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Basti News: रात एक बजे तक बज रहे डीजे, बीमार व बुजुर्गों की बढ़ रही तकलीफ
Mon, 04 Mar 2024 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 04 Mar 2024 12:51 AM IST
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मैरिज हॉल में रात एक बजे तक तेज डीजे बजने से परेशान हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शादी समारोह में डीजे की धुन पर थिरकने का युवाओं का शौक परेशानी का सबब बन गया है। इस पर रोक लगाने का आदेश भी कोई मानने वाला नहीं है। सामाजिक, मांगलिक कार्य में विध्न न डालने के संकोच के कारण पुलिस प्रशासन भी ज्यादा सख्ती करते नहीं दिख रहा है। रात एक बजे तक डीजे बज रहे हैं। इससे बीमार व बुजुर्गों की तकलीफ बढ़ रही है।
कांवड़ यात्रा और गणेश पूजा के दौरान 50 से अधिक डीजे संचालकों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मगर, शादियों में बजने वाले डीजे पर कोई रोकटोक नहीं है। नतीजा यह है कि शादियों के आयोजन में फुल वाल्युम में बज रहे डीजे से एक ओर लोगों की नींद हराम हो गई है। दूसरी ओर परीक्षा के समय में विद्यार्थी एकाग्र होकर पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अनिद्रा से चिढ़चिढ़ापन, बेचैनी के लोग ग्रसित हो रहे हैं।
चिकित्सक कहते हैं कि शोर आपके सुनने की शक्ति को ही नहीं, शरीर के अन्य संवेदनशील अंगों पर भी प्रभाव डालता है। तेज शोर से हृदयाघात भी हो सकता है और जान भी जा सकती है। यह यूं ही नहीं कहा जा रहा है। इसके वैज्ञानिक तथ्य हैं। 14 जुलाई 2023 को हर्रैया क्षेत्र में एक कांवड़िया की मौत डीजे की तेज आवाज के चलते हो गई थी। पोस्टमार्टम में चिकित्सक ने इसकी पुष्टि की थी। चिकित्सकों की मानें तो इसकी तेज आवाज से कार्डिएक अरेस्ट होने का खतरा होता है।
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जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डाॅ. रामजी सोनी ने बताया कि तेज साउंड के कारण कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है। गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे पैदा हो सकते हैं। आंखों में जल्द चश्मा तथा एकाग्रता की कमी इसकी प्रमुख वजह है। ज्यादा देर तक लगातार शोर होता रहे तो बहरेपन के साथ हृदयाघात का खतरा होता है। तेज आवाज के चलते हृदय के करंट का कंडंशन कम हो जाता है। ऐसे में शरीर के किसी भी हिस्से में रक्त जमा होगा तो वह हृदयगति को रोक देगा, जिससे मौत हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. रजत पांडेय की मानें तो हमारे घर में दिन के समय अधिकतम 25 से 30 तथा रात में 20 से 25 डेसीबल तक ध्वनि होनी चाहिए, लेकिन, वाहनों के प्रेशर हॉर्न तथा मशीनों की आवाज से भी ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे में डीजे की तीव्र ध्वनि के पास खड़े रहना सेहत के लिए भयानक खतरा पैदा करता है।
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तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एसएस कन्नौजिया की मानें तो एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 50 डेसीबल तक की ध्वनि सहन करने लायक होती है, लेकिन डीजे की ध्वनि की तीव्रता करीब 500 डेसीबल तक पहुंच जाती है। तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है। डीजे की तेज साउंड मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। रक्तचाप बढ़ जाता है। खून में शर्करा बढ़ने लगती है। हृदय की धड़कन तेज हो जाती है।
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बोले लोग
लगन के समय में डीजे बजने से रात में सोना मुश्किल हो जाता है। शोर से कई बार खिड़की-दरवाजे हिलने लगते हैं। ज्यादा परेशानी होने पर शिकायत की जाती है, लेकिन बराती कहां मानने वाले। इसलिए इस पर रोक लगनी चाहिए।
अरविंद सिंह, कटरा
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मोहल्ले में एक मैरिज हाॅल है। लगन के समय में बरात निकलने पर सड़क पर जाम लगता है। तेज आवाज में डीजे बजाकर नाचने का फैशन चल रहा है। इससे मरीज, बुजुर्ग और विद्यार्थियों को दिक्कत होती है। त्योहारों की तरह इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
बाबूराम वर्मा, मूड़घाट
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यह है ध्वनि का मानक
एक लाउडस्पीकर की साउंड ध्वनि ही निर्धारित मानक व्यावसायिक एरिया में 55 से 60 डेसिबल तक पर्याप्त मानी है। आवासीय एरिया में 45 से 55 डेसिबल तक आवाज मान्य है। अगर कोई धार्मिक स्थल अपने परिसर में निर्धारित मानक के अंदर दो लाउडस्पीकर बजा सकता है तो वहां के साउंड सिस्टम का परीक्षण कराने के बाद उसे दो लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इन लाउडस्पीकरों का मुंह परिसर के अंदर ही रहेगा। किसी भी धार्मिक स्थल या निजी समारोह में निर्धारित मानक से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजने की शिकायत पर आवाज का परीक्षण कराने के बाद तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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कोट
त्योहारों के साथ-साथ शादी में भी डीजे बजाने के संबंध में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा। इसके लिए तीनों जिले के पुलिस अधीक्षक व सीओ को निर्देश दिए गए। मैरिज हाॅल और अन्य कार्यक्रमों में इसकी शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।
