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Basti News: परिवार को हत्या का संदेह पुलिस अभी तक खाली हाथ
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मृतक दरोगा अजय गौड़ की फाइल फोटो।
बस्ती। परशुरामपुर थाने में तैनात दरोगा अजय गौड़ की मौत का रहस्य अभी बरकरार है। दरोगा के एडीएम भाई अरुण कुमार और पत्नी रंजीता समेत अन्य परिजन घटना के पीछे उनकी हत्या की गहरी साजिश बता रहे हैं तो पुलिस अभी इसका कोई ठोस साक्ष्य न मिलने की बात कर रही है। सप्ताह भर बाद भी मामला हत्या और खुदकुशी में उलझा हुआ है। हालांकि पुलिस का दावा यह भी है सच्चाई बहुत जल्द साक्ष्य के साथ सामने आ जाएगी।
बृहस्पतिवार को भी पुलिस की कई टीमें बस्ती से अयोध्या तक दरोगा की मौत के रहस्य को सुलझाने में माथापच्ची कर रही है, मगर अभी कुछ खास सफलता हाथ नहीं लग सका है। पुलिस दो बिंदुओं पर सक्रियता से काम कर रही है। पहला अयोध्या सरयू पुल से दरोगा की बाइक वापस लाने वाले शख्स की तलाश की जा रही है। दूसरा यह कि दरोगा की मोबाइल किसके हाथ लगी है। पुलिस को पहले आशंका थी कि दरोगा का मोबाइल नदी में होगा। दो दिन तक सरयू में छानबीन भी की गई लेकिन मोबाइल फोन नहीं मिला।
इधर, सुराग लगा कि दरोगा का मोबाइल किसी के हाथ लगा है। पुलिस मोबाइल रखने वाले व्यक्ति तक पहुंचने का तानाबाना बुन रही है। अंदरखाने की खबर है कि बहुत जल्द मोबाइल बरामद हो सकता है। वहीं महकमे के जिम्मेदार फिलहाल इसे हत्या से जुड़ा मामला नहीं मान रहे हैं। उनकी जांच की सुई घूमकर दरोगा के खुदकुशी पर ही पहुंच रही है। हालांकि, अधिकारी अभी खुलकर बोल नहीं रहे हैं। वहीं परिवार के सदस्य उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
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डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर विशेष ध्यान : दरोगा कांड के खुलासे के लिए पुलिस ज्यादा ध्यान डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर दे रही है। इसीलिए बस्ती अमहट क्षेत्र से लेकर अयोध्या तक डेढ़ सौ से अधिक कैमरे खंगाले जा चुके हैं। सीसीटीवी फुटेज में दरोगा को अयोध्या की तरफ सरयू पुल से दो मीटर पहले तक देखा जा चुका है। पुलिस का कयास है कि वह सरयू पुल अपनी बाइक से पार भी किए गए हैं। अयोध्या की तरफ मुड़ने वाले सर्विस मार्ग से पहले अवैध कट से उनकी बाइक बस्ती लाई गई है। इसका भी डिजिटल साक्ष्य पुलिस के पास उपलब्ध हो चुका है।
लेकिन, सीसीटीवी फुटेज में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि बाइक चलाने वाला शख्स कौन है। उसकी पहचान करने के लिए पुलिस जुटी हुई है। इसके अलावा पुलिस को पोस्टमार्टम के बाद सुरक्षित किए गए विसरा के डायटम टेस्ट के रिपोर्ट मिलने का बेसब्री से इंतजार है। इससे यह स्पष्ट होगा कि दरोगा की मौत नदी में डूबने से हुई हैं या हत्या करके उनकी लाश फेंकी गई है।
ये है मामला : परशुरामपुर थाने में तैनात दरोगा अजय गौड़ प्रभारी थानाध्यक्ष रहते हुए पांच फरवरी की शाम करीब 4 बजे अचानक लापता हो गए। बस्ती में किराये के मकान में बच्चे के साथ रह रहीं उनकी पत्नी रंजीता का कहना है कि दिन 3 बजे उनकी अपने दरोगा पति से बात हुई थी। रात आठ बजे फोन मिलाने पर स्वीच ऑफ हो गया। अगले दिन सुबह भी उनकी मोबाइल स्वीच ऑफ था। तब उन्होंने थाने के एक सिपाही को फोन मिलाया तो जानकारी मिली वह लापता हैं। रंजीता ने बताया कि दिनभर खोजबीन करने के बाद शाम को तहरीर दी और दरोगा के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई। दूसरे दिन दरोगा की पल्सर बाइक एसपी आवास के निकट अमहट घाट से लावारिस हाल में बरामद हुई। जबकि चौथे दिन दरोगा की लाश 60 किमी दूर अयोध्या सीमा क्षेत्र से सटे छावनी थाना क्षेत्र के बस्ती सीमा में सरयू नदी में उतराया मिला।
