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Basti News: जांच लंबित रखने पर डीएम ने डिप्टी सीएमओ को चेताया...हफ्तेभर में मांगी रिपोर्ट

Wed, 21 Jan 2026 12:17 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jan 2026 12:17 AM IST
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DM warns Deputy CMO for pending investigation...requests report within a week
बस्ती। निजी अस्पतालों में मौत पर मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग शिकंजा करने में नाकाम है। हर मौत के पीछे डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगता है। शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने का दम भरता है।
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अस्पताल सील भी किए जाते हैं, मगर समय के साथ सबकुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। लापरवाही से धूमिल हो रही विभागीय छवि पर डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने नाराजगी जताई है। डिप्टी सीएमओ को कड़े निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी लंबित प्रकरण की जांच रिपोर्ट तलब करते हुए कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।
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बता दें कि सोमवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम के सामने जून 2025 को कप्तानगंज में तैनात डॉक्टर की पत्नी के प्रसव मामले में नवजात मृत्यु प्रकरण का मामला उठा था। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा दो पीड़ितों को लंबे समय बाद भी न्याय नहीं दिलाया गया। जांच ठंडे बस्ते में है। जांच कहां तक पूरी हुई, क्या कार्रवाई हुई कुछ पता नहीं है। दो नवजात के मृत्यु प्रकरण की जांच कई माह से लंबित है।
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एक प्रकरण की जांच सात माह तो दूसरा पांच माह में भी नहीं पूरी हो पाई। अधिकारियों की मेहरबानी से एक निजी अस्पताल की घटना के समय तो पंजीकरण तक नहीं था, उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है, ऐसे में विभागीय कार्यशैली पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। चार माह पहले एक अन्य प्रकरण में विभाग के अधिकारियों पर निजी अस्पताल को बचाने का आरोप लगा था।
भाजयुमो के कार्यकर्ताओं की ओर से यह आरोप लगाया गया था। बावजूद इसके विभागीय जिम्मेदारों पर असर नहीं दिखा। जुलाई 2025 में प्लास्टिक कांप्लेक्स स्थित एक निजी अस्पताल पर लापरवाही बरतने के चलते नवजात की मृत्यु का आरोप लगा था। उस समय अस्पताल का पंजीकरण भी नहीं था। परिजनों के हंगामा करने के बाद सीएमओ ने संज्ञान में लिया था।
जांच टीम गठित कर सप्ताह भीतर आख्या मांगी थी। जांच में यह सामने आया था कि अस्पताल का पंजीकरण ही नहीं है। संचालक ने आनन-फानन में आवेदन किया गया था। अस्पताल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अस्पताल का संचालन अभी भी हो रहा है।

वहीं दूसरा प्रकरण मालवीय रोड पर स्थित निजी अस्पताल का है। एक सीएचसी अधीक्षक ने जून में ही सीएमओ को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर वह मालवीय रोड पर स्थित अस्पताल में भर्ती किए थे। लापरवाही पूर्वक प्रसव कराने के बाद नवजात की हालत गंभीर हो गई थी। वह दूसरे अस्पताल लेकर गए जहां नवजात दम तोड़ दिया था। प्रकरण में सीएमओ ने जांच टीम बनाई थी। प्रकरण में अभी कार्रवाई नहीं हुई।
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