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Basti News: हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रधान मायूस प्रशासक की नियुक्ति पर तेज हुई बहस
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हर्रैया/बस्ती। ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार की ओर से प्रशासक नियुक्त किए जाने की व्यवस्था पर हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद ब्लॉक में पंचायत व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बीते शुक्रवार को न्यायालय के फैसले के बाद क्षेत्र के कई प्रधानों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। उनका कहना है कि सरकार अब जल्द नई व्यवस्था स्पष्ट करे, जिससे पंचायतों के संचालन और विकास कार्यों को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में भी इस फैसले की चर्चा पूरे दिन होती रही। प्रधानों का मानना है कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और इनके माध्यम से सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, आवास, मनरेगा सहित अनेक योजनाओं का संचालन होता है। ऐसे में पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्पष्टता आवश्यक है, ताकि विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित न हो।
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प्रधानों का यह भी कहना है कि गांव की समस्याओं का सबसे बेहतर समाधान स्थानीय जनप्रतिनिधि ही कर सकते हैं, क्योंकि वे सीधे जनता के संपर्क में रहते हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि जल्द नई व्यवस्था लागू नहीं की गई तो पंचायतों के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
बीडीओ हर्रैया विनय कुमार द्विवेदी ने बताया कि ग्राम पंचायतों में सभी आवश्यक एवं जनहित से जुड़े कार्य शासन के प्रचलित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट के निर्णय के संबंध में शासन स्तर से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि पंचायतों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहे और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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बीते शुक्रवार को न्यायालय के फैसले के बाद क्षेत्र के कई प्रधानों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। उनका कहना है कि सरकार अब जल्द नई व्यवस्था स्पष्ट करे, जिससे पंचायतों के संचालन और विकास कार्यों को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
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ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में भी इस फैसले की चर्चा पूरे दिन होती रही। प्रधानों का मानना है कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और इनके माध्यम से सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, आवास, मनरेगा सहित अनेक योजनाओं का संचालन होता है। ऐसे में पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्पष्टता आवश्यक है, ताकि विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित न हो।
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प्रधानों का यह भी कहना है कि गांव की समस्याओं का सबसे बेहतर समाधान स्थानीय जनप्रतिनिधि ही कर सकते हैं, क्योंकि वे सीधे जनता के संपर्क में रहते हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि जल्द नई व्यवस्था लागू नहीं की गई तो पंचायतों के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
बीडीओ हर्रैया विनय कुमार द्विवेदी ने बताया कि ग्राम पंचायतों में सभी आवश्यक एवं जनहित से जुड़े कार्य शासन के प्रचलित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट के निर्णय के संबंध में शासन स्तर से जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि पंचायतों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहे और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।