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मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ी : आयुक्त ने सीएमओ से मांगी आख्या
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बस्ती। जिला अस्पताल में मारपीट के मामले में मेडिकल रिपोर्ट से छेड़छाड़ और 25 हजार रुपये मांगने की शिकायत आयुक्त तक पहुंच गई है। आयुक्त ने सीएमओ से प्रकरण की जांच कर आख्या मांगी है। इससे पहले जिला अस्पताल में गठित तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक और एक्सरे टेक्नीशियन को नोटिस जारी कर सचेत किया गया था। हालांकि, जांच समिति को धनउगाही के आरोप के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं मिला।
लालगंज थाना क्षेत्र के अगया भितिहा निवासी रामपाल ने आयुक्त को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि पटीदारों ने मारपीट कर उनका दांत, बायां हाथ और छोटी उंगली तोड़ दी थी। किसी तरह थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मेडिकल परीक्षण के लिए उन्हें पीएचसी बनकटी भेजा गया। वहां 10 सितंबर को परीक्षण के दौरान एक्सरे कराने की सलाह दी गई। जिला अस्पताल में 11 सितंबर को एक्सरे जांच हुई। पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान विपक्षी एक्सरे कक्ष में पहुंच गए। वहां मौजूद टेक्नीशियन ने कथित तौर पर बताया कि विपक्षी रुपये की गड्डी लेकर घूम रहा है। मेडिकल रिपोर्ट सही करानी है तो 25 हजार रुपये लेकर आइए। पीड़ित के अनुसार, रुपये नहीं देने पर विपक्षी से मिलीभगत कर रिपोर्ट में ‘ओल्ड’ शब्द जोड़ दिया गया। इससे चोटों की वास्तविक स्थिति प्रभावित हुई और उन्हें न्याय मिलने में बाधा आ सकती है।
तीन सदस्यीय समिति ने की थी जांच
सीएमओ डॉ. राजीव निगम के अनुसार, जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) डॉ. अनिल कुमार की ओर से मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इसमें रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विकास कुमार सोनकर, वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. महेश प्रसाद और आर्थो सर्जन डॉ. आलोक पांडेय शामिल थे। समिति ने पीड़ित को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया और धनउगाही के आरोप के समर्थन में साक्ष्य मांगे लेकिन पीड़ित साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सका।
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एसआईसी ने चेतावनी के साथ जारी किया था नोटिस
रिपोर्ट के आधार पर एसआईसी डॉ. अनिल कुमार ने आर्थो सर्जन डॉ. अजीत कुमार भारतीय को चिकित्सीय कार्य में उपयुक्त एवं स्वीकार्य शब्दावली के इस्तेमाल और मरीजों से सरल भाषा में व्यवहार करने के निर्देश दिए। एक्सरे टेक्नीशियन महेश कुमार वर्मा को भी मरीजों से उचित व्यवहार करने और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न होने के लिए सचेत किया गया। सीएमओ ने बताया कि जांच आख्या जिलाधिकारी को भेजी गई है। उनके अनुसार, जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक लेवल-4 के चिकित्सा अधिकारी हैं और उनके स्तर से गठित समिति जांच कर चुकी है। ऐसे में उच्च स्तर के अधिकारी की ओर से दोबारा जांच कराना उचित नहीं माना जा रहा है। अब आयुक्त कार्यालय से सीएमओ से आख्या मांगे जाने के बाद प्रकरण फिर चर्चा में है।
कोट:::
आयुक्त के यहां से मांगी गई आख्या को जल्द ही भेज दी जाएगी। पूर्व में इस प्रकरण की जांच एसआईसी के स्तर से हो चुकी है। - डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।
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लालगंज थाना क्षेत्र के अगया भितिहा निवासी रामपाल ने आयुक्त को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि पटीदारों ने मारपीट कर उनका दांत, बायां हाथ और छोटी उंगली तोड़ दी थी। किसी तरह थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मेडिकल परीक्षण के लिए उन्हें पीएचसी बनकटी भेजा गया। वहां 10 सितंबर को परीक्षण के दौरान एक्सरे कराने की सलाह दी गई। जिला अस्पताल में 11 सितंबर को एक्सरे जांच हुई। पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान विपक्षी एक्सरे कक्ष में पहुंच गए। वहां मौजूद टेक्नीशियन ने कथित तौर पर बताया कि विपक्षी रुपये की गड्डी लेकर घूम रहा है। मेडिकल रिपोर्ट सही करानी है तो 25 हजार रुपये लेकर आइए। पीड़ित के अनुसार, रुपये नहीं देने पर विपक्षी से मिलीभगत कर रिपोर्ट में ‘ओल्ड’ शब्द जोड़ दिया गया। इससे चोटों की वास्तविक स्थिति प्रभावित हुई और उन्हें न्याय मिलने में बाधा आ सकती है।
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तीन सदस्यीय समिति ने की थी जांच
सीएमओ डॉ. राजीव निगम के अनुसार, जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) डॉ. अनिल कुमार की ओर से मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इसमें रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विकास कुमार सोनकर, वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. महेश प्रसाद और आर्थो सर्जन डॉ. आलोक पांडेय शामिल थे। समिति ने पीड़ित को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया और धनउगाही के आरोप के समर्थन में साक्ष्य मांगे लेकिन पीड़ित साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सका।
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एसआईसी ने चेतावनी के साथ जारी किया था नोटिस
रिपोर्ट के आधार पर एसआईसी डॉ. अनिल कुमार ने आर्थो सर्जन डॉ. अजीत कुमार भारतीय को चिकित्सीय कार्य में उपयुक्त एवं स्वीकार्य शब्दावली के इस्तेमाल और मरीजों से सरल भाषा में व्यवहार करने के निर्देश दिए। एक्सरे टेक्नीशियन महेश कुमार वर्मा को भी मरीजों से उचित व्यवहार करने और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न होने के लिए सचेत किया गया। सीएमओ ने बताया कि जांच आख्या जिलाधिकारी को भेजी गई है। उनके अनुसार, जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक लेवल-4 के चिकित्सा अधिकारी हैं और उनके स्तर से गठित समिति जांच कर चुकी है। ऐसे में उच्च स्तर के अधिकारी की ओर से दोबारा जांच कराना उचित नहीं माना जा रहा है। अब आयुक्त कार्यालय से सीएमओ से आख्या मांगे जाने के बाद प्रकरण फिर चर्चा में है।
कोट:::
आयुक्त के यहां से मांगी गई आख्या को जल्द ही भेज दी जाएगी। पूर्व में इस प्रकरण की जांच एसआईसी के स्तर से हो चुकी है। - डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।