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Basti News: चढ़ावा चढ़ाकर कराइए रजिस्ट्री... बाद में नवैयत जांचने का भी झेलना पड़ेगा भार
Thu, 02 Nov 2023 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 02 Nov 2023 12:53 AM IST
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गाढ़ी कमाई से जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद पहुंच रही विभाग की टीम
जरूरी नियमों के पालन में पूरा किया जा रहा कोरम, जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जमीन के रजिस्ट्री में भी बड़ा खेल है। जिले की चारों तहसीलों के उपनिबंधन कार्यालयों में जरूरी नियमों के पालन के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा है। स्टांप शुल्क बचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। बैनामा में स्टांप ड्यूटी पर खर्च कम आए, इसलिए मुख्य मार्गों का वर्णन अंकित नहीं किया जा रहा है। जमीन खरीदने वालों को तत्काल में बचत तो दिखाई पड़ती है, लेकिन बाद में यह उन्हीं के माथे पर दोहरा बोझ बनकर उतर रहा है।
जिंदगी की गाढ़ी कमाई से यदि जमीन खरीदने की हसरत पाल रखे हैं तो सोच समझकर कदम उठाइए। सिर्फ राजस्व अभिलेख या फर्जी आधार पर ही आप ठगे नहीं जा सकते हैं, पंजीयन विभाग का मकड़जाल भी उलझाने वाला है। दस्तावेज में जमीन की नवैयत से छेड़छाड़ किए तो आगे आपको बहुत कठिनाई झेलनी पड़ सकती है। इसी को आधार बनाकर आपको नियमों में उलझा दिया जाएगा। इसलिए बेहतर है कि जमीन की नवैयत का उल्लेख दस्तावेज में वास्तविक रूप से किया जाए।
यही नहीं, जिस जमीन की रजिस्ट्री कराने आप पहुंचे हैं सबकुछ सही होने के बाद भी बिना चढ़ावा चढ़ाए कुछ होने वाला नहीं है। जमीन खरीदने वालों को यह तक नहीं पता होता है कि स्टांप और पंजीयन शुल्क के रूप में दिए जाने वाले रकम में चढ़ावे की धनराशि भी शामिल है। यह सब बहुत करीने से होता है। बाहर दस्तावेज तैयार होने के बाद बिचौलियों के साथ क्रेता, विक्रेता दोनों अंदर पहुंचते हैं। यहां सब इशारों में चलता है। पत्रावली आगे बढ़ती रहती है। मालियत का एक प्रतिशत पंजीयन शुल्क और उतना ही अतिरिक्त शुल्क चढ़ाना पड़ता है। यह सब बिचौलियों के जिम्मे रहता है। इसके बाद बयान एवं ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होती है।
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क्रेताओं को नहीं मिल रही पंजीयन शुल्क की रसीद
कुछ क्रेताओं का आरोप है कि निबंधन कार्यालय में उन्हेंं पंजीयन शुल्क की रसीद नहीं दी जाती है। जमीन बैनामा के लिए शुल्क निर्धारण की कोई नोटिस भी कार्यालय में चस्पा नहीं रहती है। ताकि बैनामेदार पारदर्शी ढंग से पंजीयन शुल्क से अवगत हो सके हैं। दरअसल, क्रेता से पंजीयन शुल्क के नाम पर ही अधिक वसूली होती है। इसीलिए उन्हें विभाग की तरफ से कुछ नहीं बताया जाता है। बिचौलिए सबकुछ जानकर पंजीयन कराने के बाद क्रेता-विक्रेता को लेकर बाहर आ जाते हैं।
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बयान लेते समय अपना शुल्क नहीं बताते जिम्मेदार
उप निबंधन कार्यालय बस्ती सदर में अपने रिश्तेदार की जमीन रजिस्ट्री कराने आए परसा मिश्र के लालमन ने कहा कि साहब खेल सब समझ में आता है, लेकिन बोलने पर अपना ही नुकसान होगा। क्रेता-विक्रेता का मौखिक बयान लेते समय कोई भी जिम्मेदार यह नहीं बताता है कि विभाग में पंजीयन शुल्क कितना लगेगा। बस नाम-पता पूछते हैं और विक्रेता से भुगतान प्राप्ति का बयान लेते हैं। इसके बाद छोड़ देते हैं।
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ऐसे होती स्टांप शुल्क की चोरी
