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Basti News: बारिश और उमस में बढ़ा फंगल संक्रमण, घमौरिया और दाद कर रहे परेशान
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जिला अस्पताल में त्वचा रोग विभाग में मरीज की जांच करते चिकित्सक डॉ. राम अनुग्रह संवाद
बस्ती। बारिश, उमस और बीच-बीच में निकल रही तेज धूप का असर लोगों की त्वचा पर दिखाई देने लगा है। फंगल संक्रमण, घमौरियां, दाद, खुजली, त्वचा एलर्जी और सनबर्न की शिकायतें बढ़ गई हैं।
जिला अस्पताल की चर्म रोग ओपीडी में इन दिनों रोजाना 230 से 250 मरीज पहुंच रहे हैं। पहले यह संख्या 100 से 150 के बीच थी। पैर में संक्रमण बढ़ने से सड़न की शिकायत वाले मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. रामअनुग्रह के अनुसार, लगातार पसीना आने और त्वचा के नम रहने से फंगल संक्रमण तेजी से फैलता है। जांघों, शरीर के अंदरूनी हिस्सों और उंगलियों के बीच संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। बच्चों, बुजुर्गों, खेतों में काम करने वाले किसानों और धूप में रहने वाले श्रमिकों में त्वचा संबंधी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि अधिक पसीने के कारण रोमछिद्र बंद होने से घमौरियां, लाल दाने, जलन और खुजली की समस्या बढ़ जाती है। वहीं, बारिश के बाद बादल छंटने पर तेज धूप निकलने से चेहरे, गर्दन और हाथों पर लालिमा, जलन और सनबर्न की शिकायतें भी बढ़ी हैं। दाद और एग्जिमा के मरीज भी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पैर में संक्रमण और सड़न वाले मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के बाद दवा दी जा रही है।
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गीले कपड़े और नमी बढ़ा रहे संक्रमण का खतरा
डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि लंबे समय तक पसीने से भीगे या गीले कपड़े पहने रहने, शरीर की ठीक से सफाई न करने और नमी बने रहने से फंगल संक्रमण बढ़ सकता है। ऐसे में त्वचा को साफ रखने के साथ उसे अच्छी तरह सुखाना जरूरी है।
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वायरल संक्रमण के मरीज भी बढ़े, संदिग्धों की स्क्रीनिंग
बारिश और मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण के मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। फिजिशियन डॉ. संतोष कुमार के अनुसार, वायरल संक्रमण के मरीजों में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मिलने पर उनकी स्क्रीनिंग कराई जा रही है। जरूरत पड़ने पर जांच के लिए उच्च केंद्र भेजा जाता है। अस्पताल में बारिश के बीच मरीजों को पर्चा बनवाने, जांच कराने और दवा लेने में भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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इन बीमारियों ने बढ़ाई चिंता
डॉ. राम प्रकाश का कहना है कि लगातार पसीना और गीले कपड़े पहनने से जांघों, अंदरूनी अंग व उंगलियों के बीच फंगल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। साथ ही अधिक पसीने से रोमछिद्र बंद होने पर लाल दाने, जलन और खुजली की समस्या बढ़ रही है। बादल छंटने के बाद तेज धूप निकलती है। ऐसे में धूप के संपर्क में आने से चेहरे, गर्दन और हाथों की त्वचा लाल पड़ने और जलन की शिकायत बढ़ी है।
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चिकित्सकों के सुझाव
दोपहर 12 से तीन बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचें।
पसीना आने पर शरीर को साफ कर अच्छी तरह सुखाएं।
सूती, हल्के रंग के और ढीले कपड़े पहनें।
गीले कपड़े अधिक देर तक न पहनें।
पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें।
लाल चकत्ते, खुजली या संक्रमण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें।
मौसमी और रसदार फलों का सेवन करें।
कोट
मरीजों की समय से जांच और उपचार सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल में दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। मौसमी बुखार को लेकर चिकित्सकों को भी अलर्ट किया गया है।
-डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
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जिला अस्पताल की चर्म रोग ओपीडी में इन दिनों रोजाना 230 से 250 मरीज पहुंच रहे हैं। पहले यह संख्या 100 से 150 के बीच थी। पैर में संक्रमण बढ़ने से सड़न की शिकायत वाले मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. रामअनुग्रह के अनुसार, लगातार पसीना आने और त्वचा के नम रहने से फंगल संक्रमण तेजी से फैलता है। जांघों, शरीर के अंदरूनी हिस्सों और उंगलियों के बीच संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। बच्चों, बुजुर्गों, खेतों में काम करने वाले किसानों और धूप में रहने वाले श्रमिकों में त्वचा संबंधी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं।
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उन्होंने बताया कि अधिक पसीने के कारण रोमछिद्र बंद होने से घमौरियां, लाल दाने, जलन और खुजली की समस्या बढ़ जाती है। वहीं, बारिश के बाद बादल छंटने पर तेज धूप निकलने से चेहरे, गर्दन और हाथों पर लालिमा, जलन और सनबर्न की शिकायतें भी बढ़ी हैं। दाद और एग्जिमा के मरीज भी उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पैर में संक्रमण और सड़न वाले मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के बाद दवा दी जा रही है।
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गीले कपड़े और नमी बढ़ा रहे संक्रमण का खतरा
डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि लंबे समय तक पसीने से भीगे या गीले कपड़े पहने रहने, शरीर की ठीक से सफाई न करने और नमी बने रहने से फंगल संक्रमण बढ़ सकता है। ऐसे में त्वचा को साफ रखने के साथ उसे अच्छी तरह सुखाना जरूरी है।
वायरल संक्रमण के मरीज भी बढ़े, संदिग्धों की स्क्रीनिंग
बारिश और मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण के मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। फिजिशियन डॉ. संतोष कुमार के अनुसार, वायरल संक्रमण के मरीजों में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मिलने पर उनकी स्क्रीनिंग कराई जा रही है। जरूरत पड़ने पर जांच के लिए उच्च केंद्र भेजा जाता है। अस्पताल में बारिश के बीच मरीजों को पर्चा बनवाने, जांच कराने और दवा लेने में भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
इन बीमारियों ने बढ़ाई चिंता
डॉ. राम प्रकाश का कहना है कि लगातार पसीना और गीले कपड़े पहनने से जांघों, अंदरूनी अंग व उंगलियों के बीच फंगल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। साथ ही अधिक पसीने से रोमछिद्र बंद होने पर लाल दाने, जलन और खुजली की समस्या बढ़ रही है। बादल छंटने के बाद तेज धूप निकलती है। ऐसे में धूप के संपर्क में आने से चेहरे, गर्दन और हाथों की त्वचा लाल पड़ने और जलन की शिकायत बढ़ी है।
चिकित्सकों के सुझाव
दोपहर 12 से तीन बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचें।
पसीना आने पर शरीर को साफ कर अच्छी तरह सुखाएं।
सूती, हल्के रंग के और ढीले कपड़े पहनें।
गीले कपड़े अधिक देर तक न पहनें।
पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें।
लाल चकत्ते, खुजली या संक्रमण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें।
मौसमी और रसदार फलों का सेवन करें।
कोट
मरीजों की समय से जांच और उपचार सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल में दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। मौसमी बुखार को लेकर चिकित्सकों को भी अलर्ट किया गया है।
-डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।