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बृहस्पतिवार को भी पुलिस की कई टीमें बस्ती से अयोध्या तक दरोगा की मौत के रहस्य को सुलझाने में माथापच्ची कर रही है, मगर अभी कुछ खास सफलता हाथ नहीं लग सका है। पुलिस दो बिंदुओं पर सक्रियता से काम कर रही है। पहला अयोध्या सरयू पुल से दरोगा की बाइक वापस लाने वाले शख्स की तलाश की जा रही है। दूसरा यह कि दरोगा की मोबाइल किसके हाथ लगी है। पुलिस को पहले आशंका थी कि दरोगा का मोबाइल नदी में होगा। दो दिन तक सरयू में छानबीन भी की गई लेकिन मोबाइल फोन नहीं मिला।
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इधर, सुराग लगा कि दरोगा का मोबाइल किसी के हाथ लगा है। पुलिस मोबाइल रखने वाले व्यक्ति तक पहुंचने का तानाबाना बुन रही है। अंदरखाने की खबर है कि बहुत जल्द मोबाइल बरामद हो सकता है। वहीं महकमे के जिम्मेदार फिलहाल इसे हत्या से जुड़ा मामला नहीं मान रहे हैं। उनकी जांच की सुई घूमकर दरोगा के खुदकुशी पर ही पहुंच रही है। हालांकि, अधिकारी अभी खुलकर बोल नहीं रहे हैं। वहीं परिवार के सदस्य उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
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डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर विशेष ध्यान : दरोगा कांड के खुलासे के लिए पुलिस ज्यादा ध्यान डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर दे रही है। इसीलिए बस्ती अमहट क्षेत्र से लेकर अयोध्या तक डेढ़ सौ से अधिक कैमरे खंगाले जा चुके हैं। सीसीटीवी फुटेज में दरोगा को अयोध्या की तरफ सरयू पुल से दो मीटर पहले तक देखा जा चुका है। पुलिस का कयास है कि वह सरयू पुल अपनी बाइक से पार भी किए गए हैं। अयोध्या की तरफ मुड़ने वाले सर्विस मार्ग से पहले अवैध कट से उनकी बाइक बस्ती लाई गई है। इसका भी डिजिटल साक्ष्य पुलिस के पास उपलब्ध हो चुका है।
लेकिन, सीसीटीवी फुटेज में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि बाइक चलाने वाला शख्स कौन है। उसकी पहचान करने के लिए पुलिस जुटी हुई है। इसके अलावा पुलिस को पोस्टमार्टम के बाद सुरक्षित किए गए विसरा के डायटम टेस्ट के रिपोर्ट मिलने का बेसब्री से इंतजार है। इससे यह स्पष्ट होगा कि दरोगा की मौत नदी में डूबने से हुई हैं या हत्या करके उनकी लाश फेंकी गई है।
ये है मामला : परशुरामपुर थाने में तैनात दरोगा अजय गौड़ प्रभारी थानाध्यक्ष रहते हुए पांच फरवरी की शाम करीब 4 बजे अचानक लापता हो गए। बस्ती में किराये के मकान में बच्चे के साथ रह रहीं उनकी पत्नी रंजीता का कहना है कि दिन 3 बजे उनकी अपने दरोगा पति से बात हुई थी। रात आठ बजे फोन मिलाने पर स्वीच ऑफ हो गया। अगले दिन सुबह भी उनकी मोबाइल स्वीच ऑफ था। तब उन्होंने थाने के एक सिपाही को फोन मिलाया तो जानकारी मिली वह लापता हैं। रंजीता ने बताया कि दिनभर खोजबीन करने के बाद शाम को तहरीर दी और दरोगा के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई। दूसरे दिन दरोगा की पल्सर बाइक एसपी आवास के निकट अमहट घाट से लावारिस हाल में बरामद हुई। जबकि चौथे दिन दरोगा की लाश 60 किमी दूर अयोध्या सीमा क्षेत्र से सटे छावनी थाना क्षेत्र के बस्ती सीमा में सरयू नदी में उतराया मिला।