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पूर्वांचल की धरोहर है दूरदर्शन रिले केंद्र
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डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल।
- फोटो : BASTI
पूर्वांचल की धरोहर है दूरदर्शन रिले केंद्र
केंद्र सरकार सेसंरक्षित कराने की पहल होगी: जगदंबिका
बस्ती। डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि बस्ती का दूरदर्शन रिले केंद्र पूर्वांचल की धरोहर है। 1989 में इसे यहां स्थापित किया गया था, उस समय ही इसके स्थापना को लेकर यह विचार बना था कि इसे विकसित कर प्रोडेक्शन सेंटर बना दिया जाएगा, मगर अब जब केंद्र सरकार ने इसके बंदी का निर्णय लिया है तो इसे संरक्षित करने की पहल की जाएगी। पूर्वांचल के अति महत्वपूर्ण इस केंद्र के लिए भारत सरकार से बातचीत होगी।
बस्ती में दूरदर्शन रिले केंद्र की स्थापना तत्कालीन विधायक और वर्तमान सांसद डुमरियागंज जगदंबिका पाल की पहल पर यहां हुई थी। तब इसे लेकर लोगों में उत्साह था। शुरुआती दौर में केवल 100 वाट का लाइसेंस होने के कारण यह केवल शहरी क्षेत्र में संचालित होता था। धीरे-धीरे इसकी क्षमता बढ़कर 500 वाट कर दी गई, जिससे इसकी परिधि 35 किलोमीटर हो गई। पहले दिल्ली से प्रसारण होता था। बाद में लखनऊ से भी इसे जोड़ दिया गया। कोरोना की दूसरी लहर में इसे शैक्षिक कार्य के लिए प्रयोग किया जाने लगा था। इसके बंदी के निर्णय पर सांसद पाल ने कहा कि शासन का निर्णय जो भी है, अब इसके संरक्षण की पहल की जाएगी। बस्ती की पहचान को धरोहर के रूप में सम्मान मिले इसका पूरा प्रयास करूंगा।
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केंद्र सरकार सेसंरक्षित कराने की पहल होगी: जगदंबिका
बस्ती। डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि बस्ती का दूरदर्शन रिले केंद्र पूर्वांचल की धरोहर है। 1989 में इसे यहां स्थापित किया गया था, उस समय ही इसके स्थापना को लेकर यह विचार बना था कि इसे विकसित कर प्रोडेक्शन सेंटर बना दिया जाएगा, मगर अब जब केंद्र सरकार ने इसके बंदी का निर्णय लिया है तो इसे संरक्षित करने की पहल की जाएगी। पूर्वांचल के अति महत्वपूर्ण इस केंद्र के लिए भारत सरकार से बातचीत होगी।
बस्ती में दूरदर्शन रिले केंद्र की स्थापना तत्कालीन विधायक और वर्तमान सांसद डुमरियागंज जगदंबिका पाल की पहल पर यहां हुई थी। तब इसे लेकर लोगों में उत्साह था। शुरुआती दौर में केवल 100 वाट का लाइसेंस होने के कारण यह केवल शहरी क्षेत्र में संचालित होता था। धीरे-धीरे इसकी क्षमता बढ़कर 500 वाट कर दी गई, जिससे इसकी परिधि 35 किलोमीटर हो गई। पहले दिल्ली से प्रसारण होता था। बाद में लखनऊ से भी इसे जोड़ दिया गया। कोरोना की दूसरी लहर में इसे शैक्षिक कार्य के लिए प्रयोग किया जाने लगा था। इसके बंदी के निर्णय पर सांसद पाल ने कहा कि शासन का निर्णय जो भी है, अब इसके संरक्षण की पहल की जाएगी। बस्ती की पहचान को धरोहर के रूप में सम्मान मिले इसका पूरा प्रयास करूंगा।
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