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Basti News: नए मास्टर प्लान में दूर हुई खामियां... शासन को भेजा गया महायोजना 2031 का प्रस्ताव

Sun, 26 Nov 2023 11:02 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sun, 26 Nov 2023 11:02 PM IST
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Flaws removed in the new master plan... Proposal for master plan 2031 sent to the government
बस्ती। महायोजना 2031 के प्रस्ताव को दुरुस्त करके फिर शासन को भेजा गया है। चार महीने के भीतर तीन बार यह प्रस्ताव टिप्पणी के साथ शासन ने लौटा दिया था। इस बार खामियों को दूर करने में दो महीने लग गए। नए मास्टर प्लान को विभिन्न विभागों की मदद से अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसमें विकसित एवं अविकसित क्षेत्र के संपूर्ण ब्योरे के साथ नियोजित शहर का खाका तैयार किया गया है। चौथी बार भेजे गए महायोजना 2031 के प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
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मई माह में सेटेलाइट इमेजनरी के आधार पर नगर पालिका समेत आसपास के 217 गांवों को शामिल कर महायोजना 2031 के लिए नया मास्टर प्लान तैयार किया गया था। मगर, इसमें विकसित एवं अविकसित क्षेत्रों का चिह्नांकन नहीं किया गया। इसके अलावा डूब क्षेत्र एवं ग्रीन जोन का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। शासन ने इन बिंदुओं पर टिप्पणी कर तीन बार महायोजना 2031 का प्रस्ताव लौटा दिया।
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इसके बाद बीडीए ने शासन की मंशा के अनुरूप नए सिरे से मास्टर प्लान तैयार कराया। नए मास्टर प्लान में तीन गुने से अधिक गांव शामिल किए गए हैं। महायोजना 2021 के लिए तैयार पहले मास्टर प्लान में 69 गांव तो महायोजना 2031 के लिए तैयार दूसरे मास्टर प्लान में 217 गांव और एक नगर पालिका क्षेत्र को शामिल किया गया है। इससे बीडीए का भौगोलिक दायरा भी तीन गुना बढ़ा है।
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नए मास्टर प्लान के मुताबिक बीडीए का क्षेत्रफल 51.12 वर्ग किमी से बढ़कर 150.76 वर्ग किमी हो गया है। पूर्व में शासन को भेजे गए मास्टर प्लान में तीन बिंदुओं पर खामियां सामने आईं थीं, जिन्हें दूर करने के लिए शासन ने निर्देशित किया था। शासन की मंशा के अनुरूप नए मास्टर प्लान में विभिन्न कटेगरी के विकसित एवं अविकसित क्षेत्र चिह्नित होने चाहिए। इसके अलावा ग्रीन जोन, भूमि का प्रकृति एवं डूब क्षेत्र स्पष्ट रूप गाटा संख्या के साथ अंकित होना चाहिए।

विभिन्न विभागों की मदद से हुआ सुधार
शासन के निर्देश के अनुरूप नए मास्टर प्लान में खामियों का सुधार विभिन्न विभागों की मदद से किया गया है। राजस्व विभाग के सहयोग से ग्रीन जोन का चिह्नांकन कराया गया। इसमें हाईवे, अन्य प्रमुख मार्गों एवं नदियों के किनारे दोनों तरफ 87 मीटर की दूरी तक ग्रीन बेल्ट की जमीनों का कुल क्षेत्रफल, रकबा के साथ गाटा संख्या के स्पष्ट विवरण अंकित है। इसके अलावा राजस्व अभिलेखों से मिलान कर प्राधिकरण क्षेत्र के तालाब, पोखरे, चकमार्ग, चारागाह आदि सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को भी पृथक रूप से दर्शाया गया है। वहीं सिंचाई विभाग की मदद से प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले डूब क्षेत्र भी चिह्नित किए गए हैं। इसमें ऐसे क्षेत्र शामिल है जो नदियों और जलाशयों के किनारे निचली सतह पर रचे बसे हैं। जहां बाढ़ आती है।

यह हैं डूब क्षेत्र
प्राधिकरण के दायरे में कुआनो नदी के किनारे के बड़ार, ऊंचीभीटी, भूअर निरंजनपुर, भूअर सराय, मिश्रौलिया, भैसहिया, भद्रेश्वरनाथ, चंदो, राजा चक समेत तीन दर्जन से अधिक गांव डूब क्षेत्र में आते हैं। इसके अलावा महदेव ताल, लैबुड़वा ताल, भेलखा ताल जैसे बड़े जलाशयों के आसपास की जमीनें भी बाढ़ प्रभावित हैं। जलभराव वाले इन्हीं क्षेत्रों के भूखंडों का चिह्नांकन नए मास्टर प्लान में किया गया है।
भूमि की प्रकृति का स्पष्ट उल्लेख होने से होंगे ये फायदे
नए मास्टर प्लान में विकसित एवं अविकसित क्षेत्र का मापदंड निर्धारित होने से बड़े फायदे हैं। इससे अनियोजित शहर के बसने पर काफी हद तक अंकुश लगेगा। अविकसित क्षेत्र में ग्रीन लैंड, ग्रीन बेल्ट, डूब क्षेत्र आदि भूमि के प्रकार हैं। इनका चिह्नांकन होने से इन जमीनों पर निर्माण का नक्शा नहीं पास हो सकेगा। आवेदन होते ही बीडीए को नए मास्टर प्लान से संबंधित भूखंड का मिलान करते ही भूमि की प्रकृति का तत्काल पता चल जाएगा।
35 प्रतिशत ग्रीन जोन में पहले से हुआ है निर्माण कार्य
बीडीए मानचित्र में चिह्नित ग्रीन जोन या पार्कों की जमीन पर 35 प्रतिशत निर्माण पहले से हो चुका है। इसकी मुख्य वजह यही रही कि पुराने मास्टर प्लान में इन जमीनों का स्पष्ट चिह्नांकन नहीं हुआ था, जिससे कुछ जगहों पर नक्शे भी पास कर दिए गए। प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 16 स्थान पार्क या ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित है। जिनका क्षेत्रफल 1096.54 हेक्टेयर है। सर्वे के दौरान पता चला कि इसमें से 35 प्रतिशत हिस्से में निर्माण हो चुका है।
गांवों में भी होगा बीडीए का दखल
महायोजना 2031 को शासन से स्वीकृति मिलने के बाद नगर पालिका क्षेत्र के अलावा बढ़े हुए दायरे में आने वाले 217 गांवों में बीडीए प्रभावी दखल शुरू हो जाएगा। गांव जैसे माहौल में रहने वाले लोग महानगर की तरह प्राधिकरण एक्ट के अधीन निर्माण कर सकेंगे। मनमाने ढंग से आवासीय एवं कामर्शियल निर्माण नहीं किया जा सकेगा। किसी भी तरह के निर्माण के लिए बीडीए से मानचित्र स्वीकृति कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा जमीनों की प्रकृति अनुकूल होने पर ही निर्माण किया जा सकेगा। डूब क्षेत्र या ग्रीन जोन की जमीन होगी तो नक्शा नहीं पास होगा।

नए मास्टर प्लान के लिए राजस्व एवं सिंचाई विभाग के सहयोग से तीनों बिंदुओं पर खामियां दूर कर ली गई हैं। डूब क्षेत्र, ग्रीन जोन को चिह्नित कर पूरे विवरण के साथ महायोजना 2031 का प्रस्ताव फिर से शासन को प्रेषित कर दिया गया है। उम्मीद है कि इस बार स्वीकृति मिल जाएगी।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए
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