मुख्य, संपर्क व चकमार्ग, नगर पालिका क्षेत्र एवं आबादी क्षेत्र की जमीनों की मालियत अधिक होती है। इनके बिक्री पर क्षेत्र के अनुसार स्टांप शुल्क निर्धारित है। शहरी क्षेत्र की जमीन है तो कुल मालियत का सात प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्र में कुल मालियत का पांच प्रतिशत स्टांप शुल्क निर्धारित है। महिलाओं को शहरी क्षेत्र में दस लाख रुपये मालियत पर छह प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में चार प्रतिशत अतिरिक्त छूट अनुमन्य है। इसके अलावा सड़क के किनारे अथवा आबादी के बीच की जमीन का स्टांप शुल्क बढ़ जाता है। मगर, स्टांप ड्यूटी घटाने के लिए दस्तावेज में सड़क, आबादी आदि क्षेत्रों का जिक्र नहीं होता है।
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कीमती जमीनों पर रहती हैं नजर
खरीदारों का आरोप है कि शहरी क्षेत्र की कीमती जमीनों पर जिम्मेदारों की नजर रहती है। बैनामे के समय विभाग की ओर किसी तरह की आपत्ति नहीं होती हैं। चढ़ावा चढ़ाने के बाद रजिस्ट्री हो जाती है। अगले ही दिन से बिचौलियों के साथ जिम्मेदार मौके पर निरीक्षण करने पहुंचते हैं। क्रेता पर मौखिक रूप से स्टांप चोरी का आरोप मढ़ा जाता है। इसके बाद आगे की भूमिका बिचौलिए निभाते हैं। वह क्रेता से अतिरिक्त धन की वसूली कर मामला शांत कराने का विश्वास दिलाते हैं। इसके बाद सबकुछ ठीक हो जाता है। यदि क्रेता अतिरिक्त चढ़ावा चढ़ाने से मना करता है तो उस पर कुछ दिन बाद जुर्माने की कार्रवाई हो जाती है।
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प्रतिदिन 100 से 150 जमीनों की हो रही रजिस्ट्री
जिले की चारों तहसीलों में मिलाकर प्रतिदिन 100 से 150 जमीनों की रजिस्ट्री कराई जा रही है। इसमें दो दर्जन से अधिक मामलों में स्थलीय निरीक्षण होता है। कुछेक मामलों को छोड़कर बिचौलियों के माध्यम से सब रफा-दफा कर दिया जाता है।
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केस- एक
पांडेय बाजार के आशुतोष ने बताया कि हड़िया चौराहे के पास फोरलेन के निकट एक जमीन की रजिस्ट्री इसी माह कराई गई। दो दिन बाद विभागीय जिम्मेदार जांच करने पहुंचे। जमीन की नवैयत के हिसाब से स्टांप चोरी बताई गई। बाद में क्रेता ने बिचौलिए को पकड़ा और अतिरिक्त शुल्क देकर मामला शांत करा दिया।
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केस- दो
मुंडेरवा के सुधाकर ने बताया कि उन्होंने रिश्तेदार को शहरी क्षेत्र में डारीडीहा के पास जमीन खरीदवाई। निबंधन कार्यालय में दस्तावेज पेश करने के दौरान कोई कमी नहीं बताई गई। जितना शुल्क बिचौलिए ने मांगा दे दिए। अगले दिन स्थलीय निरीक्षण के दौरान विभाग के ही एक कर्मचारी ने स्टांप ड्यूटी कम लगाने की बात कही। जुर्माने के भय से दोबारा बिचौलिए को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा।
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केस- तीन
बड़ेवन के विक्रम ने बताया कि ढोरिका में उन्होंने भाई के नाम जमीन खरीदी थी। जमीन के सामने चकमार्ग है जिसे दस्तावेज में दर्शाया गया है। स्टांप ड्यूटी भी निबंधन विवरणिका के हिसाब से लगाई गई। चढ़ावा चढ़ाने के बाद रजिस्ट्री हो गया। बाद में कार्रवाई होने का भय पैदाकर फिर से वसूली की गई।
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संदेह पर पहले ही करनी चाहिए जांच
जिस जमीन की नवैयत या कागजात पर संदेह हो उसकी जांच पहले ही कर लेनी चाहिए। बैनामा से पूर्व निबंधन कार्यालय चाहे तो मौके पर किसी को भेज कर सत्यता की छानबीन करा सकता है। अमूमन जमीनों की नवैयत की जांच बाद में ही की जाती है।
एसएन दुबे, अधिवक्ता
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कोट
चढ़ावा चढ़ाने जैसी बात निराधार है। जमीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन कराई जाती है। केवल पंजीयन शुल्क ही यहां जमा कराया जाता है। स्टांप शुल्क भी अब ऑनलाइन जमा होता है। जहां तक जांच की बात है तो यह तत्काल संभव नहीं हो सकता है। पंजीयन के बाद ही जांच हो सकती है।
