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आलमारी में ड्यूटी कार्ड, कोठार में पड़े बंडल
basti
Updated Mon, 26 Mar 2018 11:45 PM IST
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मूल्यांकन करते शिक्षक।
- फोटो : amar ujala
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वित्तविहीन शिक्षकों का आंदोलन जैसे-जैसे गंभीर रुख अख्तियार कर रहा है, वैसे-वैसे जिम्मेदारों की धड़कन बढ़ती जा रही है। रिजल्ट में देर को लेकर शिक्षामंत्री की घुड़की से परीक्षकों में भी डर है। सीमित होते जा रहे विकल्प के बीच सोमवार को कुछ परीक्षकों का रुख नरम दिखा लेकिन बहिष्कार का बिगुल बजाए प्रबंधन के डर से वे शिक्षक भी कॉपियों का बंडल छूने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। मूल्यांकन केंद्रों पर तैनात पर्यवेक्षकों के पास यह भी शिकायत आई है कि कुछ परीक्षकों का ड्यूटी कार्ड प्रधानाचार्य आलमारी में बंद कर रखे हैं। ताकि उनका आंदोलन सफल रहे।
इंटरमीडिएट के भौतिक और रसायन विज्ञान के अलावा सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी आदि विषयों का मूल्यांकन फंसा हुआ है। इन विषयों की करीब दो लाख उत्तरपुस्तिकाएं कोठार में अब भी पड़ी हुई हैं। उन विषयों के मूल्यांकन के लिए जो परीक्षक बोर्ड से तैनात किए गए, उनमें से दो तिहाई वित्तविहीन होने के कारण आंदोलन पर हैं। 18 मार्च से शुरू हुआ मूल्यांकन अभी आधा सफर भी नहीं तय कर पाया है। डीआईओएस से लेकर मूल्यांकन केंद्र उप मुख्य परीक्षकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
फिसड्डी रहे राजकीय विद्यालय
मूल्यांकन हो या परीक्षा कराने का सवाल, दोनों मामले में राजकीय स्कूलों की तुलना में स-वित्तीय मान्यता प्राप्त स्कूलों का इंतजाम बेहतर रहा। घोषणा के बावजूद इंटरमीडिएट का मूल्यांकन करने के लिए बने जीआईसी और जीजीआईसी केंद्र में कैमरे नहीं लगाए जा सके। जबकि हाईस्कूल के लिए अलॉट दोनों मूल्यांकन केंद्र श्रीकृष्ण पांडेय इंटर कॉलेज और जीआरएस इंटर कॉलेज सक्सेरिया में कैमरे लगा दिए गए। मूल्यांकन की रफ्तार भी राजकीय में धीमी है।
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वैकल्पिक उपाय से कराएंगे मूल्यांकन
डीआईओएस डॉ. बृजभूषण मौर्य का कहना है विषयाध्यापकों की कमी देखते हुए वैकल्पिक रास्ता अख्तियार किया जाएगा। किसी भी हाल में मूल्यांकन का कार्य लेट नहीं होने पाएगा। लेकिन वह यह नहीं समझा पाए कि यदि वित्तविहीन आंदोलन जारी रहा तो परीक्षक कहां से ढूंढकर लाएंगे।
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वित्तविहीन शिक्षकों का आंदोलन जैसे-जैसे गंभीर रुख अख्तियार कर रहा है, वैसे-वैसे जिम्मेदारों की धड़कन बढ़ती जा रही है। रिजल्ट में देर को लेकर शिक्षामंत्री की घुड़की से परीक्षकों में भी डर है। सीमित होते जा रहे विकल्प के बीच सोमवार को कुछ परीक्षकों का रुख नरम दिखा लेकिन बहिष्कार का बिगुल बजाए प्रबंधन के डर से वे शिक्षक भी कॉपियों का बंडल छूने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। मूल्यांकन केंद्रों पर तैनात पर्यवेक्षकों के पास यह भी शिकायत आई है कि कुछ परीक्षकों का ड्यूटी कार्ड प्रधानाचार्य आलमारी में बंद कर रखे हैं। ताकि उनका आंदोलन सफल रहे।
इंटरमीडिएट के भौतिक और रसायन विज्ञान के अलावा सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी आदि विषयों का मूल्यांकन फंसा हुआ है। इन विषयों की करीब दो लाख उत्तरपुस्तिकाएं कोठार में अब भी पड़ी हुई हैं। उन विषयों के मूल्यांकन के लिए जो परीक्षक बोर्ड से तैनात किए गए, उनमें से दो तिहाई वित्तविहीन होने के कारण आंदोलन पर हैं। 18 मार्च से शुरू हुआ मूल्यांकन अभी आधा सफर भी नहीं तय कर पाया है। डीआईओएस से लेकर मूल्यांकन केंद्र उप मुख्य परीक्षकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
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फिसड्डी रहे राजकीय विद्यालय
मूल्यांकन हो या परीक्षा कराने का सवाल, दोनों मामले में राजकीय स्कूलों की तुलना में स-वित्तीय मान्यता प्राप्त स्कूलों का इंतजाम बेहतर रहा। घोषणा के बावजूद इंटरमीडिएट का मूल्यांकन करने के लिए बने जीआईसी और जीजीआईसी केंद्र में कैमरे नहीं लगाए जा सके। जबकि हाईस्कूल के लिए अलॉट दोनों मूल्यांकन केंद्र श्रीकृष्ण पांडेय इंटर कॉलेज और जीआरएस इंटर कॉलेज सक्सेरिया में कैमरे लगा दिए गए। मूल्यांकन की रफ्तार भी राजकीय में धीमी है।
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वैकल्पिक उपाय से कराएंगे मूल्यांकन
डीआईओएस डॉ. बृजभूषण मौर्य का कहना है विषयाध्यापकों की कमी देखते हुए वैकल्पिक रास्ता अख्तियार किया जाएगा। किसी भी हाल में मूल्यांकन का कार्य लेट नहीं होने पाएगा। लेकिन वह यह नहीं समझा पाए कि यदि वित्तविहीन आंदोलन जारी रहा तो परीक्षक कहां से ढूंढकर लाएंगे।