{"_id":"6106e5088ebc3e840e0e7930","slug":"female-constable-will-also-become-beat-police-officer-basti-news-gkp4040624160","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला आरक्षी भी बनेंगी बीट पुलिस ऑफिसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला आरक्षी भी बनेंगी बीट पुलिस ऑफिसर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महिला आरक्षी भी बनेंगी बीट पुलिस ऑफिसर
बस्ती। मिशन शक्ति के तीसरे चरण में महिलाओं के सशक्तिकरण की नई पहल की गई है। अब बीट व्यवस्था में महिला आरक्षियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। पुरुषों की तरह महिला आरक्षियों को बीट इंचार्ज बनाने को कहा गया है।
जनपद समेत पूरे सूबे में बीट पुलिस ऑफिसर यानी बीपीओ फार्मूला लागू किया जा रहा है। हालांकि इसकी पहल काफी पहले हो चुकी है, लेकिन पिछले महीने इनका बैनर लांच करने के बाद तेजी आई है। जिले के 16 थानों में 480 से अधिक बीपीओ तैनात किए जा चुके हैं। अब तक पुरुष आरक्षियों को यह जिम्मेदारी दी गई थी, मगर शासन स्तर से महिला आरक्षियों को इसमें जोड़ा जाएगा। इसके पीछे मकसद है कि महिला संबंधी समस्याओं का निदान महिला आरक्षी ही करें। मिशन शक्ति के तहत यह पहल की जा रही है जिसमें पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न आदि के मामलों के निस्तारण में वे मुख्य भूमिका निभा सकें। सबसे पहले शहर में यह सिस्टम लागू किया जाएगा। एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि शासन की मंशा के मुताबिक उसका अनुपालन कराया जाएगा।
क्या है मकसद
पुलिस का आम जनमानस के साथ समन्वय घटता जा रहा है। इससे निपटने के लिए थानों में बीट अफसर की तैनाती का प्रयोग किया जा रहा है। इसके तहत अब सप्ताह में दो से ज्यादा बार बीट पुलिस अधिकारी लोगों के बीच जाकर उनसे संवाद करेंगे। बीट पुलिस अफसर आम लोगों की समस्याओं को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का एक सरल माध्यम बनेंगे। आम लोगों से संपर्क रखने के साथ अधिकारियों की बीट बुक में अपराधियों का पूरा ब्योरा भी होगा। बीट पर काम करने वाले मुख्य आरक्षी और आरक्षी बीट पुलिस अधिकारी कहलाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती। मिशन शक्ति के तीसरे चरण में महिलाओं के सशक्तिकरण की नई पहल की गई है। अब बीट व्यवस्था में महिला आरक्षियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। पुरुषों की तरह महिला आरक्षियों को बीट इंचार्ज बनाने को कहा गया है।
जनपद समेत पूरे सूबे में बीट पुलिस ऑफिसर यानी बीपीओ फार्मूला लागू किया जा रहा है। हालांकि इसकी पहल काफी पहले हो चुकी है, लेकिन पिछले महीने इनका बैनर लांच करने के बाद तेजी आई है। जिले के 16 थानों में 480 से अधिक बीपीओ तैनात किए जा चुके हैं। अब तक पुरुष आरक्षियों को यह जिम्मेदारी दी गई थी, मगर शासन स्तर से महिला आरक्षियों को इसमें जोड़ा जाएगा। इसके पीछे मकसद है कि महिला संबंधी समस्याओं का निदान महिला आरक्षी ही करें। मिशन शक्ति के तहत यह पहल की जा रही है जिसमें पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न आदि के मामलों के निस्तारण में वे मुख्य भूमिका निभा सकें। सबसे पहले शहर में यह सिस्टम लागू किया जाएगा। एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि शासन की मंशा के मुताबिक उसका अनुपालन कराया जाएगा।
विज्ञापन
क्या है मकसद
पुलिस का आम जनमानस के साथ समन्वय घटता जा रहा है। इससे निपटने के लिए थानों में बीट अफसर की तैनाती का प्रयोग किया जा रहा है। इसके तहत अब सप्ताह में दो से ज्यादा बार बीट पुलिस अधिकारी लोगों के बीच जाकर उनसे संवाद करेंगे। बीट पुलिस अफसर आम लोगों की समस्याओं को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का एक सरल माध्यम बनेंगे। आम लोगों से संपर्क रखने के साथ अधिकारियों की बीट बुक में अपराधियों का पूरा ब्योरा भी होगा। बीट पर काम करने वाले मुख्य आरक्षी और आरक्षी बीट पुलिस अधिकारी कहलाएंगे।
विज्ञापन