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डेढ़ वर्ष से उपेक्षा के चलते ताले मे बंद है डिजीटल एक्सरे मशीन...

Sat, 16 Apr 2022 12:36 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 16 Apr 2022 12:36 AM IST
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Disital X-ray Mashine not working
जिला अस्पताल : डिजीटल एक्स-रे मशीन डेढ़ साल से बंद
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बस्ती। अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित जिला चिकित्सालय में सब कुछ है लेकिन, यहां डिजिटल एक्स-रे मशीन डेढ़ से बंद है। लिहाजा यहां आनेवाले मरीजों को बाहर का रास्ता अख्तियार करना पड़ रहा है। मरीजों की इस मजबूरी के कारण जिला अस्पताल के निकट मौजूद कई एक्स-रे सेंटर मोटी कमाई कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की चुप्पी के चलते गरीबों को मिलने वाली निशुल्क सेवा पूरी तरह से बंद ठप है। वहीं, जिम्मेदार इसके लिए सिस्टम की खराबी बता रहे हैं।
जिला अस्पताल में करीब तीन साल पहले डिजिटल एक्स-रे मशीन संचालित की गई। हर दिन यहां करीब बीस से पचीस मरीजों का एक्स-रे होता था। करीब एक साल तक यह मशीन बेहतर ढंग से संचालित होती रही। इसी बीच एकाध बार मशीन में तकनीकी दिक्कत आई तो तत्कालीन अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखा, जिस पर कंपनी से आए तकनीकी टीम ने उसे ठीक कर दिया, मगर खराब होने का क्रम लगातार जारी रहा। एक वर्ष बाद सप्ताह में एक दिन मशीन में कोई न कोई दिक्कत आने लगी और करीब डेढ़ वर्ष पहले यह पूरी तरह बंद हो गई। इसके बाद डिजिटल एक्स-रे सिस्टम में खराबी बताकर इसे बंद कर दिया गया। यहां के कर्मी सामान्य एक्स-रे के लिए वापस भेज दिए गए। तब से लेकर आज तक न तो इसकी किसी ने सुध ली और न ही यह मशीन फिर से संचालित हो सकी।
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निजी सेंटरों पर चार सौ में डिजिटल एक्स-रे निजी सेंटर के संचालकों ने बताया कि सामान्य एक्स-रे का दो से ढाई सौ तो डिजिटल एक्स-रे के लिए चार से साढ़े चार सौ रुपये मरीज से लिए जाते हैं। एक से अधिक शरीर के हिस्सों के लिए डिजिटल में अलग-अलग रुपये लिए जाते हैं।
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बोले, तीमारदार
संतकबीरनगर से जिला अस्पताल के ओपीडी में दिखाने आए विनोद कुमार चौबे ने कहा कि उनकी पत्नी बीमार हैं। चिकित्सक ने उन्हें डिजिटल एक्स-रे की सलाह दी है, मगर यहां नहीं है। अब इसके चलते बाहर ही एक्स-रे कराएंगे, जिस पर करीब चार से साढ़े चार सौ रुपये का खर्च आएगा। सरकार की निशुल्क योजनाएं यहां कागजों में दौड़ रही हैं और मशीन ठीक नहीं है।
शहर के पचपेड़िया निवासी अनादि नाथ पांडेय ने कहा कि उनके परिवार में पेट की दिक्कत थी, चिकित्सक ने अपेंडिस बताया है, मगर इसके लिए डिजिटल एक्स-रे कराने की सलाह दी है। अस्पताल में तो मशीन होने के बावजूद खराबी के चलते बाहर कराना पड़ेगा। बाहर निजी सेंटर ने चार सौ रुपये बताया है। अस्पताल प्रशासन को इसके लिए शासन को लिखकर इस मशीन को संचालित कराना चाहिए, जिससे गरीब मरीजों को निशुल्क जांच की सुविधा मिल सके।

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शासन को लिखा गया है पत्र
अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब है। इसके सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी आ गई है। इसको ठीक कराने के लिए कई पत्र लिखे गए। एक बार फिर से शासन को अवगत कराने के लिए लिखा जा रहा है। वैसे सामान्य एक्स-रे मशीन संचालित हो रही है।
-डॉ. आलोक कुमार वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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