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Basti News: नाबालिग को थाने में रोकने पर थानाध्यक्ष और बाल कल्याण अधिकारी से मांगा स्पष्टीकरण

Sat, 12 Sep 2026 02:09 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 02:09 AM IST
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Explanation sought from SHO and Child Welfare Officer for detaining a minor at the police station
बस्ती। सोनहा थाना पुलिस की ओर से एक नाबालिग बालिका को बरामद करने के बाद नियमानुसार न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बालिका को एक दिन और रात थाना परिसर में रखने के बाद सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायपीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने सोनहा थानाध्यक्ष और थाना बाल कल्याण अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। दोनों को 14 सितंबर तक जवाब देने का समय दिया गया है।
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बताया गया कि सोनहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के घर से गायब होने की सूचना पुलिस को दी थी। इस संबंध में सोनहा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बालिका को बरामद कर लिया।
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नियमानुसार बालिका को बरामद करने के बाद सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत कर मेडिकल समेत अन्य आवश्यक कार्रवाई की जानी थी। आरोप है कि पुलिस ने बालिका को सात सितंबर को दिन और रात थाने में रखा और आठ सितंबर को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया। सीडब्ल्यूसी के समक्ष काउंसलिंग के दौरान बालिका ने बताया कि वह पिछले दिन से ही थाने में थी। बालिका ने इस संबंध में न्यायपीठ को लिखित शिकायत भी दी।
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बाल हित और अधिनियम के विपरीत मानते हुए मांगा जवाब
बालिका को थाने में रोके जाने की जानकारी के बाद न्यायपीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव और मंजू त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लिया। न्यायपीठ ने इसे बाल हित और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के विपरीत मानते हुए थानाध्यक्ष और थाना बाल कल्याण अधिकारी को पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायपीठ ने दोनों अधिकारियों से 14 सितंबर तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। जवाब मिलने के बाद मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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