर्षों से वह ऑनलाइन काला धंधा चला रहा था। इधर गिरोह के कई खास सदस्यों और पिता की गिरफ्तारी होने से बौखलाया हामिद दुबई से 17 फरवरी को बंगलूरू एयरपोर्ट पर जैसे उतरा, पहले से तैयार पुलिस, आरपीएफ, सीआइबी की टीम ने उसे पकड़ लिया। एसपी के मुताबिक, आरपीएफ गोंडा थाने में दर्ज एक मुकदमे में हामिद को बंगलूरू से सोमवार को ट्रांजिट रिमांड पर पहले गोंडा लाया गया।
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उसके बाद मंगलवार को उसे हर्रैया थाने के एक मुकदमे में पूछताछ के लिए रिमांड पर बस्ती लाया गया है। ज्यादातर सवालों पर चुप्पी साध लेने वाले हामिद ने अपने ऊपर लगे टेरर फंडिंग में लिप्त होने के आरोप को नकारते हुए बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी खामी छिपाने के लिए कई चीजों को काफी बढ़ा चढ़ाकर प्रस्तुत किया, जिसका उसके पास कोई प्रमाण नहीं है।
गिरफ्तार हामिद ने पुलिस की पूछताछ में अपनी पूरी कहानी बयां की। बताया कि 12वीं तक की पढ़ाई कप्तानगंज में करने के बाद आईटीआई और वर्ष 2010 में ही कंप्यूटर का प्रशिक्षण लिया। उसके बाद एक रिश्तेदार के जरिए नवीं मुंबई जाकर कंप्यूटर साइंस का एक साल का कोर्स किया। वहां के एक इंस्टीट्यूट से एथिकल हैकिंग का कार्य सीखा। उससे किसी साफ्टवेयर के संचालन की पूरी सैद्घांतिक जानकारी होती थी।
वर्ष 2012-13 में वेस्ट मंत्रा कम्युनिटी बस्ती में शेयर ब्रोकर का कार्य करने के दौरान ही इसका संपर्क मोइनुलहक उर्फ लल्लू निवासी-गांधीनगर थाना कोतवाली से हुआ। उससे इसने टी सिस्टम साफ्टवेयर वर्ष 2014 में खरीदा, जो दो-तीन महीने में बंद हो गया। उसके बाद यह वर्ष 2014 में ही फैजाबाद निवासी हरमेंद्र उर्फ विक्की के संपर्क में आकर उससे थंडरवर्ल्ड साफ्टवेयर लिया। इस साफ्टवेयर को क्रैक करके इसने यह जानकारी हासिल कर ली कि साफ्टवेयर कैसे काम करता है। इस दौरान यह बस्ती में रहकर आईटीआई और कंप्यूटर का प्रशिक्षण सीखा। इसी दौरान कोडिंग सीखकर 2014-15 में इसने तत्काल टिकट बनाने वाला अपना एक साफ्टवेयर ब्लैक टीएस तैयार किया। इसी मामले में वर्ष 2016 में सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया था। मगर कुछ माह में ही जेल से छूट गया।
वर्ष 2017 में इसने पुन: दूसरा साफ्टवेयर रेड मिर्ची नाम से तैयार किया तथा यू-ट्यूब पर वीडियो बनाकर लोगों को जोड़ने लगा। इस दौरान इसका संपर्क योगेंद्र विश्वकर्मा, मनोज महतो, महबूब अहमद, सत्यवान उपाध्याय उर्फ बाबा, अतीक रिजवी आदि से हुआ। कुछ समय बाद जब रेड मिर्ची साफ्टवेयर कई जगह पकड़ा गया तो उसने इसका नाम बदल कर एएनएमएस कर दिया। वर्ष 2018-19 में इस साफ्टवेयर के काफी ग्राहक इससे जुड़े तथा इसने प्रति साफ्टवेयर एक से डेढ़ हजार रुपये की दर से सुपर सेलर और सेलर के माध्यम से बेचा। कमीशन की धनराशि को विभिन्न फर्जी पोर्टल एकाउंट तथा नगद धनराशि के रूप में प्राप्त किया। इसके लिए इसने सुपर सेलर स्मार्ट शॉप, एमओएस, एसपीएवाई इंडिया, हरमास नामक पोर्टल का इस्तेमाल किया। वर्ष 2019 में जनपद गोंडा के थाना खोड़ारे में स्कूल बम विस्फोट का मुकदमा दर्ज करने के उपरांत वह सऊदी अरब भाग गया।
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बस्ती। पांच दिन पहले बंगलूरू एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया नकली सॉफ्टवेयर का धंधा करने वाले गिरोह का सरगना हामिद अशरफ मंगलवार को ट्रांजिट रिमांड पर जिले में लाया गया। पुलिस के मुताबिक उसने कबूल किया कि नकली साफ्टवेयर बेचकर 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है।
