{"_id":"638ce6c64f34b46eda71818d","slug":"five-lakhs-spent-on-pothole-relief-still-there-are-tremors-basti-news-gkp4597427142","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: गड्ढा मुक्ति पर खर्च हुए पांच लाख, फिर भी लग रहे झटके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: गड्ढा मुक्ति पर खर्च हुए पांच लाख, फिर भी लग रहे झटके
Mon, 05 Dec 2022 01:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 05 Dec 2022 01:25 PM IST
सार
शहर के मालवीय मार्ग, सिविल लाइंस, ब्लॉक रोड व स्टेशन रोड पर गड्ढे ही गड्ढे थे। इससे निजात के लिए नगर पालिका ने गड्ढा मुक्ति अभियान चलाया। सितंबर में चले अभियान के बाद हुई बारिश ने स्थिति जस की तस कर दी थी, इसके बाद अक्तूबर में एक बार फिर से इसे दुरुस्त कराया गया।
विज्ञापन
मालवीय रोड पर की नई पैचिंग।
- फोटो : BASTI
विस्तार
बस्ती शहर के मुख्य मार्गों की गड्ढा मुक्ति के लिए नगर पालिका ने करीब पांच लाख रुपये खर्च कर दिए, फिर भी राहगीरों को झटकों से निजात नहीं मिली। ऐसा इसलिए कि गड्ढा पटाने के बाद लेपन कार्य को जैसे-तैसे निपटा दिया गया है।
विज्ञापन
शहर के मालवीय मार्ग, सिविल लाइंस, ब्लॉक रोड व स्टेशन रोड पर गड्ढे ही गड्ढे थे। इससे निजात के लिए नगर पालिका ने गड्ढा मुक्ति अभियान चलाया। सितंबर में चले अभियान के बाद हुई बारिश ने स्थिति जस की तस कर दी थी, इसके बाद अक्तूबर में एक बार फिर से इसे दुरुस्त कराया गया।
विज्ञापन
इस पर करीब पांच लाख रुपये खर्च हुए, मगर लेपन कार्य ठीक से न होने के कारण गड्ढे तो भर गए, मगर सड़क उबड़-खाबड़ हो गई है। अब इस पर चलने वाले हिचकोले खाते हैं।
विज्ञापन
बोले राहगीर
- मालवीय रोड व स्टेशन रोड पर सर्वाधिक गड्ढे थे, जिस नगरपालिका ने पाट तो दिया, मगर अब भी हिचकोले खाना पड़ता है, क्योंकि इसका लेपन ठीक ढंग से नहीं हुआ है। -राकेश कुमार यादव, वाल्टरगंज
- गड्ढों के चलते कमर में दिक्कत आ गई थी। अब सड़क को पाट तो दिया गया, मगर अब भी बाइक चलाने में झटके लगते हैं। -राहुल चौधरी, ब्लॉक रोड
- जिन सड़कों को दुरुस्त कराया गया है, उसका नवीनीकरण होना है। पीडब्ल्यूडी को इन सड़कों को हस्तांतरित कर दिया गया है। इन सड़कों की दो तीन बार मरम्मत कराई गई, मगर बारिश के चलते गड्ढे बन गए थे। एक सप्ताह पहले फिर से पैचिंग करा दी गई है। यदि उबड़-खाबड़ निर्माण है तो उसे दुरुस्त करा दिया जाएगा। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी