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फर्जी पैरा मेडिकल कालेज प्रकरण: एसआईटी के निशाने पर गाजियाबाद का फर्जी शिक्षक

Tue, 10 Oct 2023 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 10 Oct 2023 12:22 AM IST
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Fake Para Medical College Case: Fake teacher of Ghaziabad on target of SIT
बस्ती। फर्जी पैरा मेडिकल कालेज माफियाओं की एसआईटी जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसके तार गाजियाबाद, झांसी, जालौन, सहारनपुर से लेकर मध्य प्रदेश तक जुड़ रहे हैं। फिलहाल गाजियाबाद के एक फर्जी शिक्षक को पुलिस गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। जो गिरफ्तार किए गए मास्टरमाइंड कृष्ण कुमार चौधरी से फर्जी मार्कशीट लेकर अपने से संबंधित छात्रों को मुहैया कराता था।
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मामले की तफ्तीश कर रही एसआईटी को मास्टरमाइंड की मोबाइल का रिकार्ड खंगाला तो कई लोगों ने नाम ऐसे सामने आए जो इस केस से जुड़े तो हैं लेकिन उनका नाम सामने नहीं आया था। इसमें सबसे प्रमुख नाम गाजियाबाद के एक शिक्षक का है। एसआईटी के इंस्पेक्टर संजय कुमार के अनुसार उससे संपर्क किया गया तो उसने खुद को शिक्षक बताया। मगर उसके बारे में गहराई से छानबीन की गई तो बता चला कि वह फर्जी शिक्षक है। फिलहाल वह भूमिगत बताया जा रहा है। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें लगी हुई हैं।
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इससे पहले शुक्रवार को इस घोटाले के आरोपियों पर दर्ज केस में आपराधिक साजिश यानी 120 बी आईपीसी की धारा बढ़ाई गई थी। आईजी आरके भारद्वाज का कहना है कि पहले की धाराओं में सबकी अलग अलग भूमिका पाई गई थी जबकि इस पूरे खेल में सबने साथ मिलकर छात्रों के साथ साजिश के तहत धोखाधड़ी की। इसलिए 120 बी की धारा के तहत सबको एक साथ जोड़कर विवेचना आगे बढ़ाने में सहूलियत हाेगी।
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इस मामले में फर्जी मेडिकल कालेज संचालकों पर कोतवाली और कप्तानगंज थाने में अलग-अलग चार केस दर्ज किए गए हैं। अलग-अलग छात्रों की तहरीर पर जाली दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, धमकी आदि के आरोप लगाए गए हैं। इसमें कोतवाली पुलिस ने अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

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यह है मामला

- 14 सितंबर को बी-फार्मा, डी-फार्मा के बच्चों व अभिभावकों ने आईजी से मिलकर अपनी समस्याओं को रखा। जिसे गंभीरता से लेते हुए आईजी ने एसआईटी के गठन का आदेश जारी किया। एसआईटी टीम को अलग-अलग थानों में दर्ज चारों केस की तफ्तीश करके जल्द से जल्द निस्तारण का निर्देश दिया गया। क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संजय कुमार को विवेचक और सीओ आलोक प्रसाद को पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया। एसआईटी के गठन के बाद केस में काफी तेजी आई। पिछले हफ्ते कप्तानगंज में दो फर्जी कालेज चलाने वाले मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और उसके ठिकानों से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। तभी से इस प्रकरण में नए-नए खुलासे हो रहे हैं।

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इस तरह खुला मामला

- कोतवाली क्षेत्र में सरदार पटेल हॉस्पिटल एंड पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट में कोर्स कर रहे 500 से अधिक छात्र छात्राओं ने डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। साथ में कोतवाली में तहरीर दी कि कोतवाली क्षेत्र में हर्दिया चौराहे के पास स्थित सरदार पटेल हॉस्पिटल एंड पैरामेडिकल कॉलेज में 2018 में उन लोगों ने दाखिला लिया था। तीन साल पढ़ने के बाद फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर की मार्कशीट नहीं दी गई। छात्रावास से निकलने के कुछ महीने बाद सभी बच्चे अपना पैसा वापस मांगने लगे। तब दाखिला देने वालों ने टाइम मांगा। इसके बाद बिना पूछे उनका दाखिला आगरा के किसी कॉलेज में करवा दिया, लेकिन वहां भी फीस जमा नहीं की गई। इस पर कहा गया कि फीस जमा करिए नहीं तो आप कहीं भी दो साल दाखिला नहीं ले पाएंगे। कॉलेज में दाखिला लेने वाली छात्राओं ने बताया कि उन्हें झांसा दिया गया कि आंध्र प्रदेश के किसी यूनिवर्सिटी में आप लोगों का एडमिशन करवाया जाएगा। इस आधार पर सभी से फीस के नाम पर एक से डेढ़ लाख वसूले गए, मगर फीस जमा नहीं की गई। कुछ छात्रों को डिग्री दी गई तो वह भी फर्जी निकली। वहीं एक छात्र को तो एक ही कोर्स की दो अलग अलग इंस्टीट्यूट की फर्जी डिग्री दे दी गईं। जिन क्लास में उन्हें पढ़ाया जाता रहा वह भी फर्जी निकले, और तो और जो टीचर बनकर पढ़ाने आते थे वह भी फर्जी निकले। पुलिस ने केस दर्ज किया। बाद में कप्तानगंज में भी इसी तरह का कालेज चलाए जाने की जानकारी हुई। वहां के छात्रों ने कप्तानगंज थाने में तहरीर दी।




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जालसाज ने भी दर्ज करा दिया था केस



- कोतवाली में दर्ज केस में अपने ऊपर शिकंजा कसते देख मास्टरमाइंड कृष्ण कुमार चौधरी ने भी दांव खेला था। जिसमें उसने कुछ लोगों पर धोखाधड़ी करके अपने कालेज के छात्रों का नामांकन कराने का केस दर्ज करा दिया। आरोप लगाया कि लालगंज थानाक्षेत्र के रक्सा निवासी राम आशीष यादव, विनोद कुमार यादव निवासी बरेली और स्वतंत्र श्रीवास्तव निवासी उरई जालौन ने उन्हें डी. फार्मा, एएनएम व जीएनएम कोर्स की मान्यता दिलाने का झांसा दिया। विश्वास दिलाने के लिए उन लोगों ने कई शिक्षण संस्थाओं का ऑनलाइन व ऑफलाइन ब्योरा दिखाया। इसके बाद छात्र-छात्राओं का प्रवेश कराने के लिए तीनों अपने खाते के अलावा अन्य खाते में करीब 38 लाख रुपये जमा करा लिया। पूछने पर उन लोगों ने बताया कि छात्रों का एडमिशन ओम साई कॉलेज ऑफ फार्मेसी उड़ीसा, जयपुरी कॉलेज ऑफ फार्मेसी उड़ीसा के अलावा भवानी पटना कॉलेज ऑफ साइंस उड़ीसा में करा दिया गया है। बाद में पता चला कि कृष्ण कुमार खुद जालसाजों के गिरोह का एक अंग है।
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