ज्ञानेंद्र सिंह, सब रजिस्टार, बस्ती सदर
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जरूरी नियमों के पालन में पूरा किया जा रहा कोरम, जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जमीन के रजिस्ट्री में भी बड़ा खेल है। जिले की चारों तहसीलों के उपनिबंधन कार्यालयों में जरूरी नियमों के पालन के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा है। स्टांप शुल्क बचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। बैनामा में स्टांप ड्यूटी पर खर्च कम आए, इसलिए मुख्य मार्गों का वर्णन अंकित नहीं किया जा रहा है। जमीन खरीदने वालों को तत्काल में बचत तो दिखाई पड़ती है, लेकिन बाद में यह उन्हीं के माथे पर दोहरा बोझ बनकर उतर रहा है।
जिंदगी की गाढ़ी कमाई से यदि जमीन खरीदने की हसरत पाल रखे हैं तो सोच समझकर कदम उठाइए। सिर्फ राजस्व अभिलेख या फर्जी आधार पर ही आप ठगे नहीं जा सकते हैं, पंजीयन विभाग का मकड़जाल भी उलझाने वाला है। दस्तावेज में जमीन की नवैयत से छेड़छाड़ किए तो आगे आपको बहुत कठिनाई झेलनी पड़ सकती है। इसी को आधार बनाकर आपको नियमों में उलझा दिया जाएगा। इसलिए बेहतर है कि जमीन की नवैयत का उल्लेख दस्तावेज में वास्तविक रूप से किया जाए।
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यही नहीं, जिस जमीन की रजिस्ट्री कराने आप पहुंचे हैं सबकुछ सही होने के बाद भी बिना चढ़ावा चढ़ाए कुछ होने वाला नहीं है। जमीन खरीदने वालों को यह तक नहीं पता होता है कि स्टांप और पंजीयन शुल्क के रूप में दिए जाने वाले रकम में चढ़ावे की धनराशि भी शामिल है। यह सब बहुत करीने से होता है। बाहर दस्तावेज तैयार होने के बाद बिचौलियों के साथ क्रेता, विक्रेता दोनों अंदर पहुंचते हैं। यहां सब इशारों में चलता है। पत्रावली आगे बढ़ती रहती है। मालियत का एक प्रतिशत पंजीयन शुल्क और उतना ही अतिरिक्त शुल्क चढ़ाना पड़ता है। यह सब बिचौलियों के जिम्मे रहता है। इसके बाद बयान एवं ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होती है।
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क्रेताओं को नहीं मिल रही पंजीयन शुल्क की रसीद
कुछ क्रेताओं का आरोप है कि निबंधन कार्यालय में उन्हेंं पंजीयन शुल्क की रसीद नहीं दी जाती है। जमीन बैनामा के लिए शुल्क निर्धारण की कोई नोटिस भी कार्यालय में चस्पा नहीं रहती है। ताकि बैनामेदार पारदर्शी ढंग से पंजीयन शुल्क से अवगत हो सके हैं। दरअसल, क्रेता से पंजीयन शुल्क के नाम पर ही अधिक वसूली होती है। इसीलिए उन्हें विभाग की तरफ से कुछ नहीं बताया जाता है। बिचौलिए सबकुछ जानकर पंजीयन कराने के बाद क्रेता-विक्रेता को लेकर बाहर आ जाते हैं।
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बयान लेते समय अपना शुल्क नहीं बताते जिम्मेदार
उप निबंधन कार्यालय बस्ती सदर में अपने रिश्तेदार की जमीन रजिस्ट्री कराने आए परसा मिश्र के लालमन ने कहा कि साहब खेल सब समझ में आता है, लेकिन बोलने पर अपना ही नुकसान होगा। क्रेता-विक्रेता का मौखिक बयान लेते समय कोई भी जिम्मेदार यह नहीं बताता है कि विभाग में पंजीयन शुल्क कितना लगेगा। बस नाम-पता पूछते हैं और विक्रेता से भुगतान प्राप्ति का बयान लेते हैं। इसके बाद छोड़ देते हैं।
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ऐसे होती स्टांप शुल्क की चोरी
मुख्य, संपर्क व चकमार्ग, नगर पालिका क्षेत्र एवं आबादी क्षेत्र की जमीनों की मालियत अधिक होती है। इनके बिक्री पर क्षेत्र के अनुसार स्टांप शुल्क निर्धारित है। शहरी क्षेत्र की जमीन है तो कुल मालियत का सात प्रतिशत तथा ग्रामीण क्षेत्र में कुल मालियत का पांच प्रतिशत स्टांप शुल्क निर्धारित है। महिलाओं को शहरी क्षेत्र में दस लाख रुपये मालियत पर छह प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में चार प्रतिशत अतिरिक्त छूट अनुमन्य है। इसके अलावा सड़क के किनारे अथवा आबादी के बीच की जमीन का स्टांप शुल्क बढ़ जाता है। मगर, स्टांप ड्यूटी घटाने के लिए दस्तावेज में सड़क, आबादी आदि क्षेत्रों का जिक्र नहीं होता है।
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कीमती जमीनों पर रहती हैं नजर
खरीदारों का आरोप है कि शहरी क्षेत्र की कीमती जमीनों पर जिम्मेदारों की नजर रहती है। बैनामे के समय विभाग की ओर किसी तरह की आपत्ति नहीं होती हैं। चढ़ावा चढ़ाने के बाद रजिस्ट्री हो जाती है। अगले ही दिन से बिचौलियों के साथ जिम्मेदार मौके पर निरीक्षण करने पहुंचते हैं। क्रेता पर मौखिक रूप से स्टांप चोरी का आरोप मढ़ा जाता है। इसके बाद आगे की भूमिका बिचौलिए निभाते हैं। वह क्रेता से अतिरिक्त धन की वसूली कर मामला शांत कराने का विश्वास दिलाते हैं। इसके बाद सबकुछ ठीक हो जाता है। यदि क्रेता अतिरिक्त चढ़ावा चढ़ाने से मना करता है तो उस पर कुछ दिन बाद जुर्माने की कार्रवाई हो जाती है।
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प्रतिदिन 100 से 150 जमीनों की हो रही रजिस्ट्री
जिले की चारों तहसीलों में मिलाकर प्रतिदिन 100 से 150 जमीनों की रजिस्ट्री कराई जा रही है। इसमें दो दर्जन से अधिक मामलों में स्थलीय निरीक्षण होता है। कुछेक मामलों को छोड़कर बिचौलियों के माध्यम से सब रफा-दफा कर दिया जाता है।
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केस- एक
पांडेय बाजार के आशुतोष ने बताया कि हड़िया चौराहे के पास फोरलेन के निकट एक जमीन की रजिस्ट्री इसी माह कराई गई। दो दिन बाद विभागीय जिम्मेदार जांच करने पहुंचे। जमीन की नवैयत के हिसाब से स्टांप चोरी बताई गई। बाद में क्रेता ने बिचौलिए को पकड़ा और अतिरिक्त शुल्क देकर मामला शांत करा दिया।
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केस- दो
मुंडेरवा के सुधाकर ने बताया कि उन्होंने रिश्तेदार को शहरी क्षेत्र में डारीडीहा के पास जमीन खरीदवाई। निबंधन कार्यालय में दस्तावेज पेश करने के दौरान कोई कमी नहीं बताई गई। जितना शुल्क बिचौलिए ने मांगा दे दिए। अगले दिन स्थलीय निरीक्षण के दौरान विभाग के ही एक कर्मचारी ने स्टांप ड्यूटी कम लगाने की बात कही। जुर्माने के भय से दोबारा बिचौलिए को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा।
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केस- तीन
बड़ेवन के विक्रम ने बताया कि ढोरिका में उन्होंने भाई के नाम जमीन खरीदी थी। जमीन के सामने चकमार्ग है जिसे दस्तावेज में दर्शाया गया है। स्टांप ड्यूटी भी निबंधन विवरणिका के हिसाब से लगाई गई। चढ़ावा चढ़ाने के बाद रजिस्ट्री हो गया। बाद में कार्रवाई होने का भय पैदाकर फिर से वसूली की गई।
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संदेह पर पहले ही करनी चाहिए जांच
जिस जमीन की नवैयत या कागजात पर संदेह हो उसकी जांच पहले ही कर लेनी चाहिए। बैनामा से पूर्व निबंधन कार्यालय चाहे तो मौके पर किसी को भेज कर सत्यता की छानबीन करा सकता है। अमूमन जमीनों की नवैयत की जांच बाद में ही की जाती है।
एसएन दुबे, अधिवक्ता
..
कोट
चढ़ावा चढ़ाने जैसी बात निराधार है। जमीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन कराई जाती है। केवल पंजीयन शुल्क ही यहां जमा कराया जाता है। स्टांप शुल्क भी अब ऑनलाइन जमा होता है। जहां तक जांच की बात है तो यह तत्काल संभव नहीं हो सकता है। पंजीयन के बाद ही जांच हो सकती है।
ज्ञानेंद्र सिंह, सब रजिस्टार, बस्ती सदर