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Basti News: गुमटी बनीं गले की फांस...पटरी पर रखवाकर मुश्किल में पालिका
Fri, 13 Dec 2024 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 13 Dec 2024 12:51 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में बना वार्मर रूम
सुल्तानपुर। गिरते पारे के साथ ही मेडिकल कॉलेज में तैयारियों ने जोर पकड़ा है। शीतलहर से ग्रसित लोगों को बचाने के लिए इंमरजेंसी वार्ड में आठ बेड का एक वार्मर रूम बनाया गया है। इस विशेष वार्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मरीजों का इलाज किया जाएगा। वार्ड को गर्म रखने के लिए हर बेड के ऊपर हीटर लगाए गए हैं। रजाई गद्दे के साथ ही अन्य संसाधनों की व्यवस्था की गई है।
फिजीशियन डॉ. अविनाश चंद्र गुप्ता ने बताया कि कोल्ड स्ट्रोक का खतरा ज्यादातर शीतलहरी के समय होती है। ठंड के मौसम में हमेशा ही सतर्क रहना चाहिए। कोल्ड स्ट्रोक में ठंडे तापमान के कारण मस्तिष्क में रक्त का संचरण बाधित हो जाता है। संचरण कम होने से शरीर के भाग सुन्न होने लगते हैं। इसके कारण रक्त वाहिकाओं के फटने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। इसमें मरीज को त्वरित चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होता है। देरी होने पर कोल्ड स्ट्रोक जानलेवा भी हो जाता है। कभी-कभी शारीरिक गतिविधियां काफी कम होने से शरीर में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में खतरा बढ़ जाता है।
कोल्ड स्ट्रोक के कारण और बचाव
फिजीशियन डॉ. आरपी द्विवेदी ने बताया कि जाड़े में लोग पानी कम पीते हैं। इससे रक्त गाढ़ा होने से थक्के बनने का जोखिम बढ़ जाता है, जो स्ट्रोक का एक महत्वपूर्ण कारण है। इसके अलावा सांस, मधुमेह, रक्तचाप के रोगियों में भी इसकी संभावनाएं ज्यादा होती हैं। कोल्ड स्ट्रोक के लक्षणों में चेहरा एक तरफ लटकना, हाथों में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना, स्पष्ट उच्चारण में समस्या, सिर दर्द, चक्कर आना, आंखों में धुंधलापन आदि प्रमुख हैं। ठंड के मौसम में ऐसे लक्षण दिखने पर पीड़ित को तत्काल निकट के सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। सावधानियां बताते हुए उन्होंने कहा कि ठंडे तापमान में रक्त संचरण सुचारु रूप से बना रहे, इसके लिए नियमित व्यायाम करें। पोषण युक्त आहार लें। नमक व तैलीय चीजों का कम सेवन करें। मद्य व धूम्रपान से बचें।
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फिजीशियन डॉ. अविनाश चंद्र गुप्ता ने बताया कि कोल्ड स्ट्रोक का खतरा ज्यादातर शीतलहरी के समय होती है। ठंड के मौसम में हमेशा ही सतर्क रहना चाहिए। कोल्ड स्ट्रोक में ठंडे तापमान के कारण मस्तिष्क में रक्त का संचरण बाधित हो जाता है। संचरण कम होने से शरीर के भाग सुन्न होने लगते हैं। इसके कारण रक्त वाहिकाओं के फटने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। इसमें मरीज को त्वरित चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होता है। देरी होने पर कोल्ड स्ट्रोक जानलेवा भी हो जाता है। कभी-कभी शारीरिक गतिविधियां काफी कम होने से शरीर में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में खतरा बढ़ जाता है।
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कोल्ड स्ट्रोक के कारण और बचाव
फिजीशियन डॉ. आरपी द्विवेदी ने बताया कि जाड़े में लोग पानी कम पीते हैं। इससे रक्त गाढ़ा होने से थक्के बनने का जोखिम बढ़ जाता है, जो स्ट्रोक का एक महत्वपूर्ण कारण है। इसके अलावा सांस, मधुमेह, रक्तचाप के रोगियों में भी इसकी संभावनाएं ज्यादा होती हैं। कोल्ड स्ट्रोक के लक्षणों में चेहरा एक तरफ लटकना, हाथों में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना, स्पष्ट उच्चारण में समस्या, सिर दर्द, चक्कर आना, आंखों में धुंधलापन आदि प्रमुख हैं। ठंड के मौसम में ऐसे लक्षण दिखने पर पीड़ित को तत्काल निकट के सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। सावधानियां बताते हुए उन्होंने कहा कि ठंडे तापमान में रक्त संचरण सुचारु रूप से बना रहे, इसके लिए नियमित व्यायाम करें। पोषण युक्त आहार लें। नमक व तैलीय चीजों का कम सेवन करें। मद्य व धूम्रपान से बचें।
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