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Basti News: शादी के नाम पर छली जा रहीं किशोरियां, झेल रहीं संताप
Thu, 04 Apr 2024 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 04 Apr 2024 12:22 AM IST
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तीन माह में नाबालिगों को भगा ले जाने, दुष्कर्म के 19 मामले
शादी का सब्जबाग दिखाकर किशोरियों को छलते हैं मनचले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हसीन जिंदगी का सब्जबाग दिखाकर युवतियों और किशोरियों की अस्मत से खेलने का शगल बढ़ता जा रहा है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब जिले के किसी न किसी क्षेत्र में इस तरह के केस दर्ज न हो रहे हों। किसी को छह माह तक झांसा देकर छला गया तो किसी को साल-दो साल तक अंधेरे में रखकर मनमानी की गई। कई किशोरियां झांसे में आकर घर छोड़कर भागने में संकोच भी नहीं करतीं। वह भूल जाती हैं कि उनके इस कदम से परिवार वालों पर क्या बीतेगी। परिवार की पगड़ी उछालते देर न करने वाली नई पीढ़ी की करतूत से माता-पिता ही नहीं, सगे संबंधी भी शर्मसार हैं।
जिले में पिछले तीन माह में दुष्कर्म के 19 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से आधे मामले शादी के नाम पर याैन शाेषण के हैं। काेर्ट में दुष्कर्म के करीब 500 मामले लंबित हैं। इनमें भी आधे मामले शादी के नाम पर याैन शाेषण के हैं। नाबालिग के साथ दुष्कर्म के भी कई ऐसे मामले हैं जिनके पीछे शादी का झांसा देकर याैन संबंध स्थापित किया गया है। केस दर्ज कराने के बाद पीड़िता हर स्तर पर परेशानी झेलती है।
मामलों की तह में जाने पर पाया गया कि लड़कियां भी शातिर युवकों पर विश्वास कर उनके चंगुल में आसानी से फंस जाती हैं। ऐसे युवक पहले भाेली भाली लड़कियाें काे प्रेम जाल में फंसाते हैं। फिर शादी का सब्जबाग दिखा कर संबंध स्थापित कर लेते हैं। बाद में जब लड़की शादी का दबाव बनाती है ताे लड़का मुकर जाता है। इसके बाद लड़की थकहार कर थाने में इंसाफ मांगने पहुंचती है और आरोपी पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराती है। यहां तक कि अपशब्द कहने, मारपीट और धमकी देने तक के आरोप लगाती हैं। इनमें पांच मामले तो ऐसे आए जिनमें पीड़िता गर्भवती हो गई और उसे गर्भपात कराने के लिए प्रताड़ित किया गया।
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किशोरियों के मामले सबसे पीड़ा दायक
परिवार के लिए किशोरियों के मामले सबसे ज्यादा समस्या खड़ी करते हैं। अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह बताते हैं कि किशोरियों के घर से भाग जाने के बाद परिवार के लोगों को सबसे ज्यादा जिल्लत झेलनी पड़ती है। कम उम्र में अपनी अस्मत गंवा देने का दंश परिवार को भुगतना पड़ता है। पुलिस के खोजकर लाने के बाद उन किशोरियों को अपनाने की उनकी मजबूरी होती है। ऐसा न करने पर उन्हें नारी निकेतन भेजा जाता है।
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दोस्त बनकर करते हैं छल
मनोविज्ञानी डाॅ. हरिनारायण पांडेय बताते हैं कि सोशल मीडिया के जमाने में विपरीत लिंगी दोस्त बनाने का फैशन सा बन गया है। यद्यापि मानसिक रूप से वे इतने परिपक्व नहीं होतीं कि अपना भला-बुरा समझ पाए। कुछ समय बाद उसी दोस्त से भावनात्मक रूप से इतनी जुड़ जाती हैं कि उसकी हर बात सही लगने लगती है। इसी चक्कर में उनके साथ छल होता है। बाद में जब वही दोस्त प्रेमी बनकर आबरू से खिलवाड़ करने लगता है तो आंख खुलती है। मगर, तब तक देर हो चुकी होती है।
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अपनी दुनिया में खोई रहती है नई पीढ़ी
समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि मौजूदा सामाजिक परिवेश में स्वच्छंद मानसिकता को काफी बढ़ावा मिलने लगा है। मोबाइल-इंटरनेट ने सामाजिक मान्यताओं और मर्यादाओं को काफी नुकसान पहुंचाया है। पारिवारिक जिंदगी से कटकर नई पीढ़ी अपनी अलग दुनिया में खोई रहती हैं। जहां दोस्त बनाने का कल्चर काफी बढ़ गया है। विकृत मानसिकता के लोग इसी कमजोरी का फायदा उठाकर इस तरह की हरकत करते हैं। ऐसे में परिवार वालों को काफी सजग रहने की जरूरत होती है।
