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किसानों को उत्पाद के दाम तय करने की छूट मिले
अमर उजाला/बस्ती
Updated Sun, 28 Feb 2016 11:30 PM IST
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रविवार को आयोजित हुआ। इसमेें वक्ताओं ने किसानाें के आर्थिक पिछड़ेपन के
लिए सरकारों के मूल्य निर्धारण की दोहरी नीतियों में बदलाव की नसीहत दी।
इस दौरान प्रदेश संगठन मंत्री मानवेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि प्रधान देश होते हुए भी हमारे देश में किसानाें की आर्थिक दशा सुदृढ़ नहीं हो पाई है। सरकारें हर वर्ष संसद में बजट पेश करती हैं मगर इसमें ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी क्षेत्राें को ज्यादा तव्वजो दी जाती है।
किसानाें के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण है सरकाराें की दोहरी नीति। वर्तमान में इसमें बदलाव लाने की जरूरत है। किसानों को अपने उत्पाद के दाम तय करने की छूट मिलनी चाहिए।
प्रदेश संयोजक सतीश सचान ने किसानों की दयनीय दशा पर चिंता जताते हुए कहा कि लगातार हो नुकसान से किसान आत्म हत्या जैसे कदम उठाने को विवश हैं।
उन्हाेंने किसानाें के फसलों का बीमा निर्धारित प्रीमियम के बजाय सरकारी मद से करने की वकालत की। कहा जिस दिन किसान खेतों मे बीज की बुआई कर दे उसी दिन से स्वत: ही बीमा हो जाना चाहिए। दैवीय आपदा सहित अन्य किसी भी प्रकार से हुई क्षति का आकलन कराकर बीमित राशि किसानों के खातों में जमा कराई जाए। इस दौरान आत्मा प्रसाद पाठक ने भी विचार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नल केसी मिश्रा ने किया। इस मौके पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दया शंकर मिश्रा, डा.राम नरेश सिंह मंजुल, राजेश कुमार द्विवेदी, अजय सिंह, प्रदीप पांडेय, दिनेश मिश्रा, अतुल तिवारी, प्रत्यूष विक्रम सिंह, ध्रुव नरायन सिंह, यादवेंद्र सिंह, मालिकराम, राजमणि आदि मौजूद रहे।
इस दौरान प्रदेश संगठन मंत्री मानवेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि प्रधान देश होते हुए भी हमारे देश में किसानाें की आर्थिक दशा सुदृढ़ नहीं हो पाई है। सरकारें हर वर्ष संसद में बजट पेश करती हैं मगर इसमें ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी क्षेत्राें को ज्यादा तव्वजो दी जाती है।
किसानाें के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण है सरकाराें की दोहरी नीति। वर्तमान में इसमें बदलाव लाने की जरूरत है। किसानों को अपने उत्पाद के दाम तय करने की छूट मिलनी चाहिए।
प्रदेश संयोजक सतीश सचान ने किसानों की दयनीय दशा पर चिंता जताते हुए कहा कि लगातार हो नुकसान से किसान आत्म हत्या जैसे कदम उठाने को विवश हैं।
उन्हाेंने किसानाें के फसलों का बीमा निर्धारित प्रीमियम के बजाय सरकारी मद से करने की वकालत की। कहा जिस दिन किसान खेतों मे बीज की बुआई कर दे उसी दिन से स्वत: ही बीमा हो जाना चाहिए। दैवीय आपदा सहित अन्य किसी भी प्रकार से हुई क्षति का आकलन कराकर बीमित राशि किसानों के खातों में जमा कराई जाए। इस दौरान आत्मा प्रसाद पाठक ने भी विचार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नल केसी मिश्रा ने किया। इस मौके पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दया शंकर मिश्रा, डा.राम नरेश सिंह मंजुल, राजेश कुमार द्विवेदी, अजय सिंह, प्रदीप पांडेय, दिनेश मिश्रा, अतुल तिवारी, प्रत्यूष विक्रम सिंह, ध्रुव नरायन सिंह, यादवेंद्र सिंह, मालिकराम, राजमणि आदि मौजूद रहे।