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UP: जाम-अतिक्रमण और गंदगी से खो रही गोरखपुर के सराफा बाजार की चमक, महिलाएं आने लगीं कतराने

Sun, 07 Jun 2026 10:33 AM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Sun, 07 Jun 2026 10:33 AM IST
सार

अमर उजाला की टीम शुक्रवार को स्थानीय बाजार में संवाद के लिए पहुंची थी। इस दौरान दुकानदारों और आसपास रहने वालों की पीड़ा सामने आई। सराफा व्यापारियों ने बताया कि बाजार में सार्वजनिक शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसका सबसे अधिक असर महिला ग्राहकों पर पड़ रहा है। महिलाओं ने धीरे-धीरे बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे खरीदारी प्रभावित हो रही है।

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Encroachment, traffic jams and filth have taken away the shine of Gorakhpur's Hindi market
सराफा पदाधिकारियों संग व्यापारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जाम-अतिक्रमण-गंदगी के साथ-साथ उपेक्षा का शिकार सराफा बाजार अपनी चमक खोता जा रहा है। बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच व्यापार करने को मजबूर सराफा कारोबारियों की पीड़ा है कि उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। नगर आयुक्त से मिलने का समय नहीं मिल पा रहा है, ग्राहक बाजार में आने से कतरा रहे हैं।
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वे कहते हैं कि सुलभ शौचालय जैसी कोई व्यवस्था न होने से पुरुषों को दिक्कत हो रही है, महिलाओं की परेशानी तो इससे कहीं ज्यादा बड़ी है। शौचालय न होने से महिलाएं बाजार में आने से कतराती हैं।
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संवाद की श्रृंखला के तहत अमर उजाला की टीम शुक्रवार को स्थानीय बाजार में संवाद के लिए पहुंची थी। इस दौरान दुकानदारों और आसपास रहने वालों की पीड़ा सामने आई। सराफा व्यापारियों ने बताया कि बाजार में सार्वजनिक शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसका सबसे अधिक असर महिला ग्राहकों पर पड़ रहा है।

महिलाओं ने धीरे-धीरे बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे खरीदारी प्रभावित हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि कई ग्राहक शौचालय और पार्किंग जैसी सुविधाएं नहीं मिलने के कारण दूसरे बाजारों का रुख कर रहे हैं।
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बाजार की छवि खराब हो रही
संदीप वर्मा ने बताया कि बाजार की सड़क चौड़ी होने के बावजूद सड़कों पर अतिक्रमण और दिनभर लगने वाला जाम भी बड़ी समस्या है। विजय कुमार वर्मा, मनोज कुमार व हरभजन सिंह ने बताया कि जगह-जगह फैली गंदगी से बाजार की छवि खराब हो रही है। स्थिति यह है कि संभ्रांत परिवारों के लोग बाजार आने के बजाय अब होम डिलीवरी की मांग करने लगे हैं या फिर बाजार आना ही छोड़ दे रहे हैं।
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व्यापारियों में गुस्सा भी, दर्द भी
राजेश वर्मा ने कहा, हम सब टैक्स तो दे रहे लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। बैठकें होती हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं होता है। आग लग जाए तो भागने की जगह नहीं है। नालियां पुरानी हैं, चोक पड़ी हैं।
रंजीत वर्मा ने कहा कि सड़कों पर पेड़ पानी बिना सूख गए हैं। रोड चौड़ा है पर अतिक्रमण है।

रवि वर्मा, संजय बरनवाल व वशिष्ठ प्रसाद वर्मा ने कहा कि अलहदादपुर से छात्रसंघ चौराहे तक 500 मीटर तक जाम रहता है। अतिक्रमण हटना चाहिए। दीपक वर्मा ने कहा गलियों में वाहन सड़क पर खड़े रहते हैं। व्यापार प्रभावित होता है। व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर यहां एक पुलिस चौकी होनी चाहिए।

अध्यक्ष ने कहा- नगर निगम की लापरवाही
हिंदी बाजार, घंटाघर में महिला व पुरुष यूरिनल नहीं हैं। महिला संरक्षण गृह के पास बनाया गया था जो टूट चुका है। बंधू सिंह कॉम्लेक्स बनाया गया है लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण इसकी पार्किंग अभी तक शुरू नहीं हुई। इससे व्यापारियों का नुकसान हो रहा है: गणेश वर्मा, अध्यक्ष, सराफा मंडल

बिजली के तारों का मकड़जाल
व्यावसायिक भवन में लगभग 40 दुकानें आवंटित हुई हैं। काफी प्रयास के बाद तो यहां लाइट लगाई गई। हरबंश गली व चौधरी गली में सफाई नहीं है, बिजली के तार भी नीचे लटक रहे हैं। बंधू सिंह कॉम्पलेक्स के पास सड़क पर ट्रांसफार्मर है जो हटना चाहिए। स्मार्ट मीटर से बिजली बिल ज्यादा आ रहा है। इसमें संशोधन करना चाहिए: हरिद्वार वर्मा, महामंत्री, सराफा मंडल

आग लग जाए तो सुरक्षा के इंतजाम नहीं
संकरी गलियों में बिजली के तार से परेशानी होती है। गंदगी बहुत है, ग्राहक आना नहीं पसंद करते हैं। जहां पार्किंग होना चाहिए, वहां दुकानें हैं। अगर अचानक आग लगती है तो वहां सुरक्षा नहीं है:गोपाल वर्मा, व्यापारी, घंटाघर

बाजार का आकार: एक नजर
2000 दुकानें हैं सराफा बाजार में
15000 परिवारों की रोजी-रोटी इस बाजार पर निर्भर है
(स्रोत- सराफा व्यापार मंडल)

इनकी भी रही मौजूदगी
व्यापारी संदीप वर्मा, विजय कुमार वर्मा, मनोज कुमार, हरभजन सिंह, संगम वर्मा, रोहित, राजेश वर्मा, रंजीत वर्मा, रवि वर्मा, संजय बरनवाल, वशिष्ठ प्रसाद वर्मा, दीपक वर्मा सहित काफी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

व्यापारियों के मुद्दे: इनका हल चाहतें हैं स्वर्णकार
-
बंधू सिंह कॉम्प्लेक्स में पार्किंग अभी तक शुरू नहीं हुई।
- पुरुषों व महिलाओं के लिए यूरिनल नहीं है।

-जगह-जगह गंदगी है, सफाई नहीं होती है।
-गलियों में बिजली के तार लटके हैं, तारों का जंजाल है।

-सड़क चौड़ी होने के बावजूद सड़कों पर अतिक्रमण है।
-सड़क चौड़ी के बाद भी वाहन सड़क के किनारे खड़े किए जाते हैं, इससे लगता है जाम।

-बाजार को सुंदरीकरण होना चाहिए।
-नए कॉम्लेक्स में कुछ व्यापारियों को दुकान नहीं दी जा रही हैं दुकान।

-टैक्स तो दे रहे लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।
-बैठकें होती हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं होता है।

-आग लग जाए तो जान बचाकर निकलना होगा मुश्किल।
-नालियां 10 साल पुरानी हैं और चोक पड़ी हैं।

सड़कों के किनारे लगाए गए पेड़ पानी बिना सूख गए हैं।
-अलहदादपुर से छात्रसंघ चौराहे तक 500 मीटर तक जाम रहता है।

-व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर यहां एक पुलिस चौकी होनी चाहिए।

-बंधू सिंह कॉम्पलेक्स के पास सड़क पर ट्रांसफार्मर है जो हटना चाहिए।
-स्मार्ट मीटर से बिल ज्यादा आ रहा इसे बदलना चाहिए।

 
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