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आयुष्मान योग में मनाया जाएगा दीप पर्व
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दीपावली पर सजी दुकानें।
- फोटो : BASTI
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आयुष्मान योग में मनाया जाएगा दीप पर्व
स्वाति नक्षत्र में प्रीति योग व आयुष्मान योग का अनूठा योग
एक घंटे 55 मिनट की अवधि गणेश-लक्ष्मी के पूजन का श्रेष्ठ समय
बस्ती। कार्तिक अमावस्या के दिन बृहस्पतिवार को चित्रा नक्षत्र में दीप पर्व (दीपावली) मनाई जाएगी। स्वाती नक्षत्र में प्रीति योग व आयुष्मान योग के संयुक्त आभा के बीच दीपोत्सव का यह त्योहार अपार खुशियां एवं समृद्धि लेकर आने वाला है। विद्वानों का कहना है कि सूर्य, मंगल व चंद्र की युति इस बार खास फल देने वाली है।
ज्योतिषाचार्य पंडित मोहित मिश्र के मुताबिक बृहस्पतिवार को लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ समय शाम 6:10 से 8:06 बजे तक रहेगा। यानी एक घंटे 55 मिनट की अवधि गणेश-लक्ष्मी के पूजन का श्रेष्ठ समय होगा। प्रदोष काल शाम 5:34 मिनट से 8:10 बजे तक और वृषभ काल शाम 6:10 से रात 8:06 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में किया जाना सबसे शुभ माना गया है।
प्रदोष काल का मतलब सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त से होता है। इसके अलावा प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है। माना जाता है स्थिर लग्न में की गई पूजा-आराधना में माता लक्ष्मी वहां पर अवश्य अपने कुछ अंश के रूप में निवास करने लगती हैं। इसके अलावा महानिशीथ काल में भी लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। इसमें मां काली की पूजा करने का विधान होता है। इस काल में ज्यादातर लोग लक्ष्मी पूजा वे करते हैं जो तांत्रिक या साधक होते हैं।
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दिवाली पूजा मंत्र
मां लक्ष्मी मंत्र- ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:।।
सौभाग्य प्राप्ति मंत्र- ऊं श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
कुबेर मंत्र-ऊं यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं में देहि दापय।
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स्वाति नक्षत्र में प्रीति योग व आयुष्मान योग का अनूठा योग
एक घंटे 55 मिनट की अवधि गणेश-लक्ष्मी के पूजन का श्रेष्ठ समय
बस्ती। कार्तिक अमावस्या के दिन बृहस्पतिवार को चित्रा नक्षत्र में दीप पर्व (दीपावली) मनाई जाएगी। स्वाती नक्षत्र में प्रीति योग व आयुष्मान योग के संयुक्त आभा के बीच दीपोत्सव का यह त्योहार अपार खुशियां एवं समृद्धि लेकर आने वाला है। विद्वानों का कहना है कि सूर्य, मंगल व चंद्र की युति इस बार खास फल देने वाली है।
ज्योतिषाचार्य पंडित मोहित मिश्र के मुताबिक बृहस्पतिवार को लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ समय शाम 6:10 से 8:06 बजे तक रहेगा। यानी एक घंटे 55 मिनट की अवधि गणेश-लक्ष्मी के पूजन का श्रेष्ठ समय होगा। प्रदोष काल शाम 5:34 मिनट से 8:10 बजे तक और वृषभ काल शाम 6:10 से रात 8:06 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में किया जाना सबसे शुभ माना गया है।
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प्रदोष काल का मतलब सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त से होता है। इसके अलावा प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है। माना जाता है स्थिर लग्न में की गई पूजा-आराधना में माता लक्ष्मी वहां पर अवश्य अपने कुछ अंश के रूप में निवास करने लगती हैं। इसके अलावा महानिशीथ काल में भी लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। इसमें मां काली की पूजा करने का विधान होता है। इस काल में ज्यादातर लोग लक्ष्मी पूजा वे करते हैं जो तांत्रिक या साधक होते हैं।
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दिवाली पूजा मंत्र
मां लक्ष्मी मंत्र- ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:।।
सौभाग्य प्राप्ति मंत्र- ऊं श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
कुबेर मंत्र-ऊं यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं में देहि दापय।