उसकी गिरफ्तारी के लिए आईजी की तरफ से 50 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया था। हामिद के पास से नकद भारतीय मुद्रा एक लाख 55 हजार, विदेशी मुद्रा दरहम 8920 (भारतीय मुद्रा एक लाख 76 हजार रुपये) के अलावा सवा लाख रुपये का मोबाइल हैंडसेट, 30 हजार की घड़ी और पासपोर्ट तथा दुबई का रेजीडेंस वीजा बरामद हुआ। एसपी हेमराज मीणा ने पुलिस प्रेक्षागृह में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि जनपदीय पुलिस तथा रेलवे सुरक्षा बल के बस्ती और गोंडा की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की।
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एसपी ने बताया कि पुलिस का दबाव बढ़ने पर हामिद अशरफ निवासी रमवापुर थाना कप्तानगंज, हाल मुकाम घनसौली नवीं मुंबई रेलवे स्टेशन, घनसौली ठाणे, महाराष्ट्र से पहले नेपाल और बाद में दुबई भाग गया था। वहीं बैठकर कई वर्षों से वह ऑनलाइन काला धंधा चला रहा था। इधर गिरोह के कई खास सदस्यों और पिता की गिरफ्तारी होने से बौखलाया हामिद दुबई से 17 फरवरी को बंगलूरू एयरपोर्ट पर जैसे उतरा, पहले से तैयार पुलिस, आरपीएफ, सीआइबी की टीम ने उसे पकड़ लिया। एसपी के मुताबिक, आरपीएफ गोंडा थाने में दर्ज एक मुकदमे में हामिद को बंगलूरू से सोमवार को ट्रांजिट रिमांड पर पहले गोंडा लाया गया।
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उसके बाद मंगलवार को उसे हर्रैया थाने के एक मुकदमे में पूछताछ के लिए रिमांड पर बस्ती लाया गया है। ज्यादातर सवालों पर चुप्पी साध लेने वाले हामिद ने अपने ऊपर लगे टेरर फंडिंग में लिप्त होने के आरोप को नकारते हुए बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी खामी छिपाने के लिए कई चीजों को काफी बढ़ा चढ़ाकर प्रस्तुत किया, जिसका उसके पास कोई प्रमाण नहीं है।
गिरफ्तार हामिद ने पुलिस की पूछताछ में अपनी पूरी कहानी बयां की। बताया कि 12वीं तक की पढ़ाई कप्तानगंज में करने के बाद आईटीआई और वर्ष 2010 में ही कंप्यूटर का प्रशिक्षण लिया। उसके बाद एक रिश्तेदार के जरिए नवीं मुंबई जाकर कंप्यूटर साइंस का एक साल का कोर्स किया। वहां के एक इंस्टीट्यूट से एथिकल हैकिंग का कार्य सीखा। उससे किसी साफ्टवेयर के संचालन की पूरी सैद्घांतिक जानकारी होती थी।
वर्ष 2012-13 में वेस्ट मंत्रा कम्युनिटी बस्ती में शेयर ब्रोकर का कार्य करने के दौरान ही इसका संपर्क मोइनुलहक उर्फ लल्लू निवासी-गांधीनगर थाना कोतवाली से हुआ। उससे इसने टी सिस्टम साफ्टवेयर वर्ष 2014 में खरीदा, जो दो-तीन महीने में बंद हो गया। उसके बाद यह वर्ष 2014 में ही फैजाबाद निवासी हरमेंद्र उर्फ विक्की के संपर्क में आकर उससे थंडरवर्ल्ड साफ्टवेयर लिया। इस साफ्टवेयर को क्रैक करके इसने यह जानकारी हासिल कर ली कि साफ्टवेयर कैसे काम करता है। इस दौरान यह बस्ती में रहकर आईटीआई और कंप्यूटर का प्रशिक्षण सीखा। इसी दौरान कोडिंग सीखकर 2014-15 में इसने तत्काल टिकट बनाने वाला अपना एक साफ्टवेयर ब्लैक टीएस तैयार किया। इसी मामले में वर्ष 2016 में सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया था। मगर कुछ माह में ही जेल से छूट गया।
वर्ष 2017 में इसने पुन: दूसरा साफ्टवेयर रेड मिर्ची नाम से तैयार किया तथा यू-ट्यूब पर वीडियो बनाकर लोगों को जोड़ने लगा। इस दौरान इसका संपर्क योगेंद्र विश्वकर्मा, मनोज महतो, महबूब अहमद, सत्यवान उपाध्याय उर्फ बाबा, अतीक रिजवी आदि से हुआ। कुछ समय बाद जब रेड मिर्ची साफ्टवेयर कई जगह पकड़ा गया तो उसने इसका नाम बदल कर एएनएमएस कर दिया। वर्ष 2018-19 में इस साफ्टवेयर के काफी ग्राहक इससे जुड़े तथा इसने प्रति साफ्टवेयर एक से डेढ़ हजार रुपये की दर से सुपर सेलर और सेलर के माध्यम से बेचा। कमीशन की धनराशि को विभिन्न फर्जी पोर्टल एकाउंट तथा नगद धनराशि के रूप में प्राप्त किया। इसके लिए इसने सुपर सेलर स्मार्ट शॉप, एमओएस, एसपीएवाई इंडिया, हरमास नामक पोर्टल का इस्तेमाल किया। वर्ष 2019 में जनपद गोंडा के थाना खोड़ारे में स्कूल बम विस्फोट का मुकदमा दर्ज करने के उपरांत वह सऊदी अरब भाग गया।