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Basti News: गंभीर मरीज मेडिकल कॉलेज मत लाइए... यहां आईसीयू तक नहीं
Wed, 14 Aug 2024 01:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 14 Aug 2024 01:03 AM IST
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मेडिकल कॉलेज बस्ती।
स्थापना के पांच वर्ष बाद भी नहीं मिल पाई आईसीयू की सुविधा
क्रिटिकल मरीजों के उपचार का प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे अध्ययनरत डॉक्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आप इस गफलत में हैं कि मेडिकल कॉलेज में इलाज की मुकम्मल व्यवस्था है तो यह आपकी बड़ी चूक हो सकती है। गंभीर स्थिति में लंबी सांस लेने वाले मरीज लेकर यहां मत आइए। सच मानिए, केवल आपका समय बर्बाद होेगा। 500 शैय्या वाले इस अस्पताल में आईसीयू तक नहीं है। इससे अचेतावस्था में गंभीर मरीजों को तत्काल राहत नहीं पहुंचाई जा सकती है। ऐसे मरीजों को यहां से सिर्फ रेफर किया जा रहा है।
पांच वर्ष पहले जिले में महर्षि वशिष्ठ के नाम से मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई। उम्मीद बनी हायर मेडिकल सेंटर बन जाने से गंभीर मरीजों को जिले से बाहर नहीं ले जाना पड़ेगा। अधिकतर गंभीर बीमारियों का इलाज यहीं पर सुनिश्चित होगा। मगर, पांच साल के लंबेे इंतजार के बाद भी हायर सेंटर जैसी सुविधाएं मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ जिला अस्पताल और सीएचसी की तरह सामान्य मरीजों का इलाज यहां हो पा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में अब तक आईसीयू की सुविधा नहीं है। यदि गंभीर स्थिति में मरीज को आईसीयू की जरूरत पड़ी तो मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर हाथ खड़े कर दे रहे हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जा रहा है। जबकि मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पताल में आईसीयू की सुविधा होनी अनिवार्य होती है। इससे मेडिकल छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में क्रिटिकल मरीजों के उपचार का प्रशिक्षण भी नियमित रूप से मिलता रहता है।
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मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में करीब एक से डेढ़ हजार मरीज रोज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इसमें पेट एवं आर्थों से संबंधित सामान्य मरीजों का ही इलाज हो पा रहा है। इसके अलावा गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है। य
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क्या है आईसीयू
मरीज जब किसी बीमारी से अत्यधिक टूटकर कमजोर हो जाता है या फिर अचेतावस्था में चला जाता है तो उन्हें आईसीयू की तत्काल जरूरत पड़ती है। यह आधुनिक संसाधनों से लैस जीवन रक्षक प्रणाली है। इसके जरिये मरीज को प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। फेफड़े एवं शरीर के अन्य आर्गन को सक्रिय करने में यह मशीन मदद करती है। आईसीयू में वेंटिलेटर का होना अनिवार्य है। इस दौरान मरीज का ऑक्सीजन लेबल, बीपी एवं हार्ट बीप, टंपरेचर आदि का पता चलता रहता है। मरीज जब तक सामान्य स्थिति में वापस नहीं आता है आईसीयू में ही रखकर इलाज किया जाता है।
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इन मरीजों को पड़ती है आईसीयू की जरूरत
मार्ग दुर्घटना में घायल ऐसे लोग जिनकी अधिक रक्तस्राव के कारण स्थिति गंभीर बन जाती है या मष्तिक में गंभीर चोट लगने के कारण अथवा हार्ट अटैक से अचेत हो जाते है। ऐसे मरीजों को आईसीयू में रखा जाता है। इसके अलावा न्यूरो, पैरलासिस, सांस के रोगी, अस्थमा आदि से संबंधित रोगी भी गंभीर होने पर आईसीयू में रखे जाते हैं।
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आईसीयू वार्ड में होनी चाहिए यह सुविधाएं
आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर, हाईफ्लो ऑक्सीजन, डीफाइब्रिलेटर, इंफ्यूजन पंप, ऑक्सीजन कसेंट्रेटर, मॉनीटर, ईसीजी, ग्लूको मीटर, बाइपैप, प्रोटेबल एक्स-रे, सेक्सन मशीन, व्हीलचेयर, स्ट्रेचर, अत्याधुनिक बेड सहित अन्य उपकरण होने चाहिए। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक, दक्ष स्टाफ नर्स, एनेथेस्टिस्ट, ईसीजी, वेंटिलेटर एक्स-रे टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय, स्वीपर की तैनाती होनी चाहिए।
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नहीं संचालित हो रहे यह विभाग
मेडिकल कॉलेज में अभी भी न्यूरो, कार्डियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संचालन नहीं किया जा रहा है। इसके विशेषज्ञों की तैनाती ही नहीं हो पाई है। ज्यादातर आईसीयू की जरूरत इन्हीं विभागों से जुड़े मरीजों को पड़ती है। ऐसे में यदि आईसीयू की स्थापना हो भी जाती है, तो चिकित्सक के अभाव में यह यूनिट दम तोड़ देगी।
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कोट
गंभीर मरीजों के लिए 50 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक तैयार कराया जा रहा है। बिल्डिंग बननी शुरू हो गई है। 22 करोड़ की लागत से नया भवन बनाया जा रहा है। इसी में आईसीयू स्थापित किया जाएगा।
