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Basti News: बालिका को रात में थाने पर रोका, विवेचक व कोतवाल तलब
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बालिका को रात में थाने पर रोका, विवेचक व कोतवाल तलब
बस्ती। नाबालिग बालिका को रात भर कोतवाली परिसर में रोकने की घटना की सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी) के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में सीडब्ल्यूसी ने कोतवाल, विवेचक और कोतवाली के पुलिस बाल कल्याण अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है। यह स्पष्टीकरण इन्हें 06 फरवरी तक देना होगा।
कोतवाली थाना क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की के पिता ने अपनी बेटी के लापता होने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने बालिका को सकुशल बरामद कर लिया, लेकिन उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि थाने पर रात भर रोकने के बाद दूसरे दिन शाम पांच बजे के बाद सीडब्ल्यूसी के सदस्य के सामने उनके घर ले जाकर प्रस्तुत किया था।
नाबालिग लड़की को रात भर कोतवाली में रोके जाने की जानकारी होने पर न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, डॉ. संतोष श्रीवास्तव, गोवर्धन गुप्ता, मंजू त्रिपाठी ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोतवाल, विवेचक और कोतवाली के बाल कल्याण अधिकारी से 06 फरवरी तक मामले के संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगा है। सीडब्ल्यूसी ने कहा है कि बालिका को न्याय पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के बजाय कोतवाली परिसर में रोक कर बाल अधिनियम 2015 का उल्लंघन किया गया है। यह कृत्य बालिका के सर्वोच्च हित में भी बाधक है।
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बस्ती। नाबालिग बालिका को रात भर कोतवाली परिसर में रोकने की घटना की सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी) के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में सीडब्ल्यूसी ने कोतवाल, विवेचक और कोतवाली के पुलिस बाल कल्याण अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है। यह स्पष्टीकरण इन्हें 06 फरवरी तक देना होगा।
कोतवाली थाना क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की के पिता ने अपनी बेटी के लापता होने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने बालिका को सकुशल बरामद कर लिया, लेकिन उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि थाने पर रात भर रोकने के बाद दूसरे दिन शाम पांच बजे के बाद सीडब्ल्यूसी के सदस्य के सामने उनके घर ले जाकर प्रस्तुत किया था।
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नाबालिग लड़की को रात भर कोतवाली में रोके जाने की जानकारी होने पर न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, डॉ. संतोष श्रीवास्तव, गोवर्धन गुप्ता, मंजू त्रिपाठी ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोतवाल, विवेचक और कोतवाली के बाल कल्याण अधिकारी से 06 फरवरी तक मामले के संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगा है। सीडब्ल्यूसी ने कहा है कि बालिका को न्याय पीठ के समक्ष प्रस्तुत करने के बजाय कोतवाली परिसर में रोक कर बाल अधिनियम 2015 का उल्लंघन किया गया है। यह कृत्य बालिका के सर्वोच्च हित में भी बाधक है।
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