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शादी का सब्जबाग दिखाकर किशोरियों को छलते हैं मनचले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हसीन जिंदगी का सब्जबाग दिखाकर युवतियों और किशोरियों की अस्मत से खेलने का शगल बढ़ता जा रहा है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब जिले के किसी न किसी क्षेत्र में इस तरह के केस दर्ज न हो रहे हों। किसी को छह माह तक झांसा देकर छला गया तो किसी को साल-दो साल तक अंधेरे में रखकर मनमानी की गई। कई किशोरियां झांसे में आकर घर छोड़कर भागने में संकोच भी नहीं करतीं। वह भूल जाती हैं कि उनके इस कदम से परिवार वालों पर क्या बीतेगी। परिवार की पगड़ी उछालते देर न करने वाली नई पीढ़ी की करतूत से माता-पिता ही नहीं, सगे संबंधी भी शर्मसार हैं।
जिले में पिछले तीन माह में दुष्कर्म के 19 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से आधे मामले शादी के नाम पर याैन शाेषण के हैं। काेर्ट में दुष्कर्म के करीब 500 मामले लंबित हैं। इनमें भी आधे मामले शादी के नाम पर याैन शाेषण के हैं। नाबालिग के साथ दुष्कर्म के भी कई ऐसे मामले हैं जिनके पीछे शादी का झांसा देकर याैन संबंध स्थापित किया गया है। केस दर्ज कराने के बाद पीड़िता हर स्तर पर परेशानी झेलती है।
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मामलों की तह में जाने पर पाया गया कि लड़कियां भी शातिर युवकों पर विश्वास कर उनके चंगुल में आसानी से फंस जाती हैं। ऐसे युवक पहले भाेली भाली लड़कियाें काे प्रेम जाल में फंसाते हैं। फिर शादी का सब्जबाग दिखा कर संबंध स्थापित कर लेते हैं। बाद में जब लड़की शादी का दबाव बनाती है ताे लड़का मुकर जाता है। इसके बाद लड़की थकहार कर थाने में इंसाफ मांगने पहुंचती है और आरोपी पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराती है। यहां तक कि अपशब्द कहने, मारपीट और धमकी देने तक के आरोप लगाती हैं। इनमें पांच मामले तो ऐसे आए जिनमें पीड़िता गर्भवती हो गई और उसे गर्भपात कराने के लिए प्रताड़ित किया गया।
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किशोरियों के मामले सबसे पीड़ा दायक
परिवार के लिए किशोरियों के मामले सबसे ज्यादा समस्या खड़ी करते हैं। अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह बताते हैं कि किशोरियों के घर से भाग जाने के बाद परिवार के लोगों को सबसे ज्यादा जिल्लत झेलनी पड़ती है। कम उम्र में अपनी अस्मत गंवा देने का दंश परिवार को भुगतना पड़ता है। पुलिस के खोजकर लाने के बाद उन किशोरियों को अपनाने की उनकी मजबूरी होती है। ऐसा न करने पर उन्हें नारी निकेतन भेजा जाता है।
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दोस्त बनकर करते हैं छल
मनोविज्ञानी डाॅ. हरिनारायण पांडेय बताते हैं कि सोशल मीडिया के जमाने में विपरीत लिंगी दोस्त बनाने का फैशन सा बन गया है। यद्यापि मानसिक रूप से वे इतने परिपक्व नहीं होतीं कि अपना भला-बुरा समझ पाए। कुछ समय बाद उसी दोस्त से भावनात्मक रूप से इतनी जुड़ जाती हैं कि उसकी हर बात सही लगने लगती है। इसी चक्कर में उनके साथ छल होता है। बाद में जब वही दोस्त प्रेमी बनकर आबरू से खिलवाड़ करने लगता है तो आंख खुलती है। मगर, तब तक देर हो चुकी होती है।
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अपनी दुनिया में खोई रहती है नई पीढ़ी
समाजशास्त्री डाॅ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि मौजूदा सामाजिक परिवेश में स्वच्छंद मानसिकता को काफी बढ़ावा मिलने लगा है। मोबाइल-इंटरनेट ने सामाजिक मान्यताओं और मर्यादाओं को काफी नुकसान पहुंचाया है। पारिवारिक जिंदगी से कटकर नई पीढ़ी अपनी अलग दुनिया में खोई रहती हैं। जहां दोस्त बनाने का कल्चर काफी बढ़ गया है। विकृत मानसिकता के लोग इसी कमजोरी का फायदा उठाकर इस तरह की हरकत करते हैं। ऐसे में परिवार वालों को काफी सजग रहने की जरूरत होती है।