डॉ. समीर श्रीवास्तव, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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क्रिटिकल मरीजों के उपचार का प्रशिक्षण नहीं ले पा रहे अध्ययनरत डॉक्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आप इस गफलत में हैं कि मेडिकल कॉलेज में इलाज की मुकम्मल व्यवस्था है तो यह आपकी बड़ी चूक हो सकती है। गंभीर स्थिति में लंबी सांस लेने वाले मरीज लेकर यहां मत आइए। सच मानिए, केवल आपका समय बर्बाद होेगा। 500 शैय्या वाले इस अस्पताल में आईसीयू तक नहीं है। इससे अचेतावस्था में गंभीर मरीजों को तत्काल राहत नहीं पहुंचाई जा सकती है। ऐसे मरीजों को यहां से सिर्फ रेफर किया जा रहा है।
पांच वर्ष पहले जिले में महर्षि वशिष्ठ के नाम से मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई। उम्मीद बनी हायर मेडिकल सेंटर बन जाने से गंभीर मरीजों को जिले से बाहर नहीं ले जाना पड़ेगा। अधिकतर गंभीर बीमारियों का इलाज यहीं पर सुनिश्चित होगा। मगर, पांच साल के लंबेे इंतजार के बाद भी हायर सेंटर जैसी सुविधाएं मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ जिला अस्पताल और सीएचसी की तरह सामान्य मरीजों का इलाज यहां हो पा रहा है।
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मेडिकल कॉलेज में अब तक आईसीयू की सुविधा नहीं है। यदि गंभीर स्थिति में मरीज को आईसीयू की जरूरत पड़ी तो मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर हाथ खड़े कर दे रहे हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जा रहा है। जबकि मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पताल में आईसीयू की सुविधा होनी अनिवार्य होती है। इससे मेडिकल छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में क्रिटिकल मरीजों के उपचार का प्रशिक्षण भी नियमित रूप से मिलता रहता है।
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मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में करीब एक से डेढ़ हजार मरीज रोज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इसमें पेट एवं आर्थों से संबंधित सामान्य मरीजों का ही इलाज हो पा रहा है। इसके अलावा गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है। य
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क्या है आईसीयू
मरीज जब किसी बीमारी से अत्यधिक टूटकर कमजोर हो जाता है या फिर अचेतावस्था में चला जाता है तो उन्हें आईसीयू की तत्काल जरूरत पड़ती है। यह आधुनिक संसाधनों से लैस जीवन रक्षक प्रणाली है। इसके जरिये मरीज को प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। फेफड़े एवं शरीर के अन्य आर्गन को सक्रिय करने में यह मशीन मदद करती है। आईसीयू में वेंटिलेटर का होना अनिवार्य है। इस दौरान मरीज का ऑक्सीजन लेबल, बीपी एवं हार्ट बीप, टंपरेचर आदि का पता चलता रहता है। मरीज जब तक सामान्य स्थिति में वापस नहीं आता है आईसीयू में ही रखकर इलाज किया जाता है।
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इन मरीजों को पड़ती है आईसीयू की जरूरत
मार्ग दुर्घटना में घायल ऐसे लोग जिनकी अधिक रक्तस्राव के कारण स्थिति गंभीर बन जाती है या मष्तिक में गंभीर चोट लगने के कारण अथवा हार्ट अटैक से अचेत हो जाते है। ऐसे मरीजों को आईसीयू में रखा जाता है। इसके अलावा न्यूरो, पैरलासिस, सांस के रोगी, अस्थमा आदि से संबंधित रोगी भी गंभीर होने पर आईसीयू में रखे जाते हैं।
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आईसीयू वार्ड में होनी चाहिए यह सुविधाएं
आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर, हाईफ्लो ऑक्सीजन, डीफाइब्रिलेटर, इंफ्यूजन पंप, ऑक्सीजन कसेंट्रेटर, मॉनीटर, ईसीजी, ग्लूको मीटर, बाइपैप, प्रोटेबल एक्स-रे, सेक्सन मशीन, व्हीलचेयर, स्ट्रेचर, अत्याधुनिक बेड सहित अन्य उपकरण होने चाहिए। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सक, दक्ष स्टाफ नर्स, एनेथेस्टिस्ट, ईसीजी, वेंटिलेटर एक्स-रे टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय, स्वीपर की तैनाती होनी चाहिए।
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नहीं संचालित हो रहे यह विभाग
मेडिकल कॉलेज में अभी भी न्यूरो, कार्डियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संचालन नहीं किया जा रहा है। इसके विशेषज्ञों की तैनाती ही नहीं हो पाई है। ज्यादातर आईसीयू की जरूरत इन्हीं विभागों से जुड़े मरीजों को पड़ती है। ऐसे में यदि आईसीयू की स्थापना हो भी जाती है, तो चिकित्सक के अभाव में यह यूनिट दम तोड़ देगी।
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कोट
गंभीर मरीजों के लिए 50 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक तैयार कराया जा रहा है। बिल्डिंग बननी शुरू हो गई है। 22 करोड़ की लागत से नया भवन बनाया जा रहा है। इसी में आईसीयू स्थापित किया जाएगा।
डॉ. समीर श्रीवास्तव, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज