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Basti News: डाॅक्टर नदारद, इलाज के लिए घंटों इंतजार में खड़े रहे मजबूर मरीज
Wed, 11 Feb 2026 12:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 11 Feb 2026 12:39 AM IST
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गौर सीएचसी में चिकित्सक का बंद कक्ष। संवाद
बस्ती। सीएचसी गौर में डॉक्टरों की लेटलतीफी से मरीज परेशान हैं। मरीजों को सुबह के समय इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। मंगलवार की सुबह करीब 10:45 बजे अस्पताल की पड़ताल करने पर डॉक्टर की कुर्सी खाली मिली।
इससे 15 मिनट पहले ही एंबुलेंस से मरीज आया तो फार्मासिस्ट ने उपचार कर उसे भर्ती कर लिया। सीएचसी गौर में शुक्रवार को ही दुर्घटना में घायल काे इलाज नहीं मिलने से लोगों ने आक्रोश जाहिर किया था। इसकी शिकायत सीएमओ से की गई थी।
उन्होंने कार्रवाई की बात भी कही थी। इतना सब होने के बाद भी डॉक्टरों की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है।
मंगलवार को लोग सुबह से ही डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। मरीजों में कुत्ते की सुई, तो कोई चोट की ड्रेसिंग और दर्द की शिकायत लेकर खड़े थे। डॉक्टर के मेज पर करीब 10 पर्चे लगाए गए थे। पर्चा कटवाने का काउंटर सुबह 10 बजे से खुल गया था। यहां करीब चार मरीज पर्चा कटवाए और डॉक्टर के कमरे में पर्चा जमा कर बाहर लाइन लगाकर खड़े हो गए। कुछ देर बाद डॉक्टर आए और मरीज को उचित उपचार कर दवाइयां दी।
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सूत्रों की मानें तो सभी दवाइयां सरकारी नहीं दी जा रही है। डॉक्टर की लिखी गई बाहर की दवा लेना भी मजबूरी बन जाती है। इससे जेब पर और खर्च बढ़ जाता है। मरीज और कुछ तीमारदारों ने बताया कि कभी-कभी ऐसा होता है कि डॉक्टर समय पर नहीं रहते हैं। मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। बताया कि बाहर की दवा लिखने से परेशानी और बढ़ जाती है।
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इससे 15 मिनट पहले ही एंबुलेंस से मरीज आया तो फार्मासिस्ट ने उपचार कर उसे भर्ती कर लिया। सीएचसी गौर में शुक्रवार को ही दुर्घटना में घायल काे इलाज नहीं मिलने से लोगों ने आक्रोश जाहिर किया था। इसकी शिकायत सीएमओ से की गई थी।
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उन्होंने कार्रवाई की बात भी कही थी। इतना सब होने के बाद भी डॉक्टरों की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है।
मंगलवार को लोग सुबह से ही डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। मरीजों में कुत्ते की सुई, तो कोई चोट की ड्रेसिंग और दर्द की शिकायत लेकर खड़े थे। डॉक्टर के मेज पर करीब 10 पर्चे लगाए गए थे। पर्चा कटवाने का काउंटर सुबह 10 बजे से खुल गया था। यहां करीब चार मरीज पर्चा कटवाए और डॉक्टर के कमरे में पर्चा जमा कर बाहर लाइन लगाकर खड़े हो गए। कुछ देर बाद डॉक्टर आए और मरीज को उचित उपचार कर दवाइयां दी।
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सूत्रों की मानें तो सभी दवाइयां सरकारी नहीं दी जा रही है। डॉक्टर की लिखी गई बाहर की दवा लेना भी मजबूरी बन जाती है। इससे जेब पर और खर्च बढ़ जाता है। मरीज और कुछ तीमारदारों ने बताया कि कभी-कभी ऐसा होता है कि डॉक्टर समय पर नहीं रहते हैं। मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। बताया कि बाहर की दवा लिखने से परेशानी और बढ़ जाती है।