- आरके भारद्वाज, आईजी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शादी समारोह में डीजे की धुन पर थिरकने का युवाओं का शौक परेशानी का सबब बन गया है। इस पर रोक लगाने का आदेश भी कोई मानने वाला नहीं है। सामाजिक, मांगलिक कार्य में विध्न न डालने के संकोच के कारण पुलिस प्रशासन भी ज्यादा सख्ती करते नहीं दिख रहा है। रात एक बजे तक डीजे बज रहे हैं। इससे बीमार व बुजुर्गों की तकलीफ बढ़ रही है।
कांवड़ यात्रा और गणेश पूजा के दौरान 50 से अधिक डीजे संचालकों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मगर, शादियों में बजने वाले डीजे पर कोई रोकटोक नहीं है। नतीजा यह है कि शादियों के आयोजन में फुल वाल्युम में बज रहे डीजे से एक ओर लोगों की नींद हराम हो गई है। दूसरी ओर परीक्षा के समय में विद्यार्थी एकाग्र होकर पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अनिद्रा से चिढ़चिढ़ापन, बेचैनी के लोग ग्रसित हो रहे हैं।
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चिकित्सक कहते हैं कि शोर आपके सुनने की शक्ति को ही नहीं, शरीर के अन्य संवेदनशील अंगों पर भी प्रभाव डालता है। तेज शोर से हृदयाघात भी हो सकता है और जान भी जा सकती है। यह यूं ही नहीं कहा जा रहा है। इसके वैज्ञानिक तथ्य हैं। 14 जुलाई 2023 को हर्रैया क्षेत्र में एक कांवड़िया की मौत डीजे की तेज आवाज के चलते हो गई थी। पोस्टमार्टम में चिकित्सक ने इसकी पुष्टि की थी। चिकित्सकों की मानें तो इसकी तेज आवाज से कार्डिएक अरेस्ट होने का खतरा होता है।
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जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डाॅ. रामजी सोनी ने बताया कि तेज साउंड के कारण कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है। गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे पैदा हो सकते हैं। आंखों में जल्द चश्मा तथा एकाग्रता की कमी इसकी प्रमुख वजह है। ज्यादा देर तक लगातार शोर होता रहे तो बहरेपन के साथ हृदयाघात का खतरा होता है। तेज आवाज के चलते हृदय के करंट का कंडंशन कम हो जाता है। ऐसे में शरीर के किसी भी हिस्से में रक्त जमा होगा तो वह हृदयगति को रोक देगा, जिससे मौत हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. रजत पांडेय की मानें तो हमारे घर में दिन के समय अधिकतम 25 से 30 तथा रात में 20 से 25 डेसीबल तक ध्वनि होनी चाहिए, लेकिन, वाहनों के प्रेशर हॉर्न तथा मशीनों की आवाज से भी ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे में डीजे की तीव्र ध्वनि के पास खड़े रहना सेहत के लिए भयानक खतरा पैदा करता है।
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तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एसएस कन्नौजिया की मानें तो एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 50 डेसीबल तक की ध्वनि सहन करने लायक होती है, लेकिन डीजे की ध्वनि की तीव्रता करीब 500 डेसीबल तक पहुंच जाती है। तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है। डीजे की तेज साउंड मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। रक्तचाप बढ़ जाता है। खून में शर्करा बढ़ने लगती है। हृदय की धड़कन तेज हो जाती है।
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बोले लोग
लगन के समय में डीजे बजने से रात में सोना मुश्किल हो जाता है। शोर से कई बार खिड़की-दरवाजे हिलने लगते हैं। ज्यादा परेशानी होने पर शिकायत की जाती है, लेकिन बराती कहां मानने वाले। इसलिए इस पर रोक लगनी चाहिए।
अरविंद सिंह, कटरा
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मोहल्ले में एक मैरिज हाॅल है। लगन के समय में बरात निकलने पर सड़क पर जाम लगता है। तेज आवाज में डीजे बजाकर नाचने का फैशन चल रहा है। इससे मरीज, बुजुर्ग और विद्यार्थियों को दिक्कत होती है। त्योहारों की तरह इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
बाबूराम वर्मा, मूड़घाट
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यह है ध्वनि का मानक
एक लाउडस्पीकर की साउंड ध्वनि ही निर्धारित मानक व्यावसायिक एरिया में 55 से 60 डेसिबल तक पर्याप्त मानी है। आवासीय एरिया में 45 से 55 डेसिबल तक आवाज मान्य है। अगर कोई धार्मिक स्थल अपने परिसर में निर्धारित मानक के अंदर दो लाउडस्पीकर बजा सकता है तो वहां के साउंड सिस्टम का परीक्षण कराने के बाद उसे दो लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इन लाउडस्पीकरों का मुंह परिसर के अंदर ही रहेगा। किसी भी धार्मिक स्थल या निजी समारोह में निर्धारित मानक से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजने की शिकायत पर आवाज का परीक्षण कराने के बाद तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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कोट
त्योहारों के साथ-साथ शादी में भी डीजे बजाने के संबंध में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा। इसके लिए तीनों जिले के पुलिस अधीक्षक व सीओ को निर्देश दिए गए। मैरिज हाॅल और अन्य कार्यक्रमों में इसकी शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।
- आरके भारद्वाज, आईजी