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केंद्रीय वित्तमंत्री का पुतला जलाया
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Mon, 11 Jul 2016 11:17 PM IST
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कलेक्ट्रेट परिसर मे केंद्रीयवित्त मंत्री अरूण जेटली का पुतला फूंकते कर्मचारी नेता।
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सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने की मांग को लेकर प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर सोमवार को राज्य कर्मचारी महासंघ के नेतृत्व में राज्य कर्मचारियों, मजदूरों, श्रमिकों, संविदा संवर्ग के लोगों, सफाई कर्मियों ने जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली का पुतला फूंका।
इसके पूर्व शास्त्री चौक पर कर्मचारियों की सभा को संबोधित करते हुए आल इंडिया स्टेट इंप्लाई एसोसिएशन महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश चंद्र सिंह ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकारेें कर्मचारी संगठनों की न्यायिक आवाजों को कमजोर करना चाहती हैं इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। कहा कि केन्द्रीय कर्मचारियों की प्रस्तावित अनिश्चतकालीन हड़ताल को स्थगित किया जाना देश भर के 1 करोड़ कर्मचारियों के हितों के साथ कुठाराघात है। कहा कि न्यूनतम वेतन एवं फिटमेंट फार्मूला और पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली पर सरकार को अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना चाहिये। महासंघ आगामी विधानसभा चुनाव में भी इसे बड़ा मुद्दा बनायेगा।
महासंघ जिलाध्यक्ष सुनील कुमार पांडेय ने कहा कि अपना अधिकार हासिल करने के लिए केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों को एकजुट होना होगा, कर्मचारी आपस में बिखरे तो सबका नुकसान होगा। महामंत्री शिवशंकर कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार के ध्यानार्थ केन्द्रीय वित्त मंत्री का पुतला फूंका गया है। यदि सरकार ने विसंगतियों को दूर न किया तो महासंघ प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर हर स्तर पर अपने हक के लिये संघर्ष करेगा। महासंघ कार्यवाहक अध्यक्ष नरसिंह नारायण पांडेय ने कहा कि यदि कर्मचारी सचेत न हुये एक-एक कर उनके अधिकार छीने जाते रहेंगे। एकजुटता से ही समस्याओं का हल होगा।
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शास्त्री चौक पर हुई सभा को नरेन्द्रदेव मिश्र, विशाल कुमार, राम स्वारथ चौधरी, हेरम्ब नाथ त्रिपाठी, अतुल कुमार पांडेय, महेन्द्र चौहान, सोमईराम आजाद, परमात्मा प्रसाद, जयराम यादव, मधुर नारायण पाण्डेय आदि ने सम्बोधित करते हुए सातवे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने, संविदा कर्मियों व मानदेय कर्मचारियों को नियमित किये जाने आदि पर जोर दिया। सभा और वित्त मंत्री का पुतला फूंके जाने के दौरान के के त्रिपाठी, अशोक कुमार श्रीवास्तव, क्रान्ति सिंह, भवानीशंकर गिरी, विजय वर्मा, विक्रम सिंह, सुरेंद्र सिंह, मनोज कुमार, आशीष मिश्र, सुजीत कुमार, मनोज कुमार गौतम, गंगा प्रसाद, वेद प्रकाश, चन्द्रमणि, बनवारीलाल, प्रशान्त गुप्ता, राजेश चौधरी, पारस चौधरी, रामयज्ञ पाण्डेय, प्रदीप कुमार, असलम अंसारी, चंदू, रणविजय सिंह, मुकेश सिंह, जंग बहादुर, महेंद्रराव, भरतराम, अनिल, राजेश , राम बहादुर, अमीरूल्लाह, अश्विनी दूबे, उमा रमण त्रिपाठी, भरतलाल, लालमणि, रामदास, विनोद, राम सागर, नन्द मोहन, रमेश, राघव के साथ ही महासंघ और उससे संबद्ध अनेक संगठनों के पदाधिकारी, कर्मचारी नेता मौजूद रहे।
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इसके पूर्व शास्त्री चौक पर कर्मचारियों की सभा को संबोधित करते हुए आल इंडिया स्टेट इंप्लाई एसोसिएशन महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश चंद्र सिंह ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकारेें कर्मचारी संगठनों की न्यायिक आवाजों को कमजोर करना चाहती हैं इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। कहा कि केन्द्रीय कर्मचारियों की प्रस्तावित अनिश्चतकालीन हड़ताल को स्थगित किया जाना देश भर के 1 करोड़ कर्मचारियों के हितों के साथ कुठाराघात है। कहा कि न्यूनतम वेतन एवं फिटमेंट फार्मूला और पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली पर सरकार को अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना चाहिये। महासंघ आगामी विधानसभा चुनाव में भी इसे बड़ा मुद्दा बनायेगा।
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महासंघ जिलाध्यक्ष सुनील कुमार पांडेय ने कहा कि अपना अधिकार हासिल करने के लिए केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों को एकजुट होना होगा, कर्मचारी आपस में बिखरे तो सबका नुकसान होगा। महामंत्री शिवशंकर कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार के ध्यानार्थ केन्द्रीय वित्त मंत्री का पुतला फूंका गया है। यदि सरकार ने विसंगतियों को दूर न किया तो महासंघ प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर हर स्तर पर अपने हक के लिये संघर्ष करेगा। महासंघ कार्यवाहक अध्यक्ष नरसिंह नारायण पांडेय ने कहा कि यदि कर्मचारी सचेत न हुये एक-एक कर उनके अधिकार छीने जाते रहेंगे। एकजुटता से ही समस्याओं का हल होगा।
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शास्त्री चौक पर हुई सभा को नरेन्द्रदेव मिश्र, विशाल कुमार, राम स्वारथ चौधरी, हेरम्ब नाथ त्रिपाठी, अतुल कुमार पांडेय, महेन्द्र चौहान, सोमईराम आजाद, परमात्मा प्रसाद, जयराम यादव, मधुर नारायण पाण्डेय आदि ने सम्बोधित करते हुए सातवे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने, संविदा कर्मियों व मानदेय कर्मचारियों को नियमित किये जाने आदि पर जोर दिया। सभा और वित्त मंत्री का पुतला फूंके जाने के दौरान के के त्रिपाठी, अशोक कुमार श्रीवास्तव, क्रान्ति सिंह, भवानीशंकर गिरी, विजय वर्मा, विक्रम सिंह, सुरेंद्र सिंह, मनोज कुमार, आशीष मिश्र, सुजीत कुमार, मनोज कुमार गौतम, गंगा प्रसाद, वेद प्रकाश, चन्द्रमणि, बनवारीलाल, प्रशान्त गुप्ता, राजेश चौधरी, पारस चौधरी, रामयज्ञ पाण्डेय, प्रदीप कुमार, असलम अंसारी, चंदू, रणविजय सिंह, मुकेश सिंह, जंग बहादुर, महेंद्रराव, भरतराम, अनिल, राजेश , राम बहादुर, अमीरूल्लाह, अश्विनी दूबे, उमा रमण त्रिपाठी, भरतलाल, लालमणि, रामदास, विनोद, राम सागर, नन्द मोहन, रमेश, राघव के साथ ही महासंघ और उससे संबद्ध अनेक संगठनों के पदाधिकारी, कर्मचारी नेता मौजूद रहे।