फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   Frightened, sat in the bus to Saharanpur... returned home with the help of strangers

Basti News: घबराहट में बैठ गए सहारनपुर की बस में... अजनबियों की मदद से घर लौटे

Mon, 03 Feb 2025 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 03 Feb 2025 12:18 AM IST
विज्ञापन
Frightened, sat in the bus to Saharanpur... returned home with the help of strangers
रोडवेज पर प्रयागराज जाने को तैयार बस
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

बस्ती। मंजिल करीब देख चेहरे पर खुशी का अलग भाव है। भगदड़-भीड़, चीख-चित्कार और भूख-प्यास का चार-पांच दिन से सामना करते-करते बदन थक-हारकर चूर हो गई है। धक्का-मुक्की के बीच अपने शहर पहुंचने के बाद जान में जान आ रही है। यह दृश्य है महाकुंभ से लौटने वाले श्रद्धालुओं की।
मौनी अमावस्या की रात संगम तट पर मची भगदड़ के बाद श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला अब भी जारी है। लगातार पांच दिन भटकने के बाद अपने शहर लौटे बुजुर्ग कौशल किशोर की आपबीती जो भी सुना आश्चर्य में पड़ जा रहा है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि 28 जनवरी की मध्यरात्रि के बाद महाकुंभ में भगदड़ का मंजर याद कर अब भी आंखों से आसू निकल आ रहे हैं।
साथ चल रहे गांव और परिवार के लोग कब कहां लापता हो गए, कुछ पता ही नहीं चला। चारों ओर भीड़ ही भीड़ थी। धक्का-मुक्की ऐसी थी कि एक रास्ते से दूसरे रास्ते पर श्रद्धालु पहुंच जा रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

कौशल किशोर ने बताया कि संगम तट और संगम नोज क्षेत्र में जो मौजूद था, वह फंस गए। अपनों का साथ झटके में छूटता गया। न जाने कितने लोग अपनों की तलाश में प्रयागराज में भटक रहे होंगे। बिछड़े हुए तमाम लोग प्रयागराज से कहीं दूर तक भी पहुंच गए हैं। उनके साथ भी ऐसा ही हुआ। भीड़ में हम अकेले हो गए। न जाने किस सड़क से किस गली से पैदली चलते चले गए। कितना चले कुछ याद नहीं है। अनुमान से 15 किमी से कम पैदल नहीं चले होंगे।
उन्होंने बताया कि एक जगह बस लगी हुई थी पुलिस वाले उसी में बैठा दिए। हम घबराए हुए थे, भीड़ से निकलने के चक्कर में सहारनपुर पहुंच गया। पता चलने पर वापस झांसी लौटे। वहां से किसी तरह रीवा, विंध्याचल होते हुए बलिया आए। रुपये भी खत्म हो गए थे। मोबाइल पास में नहीं था।
किसी व्यक्ति की मदद से तीन दिन बाद घर वालों से फोन पर बात हुई। ट्रेन पकड़ कर गोरखपुर आए, वहां परिवार के लोग पहले से माैजूद थे। अब बस्ती लेकर आ गए हैं।

प्रयागराज से लौटने वाले दीनानाथ की दास्तां भी इसी तरह की है। बताया कि उन्हें बनारस पहुंचा दिया गया। साधन-सवारी नहीं मिलने के कारण दो दिन वहीं हाईवे के पास रुकना पड़ा। माहौल शांत होने पर बस्ती पहुंच पाए। अब जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहता हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed