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Basti News: 40 किसानों को मिला निशुल्क मत्स्य बीज, सीडीओ नहीं पहुंचे
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मानिकचंद। यूपी एग्रीस परियोजना के तहत शुक्रवार को सांऊघाट ब्लॉक के पड़िया गांव स्थित राप्ती मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र पर करीब 40 चयनित किसानों को निशुल्क मत्स्य बीज वितरित किया गया।
कार्यक्रम में सीडीओ सार्थक अग्रवाल को किसानों के बीच मत्स्य बीज वितरित करना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से वह नहीं पहुंच सके। इसके बाद परियोजना के अधिकारियों ने किसानों को मत्स्य बीज वितरित किया।
वितरण के दौरान किसानों को खेती के साथ मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और बागवानी जैसी गतिविधियां अपनाकर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। एग्रीस टीम ने एकीकृत कृषि मॉडल की जानकारी देते हुए मुर्गी पालन, मछली पालन, मेड़ पर बागवानी और काला नमक धान की उर्वरक रहित खेती के बारे में बताया। अधिकारियों ने कहा कि इन गतिविधियों को अपनाकर किसान अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकते हैं।
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नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि केंद्र पर रोहू, भाकुर और नैनी समेत विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के बीज तैयार किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि हैचरी से सालाना करीब 85 लाख रुपये की आय होती है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण कामकाज में परेशानी आ रही है। ऐसे में बाहर से मजदूर बुलाकर काम कराना पड़ता है।
जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार और उपप्रबंधक मत्स्य शिवाजी कन्नौजिया ने बताया कि एग्रीस योजना के तहत चयनित किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। मंडलस्तरीय कृषि विशेषज्ञ डॉ. नलिनचंद त्रिपाठी, मंडल बिजनेस हेड नरेंद्र पाल सिंह, किसान राजेश चौधरी, लक्ष्मण, राकेश, अहमद अली, रामकरन, सोनू, दिनेश कुमार और स्वामीनाथ मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में सीडीओ सार्थक अग्रवाल को किसानों के बीच मत्स्य बीज वितरित करना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से वह नहीं पहुंच सके। इसके बाद परियोजना के अधिकारियों ने किसानों को मत्स्य बीज वितरित किया।
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वितरण के दौरान किसानों को खेती के साथ मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और बागवानी जैसी गतिविधियां अपनाकर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। एग्रीस टीम ने एकीकृत कृषि मॉडल की जानकारी देते हुए मुर्गी पालन, मछली पालन, मेड़ पर बागवानी और काला नमक धान की उर्वरक रहित खेती के बारे में बताया। अधिकारियों ने कहा कि इन गतिविधियों को अपनाकर किसान अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकते हैं।
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नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि केंद्र पर रोहू, भाकुर और नैनी समेत विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के बीज तैयार किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि हैचरी से सालाना करीब 85 लाख रुपये की आय होती है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण कामकाज में परेशानी आ रही है। ऐसे में बाहर से मजदूर बुलाकर काम कराना पड़ता है।
जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार और उपप्रबंधक मत्स्य शिवाजी कन्नौजिया ने बताया कि एग्रीस योजना के तहत चयनित किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। मंडलस्तरीय कृषि विशेषज्ञ डॉ. नलिनचंद त्रिपाठी, मंडल बिजनेस हेड नरेंद्र पाल सिंह, किसान राजेश चौधरी, लक्ष्मण, राकेश, अहमद अली, रामकरन, सोनू, दिनेश कुमार और स्वामीनाथ मौजूद रहे।