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72 लाख बिना अधूरा 360 निराश्रितों का आशियाना
Thu, 10 Jan 2019 11:44 PM IST
राकेश पांडेय
basti
basti
Published by: राकेश पांडेय
Updated Thu, 10 Jan 2019 11:44 PM IST
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कांशीराम आवास देखने पहुंचे डीएम।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। मात्र 72 लाख बिना बनकर तैयार होने के बावजूद 360 परिवारों को छत नसीब नहीं हो रही है। मान्यवर कांशीराम आवास का परियोजना के थर्ड फेज में नौ करोड़ 72 लाख रुपये की लागत से तैयार कराए गए भवन के लिए निर्माण एजेंसी ने नौ करोड़ रुपये डकार लिया लेकिन तीन वर्ष बीतने के बावजूद कार्य पूरा नहीं किया जा सका।
निरीक्षण के बाद डीएम ने बताया कि जिला प्रशासन 15 दिन में एक बार कार्य प्रगति की समीक्षा कर कोशिश करेगा कि अगले तीन महीनों में सभी बाकी कार्यों को पूरा कर जल्द से जल्द पात्र जरूरतमंद परिवारों को आवंटित किया जा सके। शहर से सटे छबिलहाखोर (आरटीओ कार्यालय के पीछे) स्थित मान्यवर कांशीराम आवास योजना (थर्ड फेज) के आवास का बृहस्पतिवार को डीएम डॉ. राजशेखर ने भ्रमण किया तो सबसे पहले इसी बात की समीक्षा की। परियोजना प्रबंधक ने डीएम को बताया कि बजट के अभाव एवं अन्य विभिन्न कारणों से उन्हें शेष 72 लाख रुपये अभी नहीं मिल सके। सीआरओ आरडी पांडेय, पीडब्ल्यूडी, हाइडिल एवं जल निगम के अधिसाशी अभियंता, आवास विकास परिषद के परियोजना प्रबंधक, ईओ नगर पालिका और अन्य के साथ पहुंचे डीएम ने पूरी परियोजना के बारे में जानकारी ली। डीएम ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, 2015 के बाद से किसी भी विभाग ने लंबित परियोजना पूरी करने की जहमत नहीं उठाई। जबकि इसके समय पर पूरा होने से 360 गरीब बेघर परिवारों को रहने के लिए घर मिल गया होता।
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निरीक्षण के बाद डीएम ने बताया कि जिला प्रशासन 15 दिन में एक बार कार्य प्रगति की समीक्षा कर कोशिश करेगा कि अगले तीन महीनों में सभी बाकी कार्यों को पूरा कर जल्द से जल्द पात्र जरूरतमंद परिवारों को आवंटित किया जा सके। शहर से सटे छबिलहाखोर (आरटीओ कार्यालय के पीछे) स्थित मान्यवर कांशीराम आवास योजना (थर्ड फेज) के आवास का बृहस्पतिवार को डीएम डॉ. राजशेखर ने भ्रमण किया तो सबसे पहले इसी बात की समीक्षा की। परियोजना प्रबंधक ने डीएम को बताया कि बजट के अभाव एवं अन्य विभिन्न कारणों से उन्हें शेष 72 लाख रुपये अभी नहीं मिल सके। सीआरओ आरडी पांडेय, पीडब्ल्यूडी, हाइडिल एवं जल निगम के अधिसाशी अभियंता, आवास विकास परिषद के परियोजना प्रबंधक, ईओ नगर पालिका और अन्य के साथ पहुंचे डीएम ने पूरी परियोजना के बारे में जानकारी ली। डीएम ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, 2015 के बाद से किसी भी विभाग ने लंबित परियोजना पूरी करने की जहमत नहीं उठाई। जबकि इसके समय पर पूरा होने से 360 गरीब बेघर परिवारों को रहने के लिए घर मिल गया होता।
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